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REBORN TO TAKE REVENGE FROM LOVE

पुनर्जन्म – दिल की राख से उठता तूफ़ान

रात के अंधेरे में जलती मोमबत्ती की लौ धीमे-धीमे काँप रही थी। उसके सामने बैठी थी अनाया, जिसकी आँखों में वही दर्द था जिसने एक बार उसकी ज़िंदगी को तोड़कर रख दिया था। बस फर्क इतना था कि अब उसकी आँखों में आँसू नहीं… अग्नि थी।

तीन साल पहले की बात याद आते ही उसकी साँसें भारी हो जातीं। एक समय था जब वो रिद्धय पर जान छिड़कती थी—उसका पहला प्यार, उसका सबकुछ। उसने भरोसे के नाम पर सब दे दिया था, यहाँ तक कि खुद को भी। लेकिन रिद्धय ने उसके प्यार को कमज़ोरी समझकर उसे धोखा दिया, उसकी महत्वाकांक्षाओं का इस्तेमाल कर उसे बदनाम किया और अंत में… उसकी मौत का कारण बना।

पर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था।

जहाँ उसकी साँसें थमीं, वहीं उसका पुनर्जन्म शुरू हुआ। नई ज़िंदगी, नया चेहरा, पर दिल? दिल अब भी पुराना ही था—टूटे हुए टुकड़ों से भरा हुआ।

अब वह अनाया नहीं थी—

वह थी अवलिया सिंह राठौर, एक रहस्यमयी लड़की, जो अपनी मौत के पीछे छिपे सच और अपने धोखेबाज़ प्रेमी से बदला लेने के लिए लौटी थी।

उसे इस नई दुनिया में दो महीने हो चुके थे। अपने पिछले जन्म की हर याद उसे साफ-साफ याद थी—रिद्धय की मुस्कान, उसका झूठा प्यार, उसके शब्दों में छिपा ज़हर, उसका गिराया गया सम्मान… और आख़िर में वह अंतिम रात जब उसे अकेला छोड़ दिया गया था।

पर अब हालात बदल चुके थे।

आज पहली बार वह उस जगह जा रही थी जहाँ रिद्धय रहता था—रिद्धय मेहरा, शहर का उभरता बिज़नेस स्टार। हर अख़बार उसके नाम का शोर था, हर इंटरव्यू में उसकी नकली सादगी… और हर तस्वीर में वह मासूम मुस्कान जिसे देखकर लोग दीवाने हो जाते थे।

पर अवलिया के लिए…

वह मुस्कान उसके ज़ख्मों पर नमक थी।

कार के शीशे से बाहर शहर की रोशनी को देखते हुए उसने धीमे से कहा,

“रिद्धय… इस जन्म में अब शिकार मैं नहीं, शिकारी मैं हूँ।”

मुस्कान उसके होंठों पर तैर गई—शांत, पर डरावनी।

जैसे ही उसकी कार मेहरा इंडस्ट्रीज के हेड ऑफिस के सामने रुकी, सिक्योरिटी गार्ड्स ने तुरंत दरवाज़ा खोला। अवलिया की मौजूदगी में एक अजीब-सी गरिमा थी—राजकुमारी जैसी चाल, तेज नज़रें और आत्मविश्वास जिससे सामने वाला खुद को छोटा महसूस करता।

लॉबी में कदम रखते ही लोग उसे देखने लगे, चेहरों पर सवाल, पर उसकी आँखों में सिर्फ एक ही लक्ष्य था—रिद्धय।

उसने रिसेप्शनिस्ट से कहा,

“मुझे मिस्टर रिद्धय मेहरा से मिलना है। उन्हें कहिए, अवलिया सिंह आई हैं।”

नाम सुनते ही रिसेप्शनिस्ट के चेहरे पर हल्की घबराहट आ गई। कुछ ही सेकंड बाद लिफ्ट खुली और रिद्धय बाहर निकला।

उसे देखते ही अवलिया की धड़कन एक पल के लिए थम गई—वही चेहरा, वही आँखें, वही चाल… पर अब उसके लिए प्यार नहीं, बस ज़हर था।

रिद्धय उसकी ओर बढ़ा।

“आप कौन हैं?” उसने विनम्रता से पूछा।

अवलिया मुस्कुराई।

“कोई… जिसे आप जल्द ही याद करने लगेंगे।”

उसने हाथ बढ़ाया। रिद्धय ने उसका हाथ थामा… और उस एक स्पर्श से उसकी रूह में बदले की आग और तेज़ हो उठी।

यही उसकी शुरुआत थी—

वापसी की, बदले की… और उस प्यार की राख से उठती आग की।

Guys aapna jada se jada payar digiye.

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पहली चाल – मुस्कान में छिपा तूफ़ान

रिद्धय का ऑफिस काँच से बना हुआ था—ऊँचा, चमकदार और उसकी तरह ही दिखावटी। अवलिया उसके सामने कुर्सी पर बैठी थी, चेहरे पर सुखद मुस्कान, जबकि दिल में तूफ़ान मचल रहा था।

“तो मिस अवलिया सिंह… आप मुझसे मिलना चाहती थीं?”

रिद्धय ने अपनी सामान्य शालीन आवाज़ में पूछा।

अवलिया ने पैर क्रॉस करते हुए धीमे स्वर में कहा,

“जी। और मेरा यक़ीन कीजिए… ये मुलाक़ात आपकी ज़िंदगी बदल देगी।”

रिद्धय हल्का-सा हँसा।

“मेरी ज़िंदगी बदलने की ताक़त बहुत कम लोगों में है।”

अवलिया की आँखें चमक उठीं।

“तो मैं शायद उन्हीं कम लोगों में से हूँ।”

उनके बीच कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। इस सन्नाटे में सिर्फ दो चीज़ें बोल रही थीं—अवलिया का बदला… और रिद्धय का अहंकार।

अवलिया की योजना शुरू

वो जानती थी कि रिद्धय महत्वाकांक्षी है। उसे हर चीज़ पर कंट्रोल चाहिए—लोगों पर भी, रिश्तों पर भी। और उसे सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है कोई ऐसी चीज़… जो उसे चुनौती दे।

और अवलिया वही चुनौती बनने आई थी।

“मैं एक नई बिज़नेस वेंचर में पार्टनरशिप की बात करने आई हूँ,” उसने कहा।

“और मैं चाहती हूँ कि ये साझेदारी सिर्फ आपके साथ हो।”

रिद्धय ने भौहें उठाईं।

“आप मुझे क्यों चुन रही हैं?”

अवलिया ने एक धीमी मुस्कान के साथ कहा,

“क्योंकि भीड़ में सबसे अलग जो चमकता है… वही चुना जाता है।”

रिद्धय उसकी बातों से प्रभावित होता दिखा। उसकी आँखों में वही उत्साह था जो कभी उसने अनाया को देखकर महसूस किया था। अवलिया के दिल में दर्द और गुस्सा एक साथ उठे, पर उसने चेहरा शांत रखा।

रिद्धय में उठता शक

कुछ देर बाद उसने कहा,

“मैं आपका प्रोफ़ाइल देखूँगा। पर बताइए… आप भारत में नई हैं, है ना?”

अवलिया का दिल एक पल रुका—यह सवाल अनाया के अतीत से टकराता था।

“हाँ,” उसने मुस्कान थामते हुए कहा, “यहाँ आए दो महीना हुआ है। लेकिन मैं तेज़ी से सीखती हूँ… और तेज़ी से कमाती भी हूँ।”

रिद्धय ने सिर हिलाया, पर उसकी नज़रों में हल्का-सा संदेह उभरा।

“आपकी आँखें बहुत जानी-पहचानी लगती हैं,” उसने कहा, “कहीं… पहले मिले हैं हम?”

अवलिया ने अपनी पलकों को झपकाया और कहा,

“नहीं। पर यक़ीन मानिए… अब हम बहुत बार मिलेंगे।”

अतीत फिर जाग उठा

मीटिंग खत्म हुई। जैसे ही अवलिया उठी, रिद्धय ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,

“आप दिलचस्प हैं, मिस अवलिया। मुझे लगता है हम साथ अच्छा काम करेंगे।”

अवलिया मुड़ी और उसकी आँखों में सीधे देखते हुए बोली,

“आपको अंदाज़ा भी नहीं… मैं आपके साथ क्या-क्या करने वाली हूँ।”

उसने यह बात ऐसे कही कि रिद्धय एक पल के लिए ठिठक गया। पर अवलिया आगे बढ़ चुकी थी—शांत, नियंत्रित और घातक।

लिफ्ट में पहुँचते ही उसने गहरी सांस ली।

उसकी उंगलियाँ हल्के से काँप रही थीं—यह डर नहीं, अतीत का दर्द था।

जब-जब रिद्धय उसके सामने आता, उसकी मौत की यादें उसे भीतर तक चीर देती थीं।

पर अब वह टूटती नहीं थी—

अब वह तोड़ने आई थी।

आग लगने की शुरुआत

कार में बैठते ही उसने अपने असिस्टेंट को कॉल किया।

“सभी फाइलें तैयार कर दो। कल से हम मेहरा इंडस्ट्रीज पर पहला वार करेंगे। और हाँ—उसे बस इतना महसूस होना चाहिए कि कोई अनजाना तूफ़ान उसकी तरफ बढ़ रहा है।”

फोन कटते ही उसने खिड़की से बाहर देखा।

शहर वही था, लोग वही थे—

पर अब इस शहर में एक लड़की लौट चुकी थी,

जो प्यार से नहीं…

अपने बदले की मुस्कान से पहचानी जाएगी।

और रिद्धय?

उसे अभी अंदाज़ा भी नहीं कि उसका विनाश… उसके दरवाज़े तक आ चुका है।

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“मैं देर वहीं करती हूँ जहाँ रहना नहीं चाहती।”

अगली सुबह शहर की हलचल अभी जाग ही रही थी, लेकिन मेहरा इंडस्ट्रीज के भीतर हलचल कुछ और ही थी। रिद्धय के निजी असिस्टेंट की मॉर्निंग रिपोर्ट में एक नई फ़ाइल शामिल थी—A.S. Enterprises, जिसकी मालिक थी… अवलिया सिंह।

रिद्धय ने फ़ाइल पलटी, फिर ठहर गया।

“कल ही मिली और आज पूरी कंपनी मेरे सामने खड़ी है? यह लड़की है कौन…?”

उसकी आवाज़ में हल्की बेचैनी थी।

वहीं दूसरी ओर, अवलिया एक शांत मुस्कान के साथ अपनी ऑफिस चेयर पर बैठी थी। उसके सामने थी रिद्धय की कंपनी की इंटरनल वीकनेस रिपोर्ट—वो सारे राज़, कमजोरियाँ, पुराने स्कैंडल जो दुनिया नहीं जानती थी… लेकिन अवलिया जानती थी।

क्योंकि वो अनाया थी।

उसी ने कभी रिद्धय को दिल से ज्यादा अपनी मेहनत दी थी।

उसी ने वो हर रहस्य खोजे थे जो अब वो उसके खिलाफ इस्तेमाल करने वाली थी।

पहला कदम: विश्वास का जाल

दोपहर में अवलिया ने रिद्धय को मेसेज भेजा—

“लंच पर चर्चा करें? एक प्रस्ताव है जो सिर्फ आप समझ सकते हैं।”

रिद्धय मुस्कुराया, पर उसके अंदर एक अजीब-सा खिंचाव था।

“यह लड़की मुझे खींच क्यों रही है?”

वो खुद नहीं समझ पा रहा था।

रेस्टोरेंट पहुँचते ही उसने देखा—अवलिया खिड़की के पास बैठी थी, धूप में उसके बाल चमक रहे थे, चेहरा शांत था… पर रिद्धय को नहीं पता था कि उस शांत चेहरे के पीछे हजार तूफ़ान बंधे हैं।

“आप हमेशा इतनी ही समय पर होती हैं?” रिद्धय ने पूछा।

अवलिया ने मुस्कुराकर कहा,

“मैं देर वहीं करती हूँ जहाँ रहना नहीं चाहती।”

“और यहाँ?” उसने तुरंत पूछा।

“यहाँ मैं समय से पहले भी आ सकती हूँ।”

उसके शब्दों में एक रहस्य था।

रिद्धय को महसूस हुआ खतरा

लंच के बीच-अचानक अवलिया बोली—

“आप पर इस साल पाँच बड़े केस चल रहे हैं। शेयर मार्केट में आपकी इमेज डsturbed है। अगर किसी ने आपके खिलाफ कदम उठाया तो… नुकसान बड़ा होगा।”

रिद्धय चौंक गया।

“आपको ये सब कैसे पता?”

अवलिया ने बर्फीली शांति के साथ कहा,

“जिसके पास दिमाग हो… वह जानने का रास्ता खुद बना लेता है।”

उसकी आँखें कुछ पलों के लिए रिद्धय की आँखों में गहराई से डूबी रहीं—जैसे उसे पढ़ रही हों, परख रही हों… और अंदर तक झाँक रही हों।

रिद्धय को पहली बार एक हल्की सिहरन महसूस हुई।

क्योंकि वो ऐसी नज़र सिर्फ एक बार देख चुका था—

अनाया की आँखों में।

अवलिया का छुपा हमला

लंच खत्म होते ही अवलिया ने उसे एक गिफ्ट बैग थमाया।

“ये आपके लिए है… मेरे नए प्रोजेक्ट की पहली झलक।”

रिद्धय ने बैग खोला।

अंदर एक छोटा-सा क्रिस्टल ग्लोब था, जिसमें एक बर्फीला गुलाब बंद था।

गुलाब देखकर उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

अनाया…

उसे वही बर्फीले गुलाब पसंद थे।

“क्या हुआ?” अवलिया ने मासूमियत से पूछा।

“कुछ… नहीं।”

रिद्धय की आवाज़ काँप गई।

उसे लगा जैसे कहीं कोई पुरानी परछाई फिर जग गई हो।

रात का तूफ़ान

शाम को मेहरा इंडस्ट्रीज में एक खबर फैल गई—

एक अज्ञात निवेशक ने रिद्धय के एक बड़े प्रोजेक्ट के शेयर भारी कीमत पर खरीद लिए थे… और उस निवेशक का नाम था—

अवलिया सिंह।

रिद्धय की आँखें हैरानी और डर से फैल गईं।

“वो सिर्फ एक मुलाक़ात नहीं थी… वो हमला था।”

उधर अपनी बालकनी में खड़ी अवलिया शहर की रोशनियों को देख रही थी।

हवा उसके बालों को छूती जा रही थी, पर उसकी आँखों में सिर्फ एक आग थी।

“पहला वार हो गया, रिद्धय,” उसने धीमे से कहा,

“अब तुम्हें हर साँस के साथ महसूस होगा…

कि कोई है जो तुम्हारी बर्बादी की तरफ कदम बढ़ा रहा है।”

और रात का अंधेरा उसके बदले को और गहरा कर रहा था।

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