रात गहरी थी।
Harshal अपने कॉलेज की आखिरी पार्टी में थी — ग्रेजुएशन की रात, हँसी और शोर से भरी हुई। लेकिन उसके दिल में अजीब सा खालीपन था।
"अब क्या?" उसने सोचा। "ज़िंदगी यहीं तक थी या अब कुछ नया शुरू होगा?"
थोड़ी देर बाद, मोबाइल में एक अजीब पोस्ट दिखी —
“अपने मन के अनुसार अपने life partner को बनाइए — personality, looks, behavior, सब कुछ अपने हिसाब से चुनिए।”
वो हँसी।
“क्या मज़ाक है ये!”
फिर भी curiosity ने उसे पकड़ लिया।
उसने मज़ाक-मज़ाक में फ़ॉर्म भर दिया —
Gender: Female
Personality: शांत, आज्ञाकारी, कभी विरोध न करे
Skin tone: गोरा
Hair color: brown
Special traits: "जो मैं कहूँ वही करे।"
“देखते हैं, इस बेवकूफी से क्या निकलता है।” उसने हँसते हुए मोबाइल रखा और पार्टी में खो गई।
उस रात बारिश हो रही थी… और उस बारिश में कुछ बदल गया था।
---
तीन महीने बाद…
Harshal की ज़िंदगी व्यस्त हो चुकी थी। South Korea में नौकरी के लिए उसकी अप्लिकेशन मंजूर हो गई थी। वो छुट्टियों पर घर लौटी थी, बस थोड़ी नींद पूरी करने के लिए।
लेकिन नींद टूट गई —
“डिंग डोंग!”
दरवाज़े पर एक बड़ा सा पार्सल रखा था, और उसके ऊपर एक नोट —
“डिले के लिए क्षमा करें। आपका ऑर्डर अब तैयार है।”
“ऑर्डर?” Harshal ने हैरानी से पढ़ा।
उसने पार्सल खोला… और जैसे उसके हाथों की साँसें थम गईं।
अंदर एक लड़की थी — जिंदा।
उसकी साँसे धीमी थीं, शरीर पर मशीनों के निशान थे। साथ में एक फाइल थी —
“Form No. 3308 – Approved and Delivered.”
उसी फॉर्म की कॉपी… जो Harshal ने तीन महीने पहले भरी थी।
Harshal घबरा गई।
“ये कोई मज़ाक है?!”
वो लड़की धीरे-धीरे आँखें खोलने लगी।
नीली, बेहद गहरी आँखें — जैसे समंदर में कोई रहस्य छिपा हो।
“म… मेरा नाम?” उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
Harshal बोली — “3308 लिखा है तुम्हारे पेपर में। लेकिन तुम्हारा नाम Rui होगा। बस, Rui।”
लड़की ने हल्के से मुस्कुराते हुए सिर झुकाया —
“ठीक है, मालिक।”
Harshal का दिल काँप गया।
“तुम्हें पता भी है तुम बोल क्या रही हो?”
“आपका जो आदेश हो, वही करूंगी।” Rui ने शांति से कहा।
बाहर बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
Harshal ने कहा, “काफ़ी बना दो मेरे लिए।”
Rui तुरंत उठी, जैसे किसी प्रोग्रामिंग से चल रही हो, और थोड़ी देर में ट्रे लेकर आई।
लेकिन जब Harshal ने उसकी कलाई देखी —
वहाँ गहरे कट के निशान थे… पुराने और दर्दनाक।
“ये… किसने किया?”
“मेरे पुराने मालिक ने।” Rui ने शांत चेहरा रखते हुए कहा।
“मैं ठीक हूँ, आप चिंता मत करें।”
Harshal ने कुछ नहीं कहा।
वो बस उसके चेहरे को देखती रह गई —
इतनी मासूमियत, इतनी पीड़ा एक साथ कैसे हो सकती है?
रात के ग्यारह बज चुके थे।
Harshal ने हँसते हुए कहा, “अबे Rui, कपड़े उतारो और चलो मेरे साथ सो जाओ।”
वो मज़ाक कर रही थी — पर Rui ने आदेश मान लिया।
Harshal चौंक गई।
उसने तुरंत उसे रोका, “नहीं, नहीं, रुको! मैं बस मज़ाक कर रही थी!”
Rui ने सिर झुका लिया, उसकी आँखों में आँसू भर आए।
“माफ़ करना… मैंने कुछ गलत किया?”
Harshal ने धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखा।
“नहीं, Rui। अब से तुम्हें किसी के कहने पर खुद को तकलीफ़ नहीं देनी है। यहाँ तुम free हो, समझी?”
Rui ने पहली बार उसकी ओर देखा — सच में देखा।
उस पल में कुछ था… जैसे किसी अधूरे वादे की शुरुआत।
💭 “वो लड़की कौन है?
कहाँ से आई है?
और क्यों लगता है जैसे… मैंने उसे पहले भी देखा है?”
बारिश बाहर बरसती रही — और अंदर दो अधूरी ज़िंदगियाँ एक-दूसरे की कहानी बनने लगीं।
सुबह की रौशनी परदे से छनकर कमरे में फैल रही थी।
Rui रसोई में थी — हाथ में कॉफी मग, लेकिन चेहरा जैसे कहीं खोया हुआ।
Harshal उसे चुपचाप देख रही थी। वो अब Rui की हर हरकत पर नज़र रखती थी… शायद डर से, या शायद किसी अजीब लगाव से।
Harshal (धीरे से): "तुम पूरी रात नहीं सोई?"
Rui (हल्की मुस्कान): "आपका आदेश था कि घर की सफ़ाई पूरी हो जाए…"
Harshal: "Rui, मैंने वो मज़ाक में कहा था… तुम अब मेरे आदेशों पर नहीं, अपने मन से चलोगी।"
Rui ने एक पल को उसकी आँखों में देखा — जैसे समझना चाह रही हो कि “मन से चलना” मतलब क्या होता है।
---
दिन बीतते गए। Rui घर का हर काम करती, पर बीच-बीच में कुछ पलों के लिए रुक जाती — उसकी आँखें खाली हो जातीं, जैसे किसी पुराने memory loop में फँस गई हो।
एक दिन Harshal ने देखा, Rui दवा के डिब्बे में कुछ खोज रही थी।
“ये कौन सी दवा है?” Harshal ने पूछा।
“मुझे नहीं पता… बस ये खाना खाने से पहले लेना ज़रूरी बताया गया था।”
Harshal को शक हुआ। उसने वही दवा का सैंपल लैब में टेस्ट के लिए भेज दिया — बिना Rui को बताए।
तीन दिन बाद रिपोर्ट आई…
दवा में “Memory Suppressant Compound” था।
मतलब — याददाश्त मिटाने वाला केमिकल।
Harshal का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।
“तो Rui की यादें… जानबूझकर मिटाई गई थीं।”
---
उस रात बारिश फिर शुरू हो चुकी थी।
Harshal बालकनी में खड़ी थी, और Rui उसके पास आई — भीगी, काँपती हुई, लेकिन नज़रों में वही शांत भाव।
Rui: "क्या मैंने फिर कुछ गलत किया?"
Harshal (धीरे से): "नहीं Rui… तुमने कुछ भी गलत नहीं किया। बस… मैं जानना चाहती हूँ कि तुम कौन हो।"
Rui की आँखों में दर्द उभरा।
उसने होंठ खोले, जैसे कुछ याद आ रहा हो —
"मुझे... कुछ दिखता है कभी-कभी। ठंडी सफेद दीवारें, आवाज़ें जो मुझसे कहती हैं 'Project 3308'... और फिर... दर्द। बहुत दर्द।"
Harshal ने काँपते हुए उसका हाथ पकड़ा।
"Project 3308?" उसने दोहराया।
वो तो Rui के फ़ाइल नंबर जैसा था…
Rui ने सिर झुका लिया,
"शायद… मुझे बनाया गया था। जन्मा नहीं।"
Harshal की साँसें रुक सी गईं।
“तुम इंसान नहीं… एक एक्सपेरिमेंट हो?”
Rui की आँखें अब भीगी हुई थीं।
“मुझे नहीं पता… लेकिन जब भी आप पास होती हैं, तो कुछ याद आता है… जैसे मैंने आपको पहले कहीं देखा है।”
Harshal ने कदम बढ़ाया, Rui के गाल को छूते हुए कहा —
“शायद इसलिए क्योंकि… हमारी कहानी अधूरी है, Rui।”
बारिश अब रुक चुकी थी, पर हवा में ठंडक और दिलों में सवाल बाकी थे।
💭 “अगर Rui एक लैब प्रोजेक्ट थी, तो किसने उसे बनाया?”
💭 “और Harshal का उस लैब से क्या रिश्ता है?”
कहीं न कहीं, सच दोनों को जोड़ रहा था —
बस Rui को याद नहीं था, और Harshal को अब तक पता नहीं चला था।
...What will happen next?...
... Stay tuned, welcome back to my life....
...The next part will be coming very soon.How did you all like the second part of this?....
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Flashback – College Days
भीड़भाड़ भरा हॉल, ब्लड डोनेशन कैंप लगा हुआ था।
Harshal टेबल के सामने खड़ी थी, sleeves ऊपर की हुईं, चेहरे पर वही जिद्दी आत्मविश्वास।
एक लड़का मुस्कुराते हुए बोला —
“अगर तुमने मुझसे ज़्यादा खून दे दिया तो सारा रक़म तुम्हारी, वरना तुम्हें हार माननी होगी।”
Harshal की भौंहें सिकुड़ गईं, पर होंठों पर मुस्कान आई।
“मैं किसी से कम नहीं।”
वो कुर्सी पर बैठी, और खून देना शुरू हुआ।
थोड़ी देर बाद सब हैरान थे —
लड़के ने हार मान ली, और Harshal ने सारा पैसा जीत लिया।
पर किसी को नहीं पता था… कि उसी दिन उसने अपना खून उस जगह छोड़ा था, जो उसकी ज़िंदगी बदलने वाली थी।
तीन महीने बाद – उसी अस्पताल में
एक अमीर महिला का इलाज चल रहा था।
उसकी हालत गंभीर थी — प्रेगनेंसी के दौरान जटिलता थी।
उसके पति के साथ एक युवा लड़की खड़ी थी… Rui।
Rui उस वक्त बस एक हेल्पर थी —
थकी हुई, डरी हुई, लेकिन मासूम।
उसके हाथ से जैसे ही एक ट्रे गिरी, उस महिला के पति ने गुस्से में उसे थप्पड़ मार दिया।
Rui: "माफ़ करिए… गलती हो गई…"
Man (चिल्लाकर): "तुम जैसी नौकरानियों को यहाँ रहने का हक़ नहीं है!"
तभी Harshal अंदर आई।
“बस! इतनी छोटी बात पर हाथ उठाना तुम्हारा हक़ नहीं है।”
वो Rui के सामने खड़ी हो गई — पहली बार उनकी नज़रें मिलीं।
वो पल धीमा पड़ गया। Rui की आँखों में वो ही नीला रंग था, जो Harshal को जाने क्यों… पहचाना सा लगा।
Rui ने हल्के स्वर में कहा —
“आपने मेरी मदद क्यों की?”
Harshal बोली —
“क्योंकि किसी को भी दर्द में अकेला छोड़ना गलत है।”
Present Time – Harshal’s Apartment
Harshal की आँख अचानक खुली —
वो सपना था या याद?
वो खुद भी नहीं जानती।
पर इतना साफ़ था कि Rui और उसकी मुलाक़ात कोई पहली बार की नहीं थी…
वो उठी और अपनी पुरानी ब्लड डोनेशन रिपोर्ट्स देखने लगी।
एक फाइल पर लिखा था —
“Donor ID: HS-07 / Recipient: Project Code 3308.”
उसका दिल थम गया।
"तो Rui… को ज़िंदा रखने के लिए मेरा ही खून इस्तेमाल हुआ था?"
खिड़की के बाहर फिर वही बारिश शुरू हो गई —
और Harshal के अंदर वही डर और अपनापन, दोनों एक साथ उभर आए।
(सुबह का समय)
“ओ माय गॉड! बहुत ज़्यादा लेट हो चुकी हूँ!” — Harshal ने घड़ी देखते हुए कहा।
मन में हँसते हुए बोली — “अरे यार, आज तो बॉस मार ही देगा मुझे!”
जल्दी-जल्दी तैयार होकर वह ऑफिस के लिए निकल पड़ी। जाते-जाते उसकी नज़र Rui पर पड़ी, जो कमरे के कोने में कुछ लिख रही थी।
“शायद कोई ड्रॉइंग बना रही होगी…” — Harshal ने सोचा और जल्दी से निकल गई।
(रात 11 बजे)
वह ऑफिस से लौट रही थी, थक चुकी थी पर दिमाग में सिर्फ प्रोजेक्ट की फाइल घूम रही थी।
“वो फाइल कहाँ रख दी थी मैंने…?” वह खुद से बड़बड़ा रही थी।
जैसे ही उसने घर का गेट खोला, सामने Rui खड़ी थी — मुस्कुराते हुए।
“आपको आज आने में बहुत देर हो गई, Harshal। लगता है ओवरटाइम फिर से…” Rui ने धीमे स्वर में कहा।
“हाँ, Rui… लेकिन कुछ करके दिखाना है मुझे। कुछ सपने होते हैं जिनके लिए नींद कुर्बान करनी ही पड़ती है,” Harshal ने मुस्कुराकर जवाब दिया।
Rui ने अचानक उसे गले से लगा लिया — “कहीं दूर मत जाना मुझसे…”
Harshal चौंकी, फिर मुस्कुराते हुए उसके बालों पर हाथ फेरा — “नहीं जाऊँगी, पागल।”
(थोड़ी देर बाद)
दोनों ने साथ खाना खाया। Harshal इंटरनेट पर कुछ सर्च कर रही थी — “हम्म… Rui का प्रोजेक्ट कौन सा था ये?”
वह कुछ समझ ही रही थी कि तभी Rui के हाथ पर उसका हाथ पड़ा।
“Rui… तुम्हारा चेहरा इतना गरम क्यों है?”
Rui ने हल्की सी मुस्कान दी — “कुछ नहीं, बस थोड़ा थक गई हूँ…”
Harshal ने उसका माथा छूकर देखा — “नहीं Rui, तुम्हें बुखार है!”
वो पल कुछ बदल गया — अब Harshal के चेहरे पर चिंता थी, और Rui की आँखों में शांति…
जैसे कह रही हो — “तुम्हारे हाथों की गर्माहट ही मेरा इलाज है।
...What will happen next? Stay tuned, welcome back to my life....
...The next part will be coming very soon....
...How did you like the third part?...
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