आसमान लाल नहीं था।
वह खाली था।
ना बादल,
ना चाँद,
ना तारे।
जैसे किसी ने ब्रह्मांड से उम्मीद ही निकाल ली हो।
कोनोहा अब गाँव नहीं था।
वह एक कब्रिस्तान था।
टूटे हुए होकागे स्मारक,
जले हुए पेड़,
और चक्र से काली पड़ी धरती।
हवा भी चलती थी तो आवाज़ नहीं करती थी—
जैसे उसे भी डर हो कि कहीं कोई ज़िंदा न समझ ले।
उस बर्बाद ज़मीन के बीच
एक आदमी घुटनों के बल बैठा था।
सुनहरे बाल अब राख से ढके थे।
चेहरे पर उम्र नहीं…
थकान थी।
यह था—
नारूटो उज़ुमाकी।
वह आख़िरी शिनोबी था।
उसके सामने पड़े थे—
🔹 बोरुटो उज़ुमाकी — आँखें खुली, पर आत्मा गायब
🔹 कावाकी — टूटा हुआ शरीर, जली हुई कर्मा
🔹 हिमावारी — उसके हाथ में अब भी नारूटो की उंगली जकड़ी हुई
🔹 सासुके उचिहा — रिन्नेगन और शारिंगन दोनों बुझ चुके
🔹 सकुरा, शिखामारू, काकाशी…
कोई नहीं बचा था।
नारूटो ने काँपते हाथ से हिमावारी के बालों को छुआ।
उसकी आवाज़ नहीं निकली।
क्योंकि वह बहुत देर पहले टूट चुकी थी।
Ōtsutsuki जीत चुके थे।
कोई युद्ध नहीं था अब।
कोई प्रतिरोध नहीं।
शिनोबी सिस्टम मिट चुका था।
निंजा इतिहास समाप्त हो चुका था।
धरती सिर्फ़ एक फार्म थी।
नारूटो ने ऊपर देखा।
आकाश में तीन आकृतियाँ थीं—
सफेद, शांत, निर्दयी।
Ōtsutsuki।
उनमें से एक ने कहा:
“दिलचस्प है…
बिना बीजु के भी
यह मानव अब तक खड़ा है।”
दूसरा बोला:
“लेकिन अब वह भी बेकार है।”
कुरामा नहीं था।
अब नहीं।
बरसों पहले,
इशिकी Ōtsutsuki को रोकते हुए
कुरामा ने बैरियन मोड में
अपना अस्तित्व जला दिया था।
उस दिन नारूटो रोया नहीं था।
उसके पास वक़्त नहीं था।
आज…
उसके पास सिर्फ़ वक़्त था।
“कुरामा…”
नारूटो फुसफुसाया।
“मैं थक गया हूँ।”
Ōtsutsuki ने हमला नहीं किया।
उन्हें ज़रूरत नहीं थी।
दुनिया पहले ही मर चुकी थी।
नारूटो ने अपनी आँखें बंद कीं।
उसके दिमाग़ में यादें फटने लगीं—
हिनाता की मुस्कान
बोरुटो की जिद
कावाकी का गुस्सा
जिराया की हँसी
मिनाटो और कुशिना के चेहरे
जिन्हें उसने कभी सच में नहीं जाना
“मैंने सब कुछ किया…”
उसकी आवाज़ टूट गई।
“फिर भी मैं देर से पहुँचा।”
तभी—
धरती काँपी नहीं।
समय काँपा।
एक पुरानी, बहुत पुरानी अनुभूति
उसके खून में जागी।
जैसे कुछ
जो हमेशा से वहाँ था
अब साँस लेने लगा हो।
उसके सामने हवा मुड़ी।
एक दरार बनी।
ना चक्र।
ना कर्मा।
ना सेनजुत्सु।
कुछ और।
एक आवाज़ आई—
लेकिन बाहर से नहीं।
उसके भीतर से।
“उज़ुमाकी नारूटो…”
“या शायद… तुम्हारा नाम कभी सिर्फ़ यही नहीं था।”
नारूटो की आँखें खुल गईं।
पहली बार…
डर नहीं था।
सवाल था।
“अगर मैं पीछे जाऊँ…”
उसने कहा,
“तो क्या यह सब बदलेगा?”
आवाज़ ने जवाब नहीं दिया।
सिर्फ़ यह कहा:
“सच बदलेगा।”
“खून बोलेगा।”
“और जो छुपाया गया था…
वह जागेगा।”
नारूटो को अचानक
मिनाटो की मुस्कान याद आई।
लेकिन इस बार—
कुछ अलग था।
कुछ अधूरा।
कुछ…
जो कभी बताया नहीं गया।
दरार फैलने लगी।
Ōtsutsuki पीछे हटे।
पहली बार…
उनके चेहरे पर सतर्कता थी।
नारूटो खड़ा हुआ।
उसने आख़िरी बार
अपने बच्चों को देखा।
दुनिया को देखा।
और बोला:
“अगर मैं राक्षस बनूँ…”
“अगर मैं इतिहास तोड़ दूँ…”
“तो भी ठीक है।”
उसकी आँखों में आँसू थे।
लेकिन आवाज़ में लोहे जैसी ठंडक।
“इस बार…”
“मैं जीतूँगा।”
समय टूट गया।
शरीर नहीं—
अस्तित्व बिखर गया।
और अंधेरे के बाद—
एक धड़कन।
एक रोना।
एक जन्म।
बहुत दूर,
बहुत पीछे—
एक नवजात ने
अपनी आँखें खोलीं।
और समय ने काँपते हुए
उसे वापस स्वीकार किया।
🌑 अध्याय 1 समाप्त
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रात वही थी।
आसमान फटा हुआ था।
हवा में आग, खून और चक्र की बदबू थी।
इतिहास की वह रात
जिसे कोई बदल नहीं पाया—
क्यूबी की रात।
कोनोहा जल रहा था।
घर गिर रहे थे,
निंजा मर रहे थे,
और आसमान में एक राक्षस
हँस रहा था।
एक छोटे से कमरे में—
एक नवजात बच्चा
कपड़े में लिपटा हुआ
शांत पड़ा था।
वह रो नहीं रहा था।
👶 “तो… मैं सच में वापस आ गया हूँ।”
उसकी आँखें बंद थीं,
लेकिन उसकी चेतना पूरी तरह जाग चुकी थी।
यह बच्चा नहीं था जो सोच रहा था—
यह वह आदमी था
जिसने सब कुछ खो दिया था।
दरवाज़ा खुला।
कुशिना उज़ुमाकी लड़खड़ाती हुई अंदर आई।
उसका शरीर ज़ख़्मों से भरा था।
उसने बच्चे को उठाया।
“नारूटो…”
उसकी आवाज़ काँप रही थी,
लेकिन उसकी पकड़ मज़बूत थी।
नारूटो ने उसकी धड़कन महसूस की।
तेज़।
कमज़ोर।
अस्थायी।
👶 “माँ…”
शब्द बाहर नहीं आए।
लेकिन दर्द आया।
बाहर—
मिनाटो नामिकाज़े
क्यूबी के सामने खड़ा था।
चौथा होकागे।
एक आदमी
जो जानता था
कि वह आज नहीं बचेगा।
“कुशिना!”
मिनाटो चिल्लाया।
उसकी आँखें बच्चे पर पड़ीं।
एक पल के लिए—
सब कुछ रुक गया।
उसने नारूटो को देखा।
और नारूटो—
उसे।
👶 “पापा…”
उस पल
नारूटो सब भूल जाना चाहता था।
भविष्य।
युद्ध।
मौत।
लेकिन समय निर्दयी था।
सीलिंग शुरू हुई।
क्यूबी की दहाड़
पूरे आकाश को चीर रही थी।
मिनाटो ने हाथ जोड़े।
कुशिना ने दाँत भींचे।
“नारूटो…”
कुशिना ने फुसफुसाया।
“तुम्हें अकेला छोड़ने के लिए माफ़ करना।”
नारूटो का दिल फट गया।
👶 “नहीं…”
“इस बार नहीं…”
लेकिन उसका शरीर छोटा था।
कमज़ोर।
तभी—
क्यूबी की चेतना
सील के भीतर उतरी।
🦊 “तो… यह वही बच्चा है।”
नारूटो ने पहली बार
उस ओर देखा।
👶 “कुरामा…”
क्यूबी चुप हो गया।
🦊 “तुम…”
🦊 “तुम बच्चे नहीं हो।”
अंतिम क्षण
क्यूबी सील हो चुका था।
कुशिना गिर पड़ी।
मिनाटो ने आख़िरी बार
अपने बेटे को पकड़ा।
उसके हाथ काँप रहे थे।
“मज़बूत बनना…”
मिनाटो ने कहा।
“लेकिन अकेला मत बनना।”
उसकी चक्र लौ बुझ गई।
कुशिना की साँस भी
उसी पल रुक गई।
सन्नाटा।
एक बच्चा
मरे हुए माता-पिता के बीच पड़ा था।
नारूटो ने रोने की कोशिश की।
लेकिन आँसू नहीं निकले।
👶 “मैं फिर देर से पहुँचा…”
सील के भीतर—
कुरामा ने धीरे से कहा:
🦊 “अब तुम्हारे पास कोई नहीं है, लड़के।”
नारूटो की चेतना काँपी।
👶 “गलत।”
“अब मेरे पास समय है।”
पहली बार—
नवजात नारूटो रोया।
और उसकी रोने की आवाज़ में—
कोनोहा का भविष्य
काँप उठा।
🌑 Chapter 2 Ends
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हवा भारी थी, और कोनोहा की गलियाँ उस दिन कुछ और भी भारी महसूस कर रही थीं।
हर कदम पर मिट्टी की सुगंध और धूल की हल्की गंध फैल रही थी।
नारूटो उज़ुमाकी,
बस कुछ महीनों का बच्चा,
अपने माता-पिता के अंतिम संस्कार के लिए रखा गया था।
कुरामा, उसकी पीठ में छिपा हुआ, धीरे से फुसफुसाया:
🦊 “छोटा, यह समय कठिन है।
लेकिन याद रखो—तुम अब जानते हो।
तुम्हारे भीतर वह शक्ति है जो केवल इस दुनिया को नहीं,
संपूर्ण shinobi दुनिया के भविष्य को बदल देगी।”
नारूटो ने अपनी छोटी आँखें खोलीं।
वह रो नहीं रहा था।
लेकिन उसकी आँखों में भारी समझ थी—
एक बच्चे से परे समझ, जो केवल उसकी भविष्य की यादों से आई थी।
वह जानता था कि वह अकेला है।
वह जानता था कि उसके माता-पिता अब लौटेंगे नहीं।
अंतिम संस्कार
लकड़ी का ताबूत धीरे-धीरे मिट्टी में समा रहा था।
गाँव के लोग खड़े थे। कुछ रो रहे थे, कुछ सिर झुके हुए।
इरुका भी वहां था, लेकिन उसने बच्चे से दूरी बनाई।
वह नारूटो को पसंद नहीं करता था।
लोगों ने बच्चे को देखा और एक अजीब सी ऊर्जा महसूस की।
उसकी साँस में हल्का कंपन था।
छोटे हाथ हल्के फड़फड़ाए।
मिट्टी और हवा के संपर्क में उसके भीतर की शक्ति का एक छोटा सा संकेत दिखाई दिया,
जो अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं था।
एक बूढ़े ने धीरे से कहा—
“यह बच्चा… साधारण नहीं है।”
कुरामा ने उसकी पीठ पर हल्का स्पर्श किया।
🦊 “साधारण? अब देखो, छोटा।
तुम्हारे भीतर वह है जो इतिहास, युद्ध, और shinobi दुनिया के नियमों को बदल देगा।
एक दिन… तुम उन सबको बचाओगे,
जो इस दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं—
और दुनिया को फिर से संतुलन की ओर ले जाओगे।”
नारूटो ने हल्का फड़फड़ाया।
उसके छोटे हाथ हवा में हिले,
लेकिन अभी वह केवल मासूम था, केवल बच्चा।
गांव की चुप्पी
गाँव के लोग उसे देखते हुए दूरी बनाए रखते थे।
कुछ डर रहे थे, कुछ जिज्ञासु।
क्योंकि यह बच्चा केवल बच्चा नहीं था।
उसकी आंतरिक शक्ति और भविष्य की चेतना आसपास के हर व्यक्ति को महसूस हो रही थी।
कुरामा ने फुसफुसाया:
🦊 “देखा? यह केवल शुरुआत है।
एक दिन तुम सबको दिखाओगे कि तुम्हारा अस्तित्व क्यों जरूरी है।
तुम वह बनोगे जो केवल जीवन बचाएगा नहीं,
बल्कि shinobi दुनिया को स्थायी शांति और संतुलन में बदल देगा।”
छोटे नारूटो की पहली चेतना
नारूटो ने मिट्टी को हल्का सा छुआ।
👶 “मैं जानता हूँ… मैं अब अकेला नहीं हूँ।”
वह कुछ नहीं बोल पाया, लेकिन उसकी चेतना
उस छोटे शरीर से बाहर झलक रही थी।
कुरामा ने हल्की हँसी दी:
🦊 “और तुम नहीं जानते कि यह शक्ति कितनी बड़ी है।
तुम्हें सिर्फ इंतजार करना है, और सीखना।”
नारूटो ने हल्का सा हिलकर सहमति जताई।
उसकी आँखों में चमक थी—
मासूमियत और भविष्य की चेतना का अनजाना मिश्रण।
नारूटो की भविष्य की यादें उसके छोटे मन में हल्के रूप से आईं:
पूरी shinobi दुनिया का भविष्य
युद्धों को रोका जाना
लोगों की सुरक्षा और नए नियम
कोनोहा का उज्जवल भविष्य
👶 “मैं सबकुछ बदलने वाला हूँ…”
उसने नहीं कहा, लेकिन उसकी चेतना ने यह वादा किया।
अंतिम दृश्य
सूरज की हल्की किरण ताबूत पर गिरी।
लेकिन छोटे नारूटो की आँखों में पहला संकेत था—
एक चमक, जो सिर्फ मासूमियत नहीं थी।
यह भविष्य, शक्ति और एक नई shinobi दुनिया बनाने की चेतना का संकेत थी।
कुरामा उसकी पीठ पर शांत बैठा था।
हवा में हल्की कंपन थी।
🦊 “शुरुआत हो चुकी है, छोटा।
अब पूरी दुनिया तुम्हारे इंतजार में है।”
✅ Chapter 3 Ends
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