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Ek Anjaan Rishta

Mandap, Dhokha aur Ek Sauda

शहनाइयों की गूँज, गुलाबों की भीनी खुशबू और चारों तरफ बिखरी रोशनी—अनन्या कपूर के लिए यह सब किसी खूबसूरत ख्वाब जैसा होना चाहिए था। लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था। लाल जोड़े में सजी अनन्या, अपने कमरे के आईने के सामने खड़ी थी। उसने अपनी हथेलियों पर रची गहरी लाल मेहंदी को देखा, जिसमें बड़ी बारीकी से 'रोहन' का नाम लिखा था। लेकिन अजीब बात थी, उसे आज खुशी से ज्यादा बेचैनी महसूस हो रही थी।

अचानक, बाहर हॉल में छाया शोर सन्नाटे में बदल गया। अनन्या का दिल जोर से धड़का। वह जानती थी कि यह सन्नाटा किसी शुभ समाचार का संकेत नहीं है। उसने तेजी से अपने कमरे का दरवाजा खोला और सीढ़ियों की तरफ भागी।

हॉल का नजारा देखकर अनन्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके पिता, मिस्टर कपूर, सोफे पर ढह गए थे और उनके हाथ कांप रहे थे। रोहन के पिता सिर झुकाए खड़े थे और पास ही जमीन पर एक चिट्ठी पड़ी थी।

"वह नहीं आएगा! वह अपनी सेक्रेटरी के साथ भाग गया है!" अनन्या की बुआ की चीख ने पूरे हॉल को हिला दिया।

अनन्या ने कांपते हाथों से वह चिट्ठी उठाई। रोहन ने लिखा था—"अनन्या, मैं यह शादी नहीं कर सकता। मुझे पता चला है कि तुम्हारी पुश्तैनी जायदाद कानूनी पचड़ों में फंसी है। मुझे एक ऐसी पत्नी चाहिए जो मेरे बिजनेस में पैसा लगा सके, न कि वह जो खुद कर्ज में डूबी हो। मैं अपनी सेक्रेटरी से प्यार करता हूँ, वह कम से कम अमीर तो है।"

चिट्ठी पढ़ते ही अनन्या की आँखों के सामने अंधेरा छा गया। रोहन, जिससे वह पिछले दो साल से प्यार करती थी, वह इतना गिर सकता है? उसने सिर्फ अनन्या का दिल ही नहीं तोड़ा था, बल्कि सरेआम उसके पिता की इज्जत की नीलामी कर दी थी।

"हाय राम! अब इस बेचारी का क्या होगा?"

"देखा, मैंने पहले ही कहा था, बिना जांच-पड़ताल के शादी तय नहीं करनी चाहिए थी। अब तो कपूर खानदान की नाक कट गई!"

रिश्तेदारों और मेहमानों की ये कड़वी बातें अनन्या के कानों में पिघले हुए लोहे की तरह उतर रही थीं। उसने अपने पिता की तरफ देखा, जो शर्मिंदगी और दुख के कारण किसी से नजरें नहीं मिला पा रहे थे।

लेकिन अनन्या कपूर कोई आम लड़की नहीं थी। वह एक 'मल्टी-टैलेंटेड जीनियस' थी। दुनिया उसे सिर्फ एक अमीर बाप की बेटी समझती थी, लेकिन पर्दे के पीछे वही थी जो अपने पिता के गिरते हुए बिजनेस को अपनी बेहतरीन रणनीतियों और कोडिंग स्किल्स से बचा रही थी। उसका दिमाग एक सुपर कंप्यूटर से भी तेज चलता था।

रोहन ने सोचा था कि मैं टूट जाऊंगी? उसने सोचा था कि वह मेरे परिवार का तमाशा बनाएगा? अनन्या की मुट्ठियां भिंच गईं। उसकी आँखों के आंसू अब गायब हो चुके थे और उनकी जगह एक ठंडी आग ने ले ली थी।

उसने हॉल में चारों तरफ नजर दौड़ाई। हर कोई उसका मजाक उड़ाने के लिए तैयार खड़ा था। तभी उसकी नजर वीआईपी (VIP) सेक्शन में बैठे उस शख्स पर पड़ी, जो हाथ में वाइन का गिलास लिए इस पूरे ड्रामे को बड़ी तटस्थता से देख रहा था। उसके चेहरे पर न हमदर्दी थी, न ही हैरानी।

वह था—विक्रम सिंघानिया।

विक्रम, जिसके एक इशारे पर शेयर बाजार हिल जाता था। वह यहाँ किसी रिश्तेदारी की वजह से नहीं, बल्कि एक बिजनेस डील के सिलसिले में आया था। अनन्या का दिमाग तेजी से डेटा प्रोसेस करने लगा। उसे याद आया कि विक्रम सिंघानिया को अपने दादा की वसीयत पूरी करने के लिए एक महीने के भीतर शादी करनी थी, वरना उसकी सारी संपत्ति हाथ से निकल जाती।

अनन्या के होंठों पर एक जानलेवा मुस्कुराहट आई। उसने अपना घूंघट उठाया और उसे बड़ी मजबूती से अपने सिर पर सेट किया। वह रोते हुए अपने कमरे में नहीं गई, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ सीधा विक्रम सिंघानिया की तरफ बढ़ने लगी। हॉल में मौजूद हर शख्स की सांसें थम गईं।

अनन्या के कदम जब वीआईपी सोफे की तरफ बढ़े, तो पूरे हॉल में कानाफूसी का शोर अचानक एक सन्नाटे में तब्दील हो गया। लोग एक-दूसरे को कोहनियां मारकर इशारा करने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक दुल्हन, जिसका दूल्हा अभी-अभी मंडप छोड़कर भागा हो, वह शहर के सबसे खूंखार और ताकतवर बिजनेस टाइकून की तरफ क्यों जा रही है।

विक्रम सिंघानिया ने अपनी ठंडी, गहरी आँखों से अनन्या को अपनी ओर आते देखा। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, लेकिन भीतर ही भीतर वह इस लड़की की हिम्मत देख कर थोड़ा हैरान जरूर था। जहाँ दूसरी लड़कियां उसके सामने आने से कतराती थीं, यह लड़की सीधा उसकी आँखों में आँखें डाल कर खड़ी हो गई थी।

अनन्या, विक्रम के ठीक सामने जाकर रुक गई। उसने गौर किया कि विक्रम का व्यक्तित्व उसकी तस्वीरों से कहीं ज्यादा प्रभावशाली था। एक काला थ्री-पीस सूट, सलीके से संवारे हुए बाल और एक ऐसी शख्सियत जो बिना कुछ बोले भी सत्ता का अहसास कराती थी।

"मिस्टर सिंघानिया," अनन्या की आवाज पूरे हॉल में गूँजी। उसकी आवाज में न कंपन था, न ही कोई डर।

विक्रम ने अपनी कलाई पर बंधी महंगी घड़ी देखी और फिर बड़ी बेरुखी से कहा, "मिस कपूर, मेरे पास फालतू तमाशों के लिए वक्त नहीं है। अगर आप हमदर्दी की तलाश में यहाँ आई हैं, तो आप गलत इंसान के पास हैं।"

अनन्या ने एक हल्की सी मुस्कान दी, जो किसी चुनौती से कम नहीं थी। "मैं यहाँ हमदर्दी मांगने नहीं, बल्कि आपको एक 'ऑफर' देने आई हूँ। एक ऐसा ऑफर, जिसे ठुकराना आपके बिजनेस और आपकी विरासत (Legacy) के लिए बहुत महंगा साबित होगा।"

विक्रम ने अपना वाइन का गिलास टेबल पर रखा और थोड़ा आगे झुकते हुए उसे गौर से देखा। "दिलचस्प... बोलिए।"

अनन्या ने बिना हिचकिचाए कहा, "आपके दादा जी की वसीयत... जिसके मुताबिक आपको अपना पारिवारिक बिजनेस संभालने के लिए अगले 21 दिनों के भीतर शादी करनी अनिवार्य है। अगर आप ऐसा नहीं करते, तो सिंघानिया ग्रुप का 40% हिस्सा चैरिटी में चला जाएगा और आपके हाथ से पावर निकल जाएगी। क्या मैं सही हूँ?"

विक्रम की आँखों में एक चमक सी कौंधी। यह जानकारी बेहद गोपनीय थी। उसने अपनी कुर्सी के हत्थे पर अपनी उंगलियां बजाते हुए पूछा, "तुम्हें यह सब कैसे पता?"

"मैं सिर्फ एक दुल्हन नहीं हूँ मिस्टर सिंघानिया, मैं एक 'जीनियस' हूँ। डेटा माइनिंग और मार्केट रिसर्च मेरे लिए बच्चों का खेल है," अनन्या ने आत्मविश्वास से कहा। "आज रोहन भाग गया, मेरी इज्जत दांव पर है। आपको एक पत्नी चाहिए, मुझे अपने परिवार का सम्मान बचाना है। तो क्यों न हम एक समझौता कर लें? आप मुझसे अभी, इसी मंडप में शादी करेंगे। यह शादी सिर्फ एक 'कॉन्ट्रैक्ट' होगी—एक साल के लिए। एक साल बाद हम अपनी-अपनी राहें अलग कर लेंगे।"

पूरे हॉल में जैसे बम फूट गया। अनन्या के पिता, मिस्टर कपूर, भागते हुए उसके पास आए। "अनन्या! यह तुम क्या अनर्थ कर रही हो? होश में तो हो? तुम सिंघानिया साहब से ऐसी बात कैसे कर सकती हो?"

रिश्तेदारों ने फिर जहर उगलना शुरू किया। "देखो, दूल्हा भागा तो अब यह अमीर बाप के बेटे को फांस रही है! कैसी बेशर्म लड़की है!"

विक्रम अचानक अपनी जगह से खड़ा हुआ। उसका लंबा कद अनन्या के सामने एक दीवार की तरह खड़ा था। उसने अनन्या के चेहरे की तरफ अपना हाथ बढ़ाया। लोग समझे कि शायद वह उसे धक्का देगा या थप्पड़ मारेगा, लेकिन उसने सिर्फ अनन्या की ठुड्डी को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।

"एक साल का कॉन्ट्रैक्ट? और बदले में मुझे क्या मिलेगा? सिंघानिया साम्राज्य को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है," विक्रम की आवाज ठंडी और भारी थी।

अनन्या ने पीछे हटने के बजाय उसकी आँखों में गहराई से देखा और धीमी आवाज में कहा, "मिस्टर सिंघानिया, आपके 'प्रोजेक्ट X' की कोडिंग फाइल में एक ऐसा बग (Bug) है जिसे आपकी पूरी आईटी टीम तीन महीने से नहीं सुलझा पाई है। अगर मैं उसे अभी, आधे घंटे में ठीक कर दूँ, तो क्या आप मेरा हाथ थामेंगे?"

विक्रम के चेहरे पर पहली बार हैरानी के भाव आए। उस प्रोजेक्ट के बारे में सिर्फ पांच लोग जानते थे। उसने अनन्या को ऊपर से नीचे तक देखा। लाल जोड़े में सजी यह लड़की किसी पहेली जैसी लग रही थी।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अनन्या की कलाई पकड़ ली। "अगर तुमने वह बग ठीक कर दिया, तो आज इस मंडप से तुम अनन्या कपूर नहीं, बल्कि मिसेज अनन्या विक्रम सिंघानिया बनकर निकलोगी। लेकिन याद रखना मिस कपूर... सिंघानिया के साथ सौदे महंगे पड़ते हैं।"

अनन्या ने दृढ़ता से कहा, "मुझे सौदेबाजी बखूबी आती है, मिस्टर सिंघानिया। चलिए मंडप की तरफ!"

पूरे मैरिज हॉल में सन्नाटा इतना गहरा था कि लोगों के दिल की धड़कनें साफ सुनी जा सकती थीं। विक्रम सिंघानिया ने अपनी जेब से एक स्लीक, ग्रे रंग का लैपटॉप निकाला और उसे टेबल पर रख दिया। यह उसका पर्सनल वर्क स्टेशन था, जिसे वह हमेशा अपने साथ रखता था।

"तुम्हारे पास सिर्फ पंद्रह मिनट हैं, मिस कपूर," विक्रम ने अपनी घड़ी की ओर देखते हुए कहा। "अगर तुम 'प्रोजेक्ट X' के उस एन्क्रिप्शन एरर (Encryption Error) को बाईपास कर पाईं, तो यह शादी होगी। वरना, तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इस अपमान के साथ जीना होगा।"

अनन्या ने एक गहरी सांस ली। उसने अपने भारी लहंगे की आस्तीन को थोड़ा ऊपर चढ़ाया और कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां रख दीं। उसके चारों तरफ लोग जमा हो गए थे—उसके पिता डर और उम्मीद के साथ देख रहे थे, जबकि रिश्तेदार मन ही मन अनन्या की हार की दुआ मांग रहे थे।

अनन्या की उंगलियां कीबोर्ड पर बिजली की रफ्तार से चलने लगीं। कोड की हजारों लाइनें स्क्रीन पर दौड़ रही थीं। वह एक 'मल्टी-टैलेंटेड जीनियस' थी, और यह उसके लिए सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि उसकी गरिमा की लड़ाई थी।

विक्रम उसे गौर से देख रहा था। उसने आज तक कई प्रोफेशनल्स देखे थे, लेकिन एक दुल्हन के लिबास में, माथे पर बिंदिया और हाथों में भारी चूड़ियां पहने हुए किसी लड़की को इतनी महारत के साथ जटिल कोडिंग करते देखना उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव था।

ठीक बारहवें मिनट पर, अनन्या ने 'Enter' दबाया। स्क्रीन पर एक हरा सिग्नल चमका—"Access Granted. Bug Fixed."

विक्रम के चेहरे पर पहली बार एक गहरी प्रशंसा का भाव आया। उसने अपनी कुर्सी पीछे की और खड़ा हो गया। "इम्प्रेसिव। बहुत इम्प्रेसिव।"

उसने अपना हाथ अनन्या की ओर बढ़ाया और ऊँची आवाज़ में बोला, जिसे पूरा हॉल सुन सके—"पंडित जी, रस्में शुरू कीजिए। सिंघानिया खानदान की बहू तैयार है।"

मचा हुआ कोहराम अचानक तालियों और फुसफुसाहट में बदल गया। रोहन के पिता, जो अभी तक अपनी हार पर मजे ले रहे थे, चुपके से वहां से खिसकने लगे। लेकिन विक्रम की नज़र उन पर पड़ गई।

"रुको!" विक्रम की आवाज़ किसी गरजते शेर जैसी थी। "रोहन के पिता से कहो कि अपने बेटे को बता दें... उसने आज सिर्फ एक लड़की को नहीं छोड़ा, बल्कि सिंघानिया ग्रुप की दुश्मनी मोल ली है। और कल सुबह तक कपूर इंडस्ट्रीज पर जो भी कर्ज था, वह अब सिंघानिया कॉर्पोरेशन का है। कोई भी उनके परिवार की तरफ आंख उठाकर नहीं देखेगा।"

अनन्या के पिता की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अनन्या ने विक्रम की ओर देखा। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक 'कॉन्ट्रैक्ट' है, लेकिन इस मर्द ने एक पल में उसे वह सुरक्षा दे दी थी जिसकी उसे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।

दोनों मंडप की ओर बढ़े। पंडित जी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया। अनन्या और विक्रम एक-दूसरे के आमने-सामने बैठे। जब अग्नि के फेरे शुरू हुए, तो अनन्या को महसूस हुआ कि यह सिर्फ आग नहीं, बल्कि उसकी पुरानी ज़िंदगी का अंत और एक रहस्यमयी भविष्य की शुरुआत थी।

जब विक्रम ने अनन्या की मांग में सिंदूर भरा और उसके गले में मंगलसूत्र बांधा, तो अनन्या के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। विक्रम का हाथ ठंडा था, लेकिन उसकी पकड़ बहुत मज़बूत थी।

"अब तुम मेरी पत्नी हो, अनन्या," विक्रम ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा। "लेकिन याद रखना, यह सौदा है। मेरे घर में मेरे नियम चलेंगे।"

अनन्या ने उसकी आँखों में आँखें डालकर जवाब दिया, "और मेरे टैलेंट के बिना आपके नियम अधूरे रहेंगे, मिस्टर सिंघानिया।"

शादी संपन्न हुई। वह लड़की जो कुछ घंटों पहले एक 'अभागी' दुल्हन मानी जा रही थी, अब भारत के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य की मालकिन बन चुकी थी।

विदाई का वक्त आ चुका था। कपूर खानदान का वह घर, जहाँ कुछ देर पहले मातम जैसा माहौल था, अब वहां की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी और हैरानी घुली हुई थी। फूलों से सजी लग्जरी 'रॉल्स रॉयस' गाड़ी दरवाजे पर खड़ी थी।

अनन्या ने अपने पिता के गले लगकर उन्हें सांत्वना दी। मिस्टर कपूर की आँखों में गर्व और चिंता का मिला-जुला भाव था। उन्होंने धीरे से अनन्या के कान में कहा, "बेटा, तूने आज मुझे डूबने से बचा लिया, लेकिन विक्रम सिंघानिया... वह एक दरिया नहीं, समंदर है। खुद को संभाल कर रखना।"

अनन्या ने मुस्कुराते हुए अपने पिता का हाथ थाम लिया। "फिक्र मत कीजिए पापा, मैं अब एक 'जीनियस' के साथ-साथ एक 'सिंघानिया' भी हूँ।"

विक्रम पहले ही गाड़ी के पिछले हिस्से में बैठ चुका था। वह अभी भी अपने फोन पर कुछ बिजनेस ईमेल्स चेक कर रहा था, जैसे कि उसने अभी-अभी कोई बड़ी शादी नहीं, बल्कि कोई साधारण मीटिंग खत्म की हो। अनन्या गाड़ी में बैठी, तो उसकी भारी रेशमी साड़ी विक्रम के जूतों को छू गई। विक्रम ने एक पल के लिए अपनी नज़रें फोन से हटाईं और अनन्या को देखा, फिर दोबारा काम में लग गया।

पूरी रास्त खामोशी छाई रही। शहर की चकाचौंध को पार करते हुए गाड़ी एक विशाल पहाड़ी के ऊपर बने एक भव्य महल नुमा गेट के सामने रुकी। गेट पर बड़े अक्षरों में लिखा था—'सिंघानिया मैंशन'।

महल के अंदर कदम रखते ही अनन्या की सांसें थम गईं। सफेद संगमरमर, ऊँचे झूमर और दीवारों पर लगी महंगी पेंटिंग्स... यह जगह किसी आलीशान जेल से कम नहीं लग रही थी। नौकरों की एक लंबी कतार स्वागत के लिए खड़ी थी।

विक्रम बिना रुके सीधे अंदर जाने लगा। वह हॉल के बीचों-बीच रुका और पीछे मुड़कर अनन्या को देखा। "यह तुम्हारा घर नहीं, मेरा साम्राज्य है। यहाँ सब कुछ एक सिस्टम से चलता है। तुम्हारी जरूरतें पूरी की जाएंगी, लेकिन मेरी प्राइवेसी में दखल देना तुम्हारी पहली और आखिरी गलती होगी।"

अनन्या ने अपना भारी पल्लू ठीक किया और शांति से जवाब दिया, "मुझे आपकी प्राइवेसी से ज्यादा आपके 'सर्वर' में दिलचस्पी है, मिस्टर सिंघानिया। और जहाँ तक नियमों की बात है, एक जीनियस अपने नियम खुद बनाना जानती है।"

विक्रम की आँखों में एक हल्की सी चमक आई, जिसे वह फौरन छिपा गया। "ऊपर बाएं हाथ वाला कमरा तुम्हारा है। आराम करो। कल सुबह 9 बजे मुझे डाइनिंग टेबल पर मिलो। हमें उस 'प्रोजेक्ट X' के बारे में बात करनी है जिसे तुमने फिक्स किया था।"

जैसे ही विक्रम अपने कमरे की ओर बढ़ा, अनन्या ने गहरी सांस ली। उसने अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखा—आसमान में चाँद चमक रहा था, लेकिन उसके नीचे एक अनजाना रिश्ता अपनी जड़ें जमा रहा था। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, यह एक ऐसी शतरंज की बिसात है जहाँ हर चाल सोच-समझकर चलनी होगी।

उसने अपने हाथ की वह अंगूठी देखी जो विक्रम ने उसे पहनाई थी। यह शादी एक धोखे से शुरू हुई थी, एक सौदे पर टिकी थी, लेकिन क्या यह कभी दिल तक पहुँच पाएगी? यह तो वक्त ही बताएगा।

Singhania Mansion ki Pehli Subah

सिंघानिया मैंशन की दीवारें जितनी ऊँची थीं, उतनी ही खामोश भी। अनन्या ने जब अपने कमरे का दरवाज़ा खोला, तो सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह कमरा किसी फाइव-स्टार होटल के कामरे से भी कहीं ज़्यादा बड़ा और आलीशान था। कमरे के बीचों-बीच एक विशाल 'किंग साइज' बेड था, जिस पर मखमली चादरें बिछी थीं। छत से लटकता झूमर मद्धम रोशनी बिखेर रहा था, जो कमरे के क्रीम और गोल्डन इंटीरियर को और भी राजसी बना रहा था।

अनन्या ने भारी मन से अपना छोटा सा बैग (जो उसके पिता ने विदाई के वक्त गाड़ी में रखवा दिया था) बेड पर रखा। आज का दिन उसके लिए किसी रोलर-कोस्टर सवारी जैसा रहा था। सुबह वह रोहन की दुल्हन बनने के सपने देख रही थी, और रात होते-होते वह उस इंसान की पत्नी बन चुकी थी जिसे पूरा शहर 'बिजनेस की दुनिया का जल्लाद' कहता था।

उसने खिड़की के पास जाकर भारी पर्दे हटाए। बाहर दूर-दूर तक फैला शहर की रोशनी का समंदर दिख रहा था। अनन्या ने ठंडी सांस ली। "तो यह है मेरी नई ज़िंदगी," उसने खुद से फुसफुसाकर कहा। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।

अनन्या ने पीछे मुड़कर देखा, विक्रम दरवाजे पर खड़ा था। उसने अपना कोट उतार दिया था और अपनी कमीज़ की आस्तीनें ऊपर चढ़ा ली थीं। वह अब भी उतना ही प्रभावशाली लग रहा था, लेकिन उसकी आँखों में थकान की जगह एक अजीब सी गहराई थी।

"उम्मीद है कमरा तुम्हें पसंद आया होगा," विक्रम ने कमरे के अंदर कदम रखते हुए कहा। उसकी आवाज़ में कोई अपनापन नहीं था, बस एक औपचारिकता थी।

अनन्या ने अपनी घबराहट छिपाते हुए कहा, "पसंद आने या न आने से क्या फर्क पड़ता है मिस्टर सिंघानिया? यह समझौता है, कोई हनीमून नहीं।"

विक्रम के होंठों पर एक टेढ़ी मुस्कान आई। "स्मार्ट। मुझे खुशी है कि तुम अपनी लिमिट्स जानती हो। इस अलमारी में तुम्हारी ज़रूरत का सारा सामान है। कल सुबह 9 बजे नाश्ते पर तैयार रहना। मेरी दादी और परिवार के बाकी लोग तुमसे मिलना चाहेंगे। याद रखना, उनके सामने तुम्हें एक 'आदर्श बहू' का नाटक करना होगा। मैं नहीं चाहता कि वसीयत मिलने से पहले किसी को भी हमारे इस कॉन्ट्रैक्ट का पता चले।"

अनन्या ने अपनी ठुड्डी ऊपर उठाई। "नाटक करने में मैं माहिर नहीं हूँ, लेकिन हाँ, मैं अपनी डील का हिस्सा बखूबी निभाऊंगी। पर मेरी एक शर्त है।"

विक्रम जो बाहर जाने के लिए मुड़ा था, रुक गया। "शर्त? अभी तो शादी हुई है और तुम्हारी मांगें शुरू हो गईं?"

"यह मांग नहीं, ज़रूरत है," अनन्या ने मेज पर रखे अपने पुराने लैपटॉप की ओर इशारा करते हुए कहा। "मुझे एक हाई-स्पीड एन्क्रिप्टेड सर्वर और एक अलग वर्कस्पेस चाहिए। मैं सिर्फ यहाँ बैठकर गहने पहनने वाली गुड़िया बनकर नहीं रह सकती। मुझे आपके 'प्रोजेक्ट X' के अगले फेज पर काम करना है।"

विक्रम ने उसे गौर से देखा। उसे लगा था कि वह शायद डायमंड सेट या क्रेडिट कार्ड मांगेगी, लेकिन उसने काम मांगा। विक्रम ने सिर हिलाया। "कल सुबह तुम्हारे कमरे में सेटअप लग जाएगा। अब सो जाओ। कल का दिन तुम्हारे लिए आसान नहीं होने वाला।"

विक्रम के जाने के बाद अनन्या ने चैन की सांस ली। उसने अपना भारी गहना उतारा और आईने में खुद को देखा। मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र... ये सब एक साल की मोहलत थी। उसने बिस्तर पर लेटते हुए आँखें मूँद लीं, लेकिन नींद कोसों दूर थी। उसके दिमाग में अभी भी रोहन का वह अपमानजनक चेहरा और विक्रम की वो सर्द आँखें घूम रही थीं।

अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण अनन्या के कमरे में आई, तो वह पहले से ही तैयार थी। उसने एक साधारण लेकिन ग्रेसफुल सफेद और सुनहरी साड़ी पहनी थी। उसने बालों को खुला छोड़ा और हल्का सा मेकअप किया। वह जानती थी कि आज उसकी असली परीक्षा है।

जैसे ही वह नीचे विशाल डाइनिंग हॉल की तरफ बढ़ी, उसे नीचे से लोगों के हँसने और बातें करने की आवाज़ें आईं। अनन्या ने सीढ़ियों पर हाथ रखा और खुद से कहा, "डरना मत अनन्या। तुम एक कपूर हो, और अब एक सिंघानिया भी।"

नीचे डाइनिंग टेबल पर एक बुजुर्ग महिला बैठी थी जिनके चेहरे पर कठोरता साफ़ झलक रही थी। उनके साथ एक और महिला और एक हमउम्र लड़का बैठा था। जैसे ही अनन्या ने हॉल में कदम रखा, सबकी बातें अचानक रुक गईं और सबकी नज़रें अनन्या के चेहरे पर जम गईं।

सीढ़ियों से नीचे उतरते समय अनन्या को महसूस हुआ कि डाइनिंग हॉल की भव्यता जितनी चमकदार है, वहां का माहौल उतना ही ठंडा और बोझिल है। मेज के केंद्र में एक बुजुर्ग महिला बैठी थीं, जिनकी सफेद साड़ी की तहें भी उतनी ही सख्त थीं जितना उनका चेहरा। वह विक्रम की दादी, सावित्री देवी थीं—सिंघानिया साम्राज्य की असली शासक। उनके दाहिने हाथ की तरफ विक्रम की सौतेली माँ, अनिता, और बायीं तरफ उसका चचेरा भाई, आर्यन बैठा था।

जैसे ही अनन्या ने मेज के पास कदम रखे, हॉल में चल रही कानाफूसी अचानक थम गई। सावित्री देवी ने अपनी नज़रों का सोने का चश्मा थोड़ा नीचे खिसकाया और अनन्या को ऊपर से नीचे तक ऐसे देखा जैसे कोई पारखी किसी नकली हीरे की शुद्धता की जांच कर रहा हो। उनकी आँखों में अनन्या के लिए कोई स्वागत नहीं, बल्कि एक गहरी चुनौती थी।

"तो, यह है वह लड़की जिसने कल रात हमारे खानदान की सदियों पुरानी परंपराओं का तमाशा बना दिया?" सावित्री देवी की आवाज़ में ज़हर और अधिकार दोनों घुले हुए थे।

अनन्या ने बिना डरे उनके पैर छूने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन दादी ने अपनी कुर्सी थोड़ी पीछे खींच ली। अनन्या रुकी नहीं, वह सीधी खड़ी हुई और उनके चेहरे पर टिकी नज़रों से नज़रें मिलाईं। अनन्या मुस्कुराई, एक ऐसी मुस्कान जो सम्मानजनक भी थी और आत्मविश्वास से भरी भी।

"प्रणाम दादी जी। तमाशा तो तब होता जब सिंघानिया खानदान का वारिस मंडप पर अकेला खड़ा रह जाता और दुनिया थू-थू करती। मैंने तो बस उस खाली जगह को भरा है और आपके परिवार की इज्जत को गिरने से बचाया है," अनन्या ने शांति से जवाब दिया।

मेज पर अचानक मौत जैसा सन्नाटा छा गया। आर्यन, जो विक्रम का चचेरा भाई था, उसने अपनी प्लेट में देखते हुए दबी हुई हंसी रोकने की कोशिश की। उसे समझ आ गया था कि घर में कोई ऐसा आया है जो दादी को टक्कर दे सकता है। तभी विक्रम डाइनिंग हॉल में दाखिल हुआ। उसने अपनी कुर्सी खींची और अनन्या के ठीक बगल में बैठ गया। उसकी भारी और मजबूत मौजूदगी ने अनन्या को एक अनकही सुरक्षा दी।

"दादी, अनन्या अब मेरी पत्नी और इस घर की बहू है। बेहतर होगा कि हम बीती बातों पर बहस करने के बजाय नाश्ते पर ध्यान दें," विक्रम ने अपने चिर-परिचित सपाट और ठंडे लहजे में कहा।

"पत्नी?" विक्रम की चाची, शालिनी, जो पास ही बैठी थीं, उन्होंने तंज कसते हुए कहा। "विक्रम, शादियां बराबर के खानदानों में होती हैं। यहाँ तो लड़की का बाप दिवालिया होने की कगार पर है और खुद लड़की एक 'हैकर' बताई जा रही है। क्या भरोसा कि यह हमारे घर की तिजोरियों की चाबियाँ अपनी उंगलियों के जादू से न उड़ा ले जाए?"

अनन्या ने अपना जूस का गिलास धीरे से नीचे रखा। मेज पर रखे कटलरी की खनक भी उस सन्नाटे में गूँज उठी। उसने शालिनी की आँखों में आँखें डालकर बड़े आराम से कहा, "चाची जी, पहली बात—मैं 'हैकर' नहीं, एक 'सिस्टम आर्किटेक्ट' हूँ। मैं सिस्टम तोड़ती नहीं, उन्हें और बेहतर बनाती हूँ। और जहाँ तक तिजोरियों की बात है, मुझे दूसरों की दौलत चुराने में नहीं, बल्कि अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करने में दिलचस्पी है।"

अनन्या थोड़ा और आगे झुकी और शालिनी के गले में चमक रहे हार की तरफ इशारा किया। "वैसे चाची जी, आपके गले का यह बेशकीमती हार... पिछले साल के 'सिंघानिया ज्वैलर्स' के इन्वेंट्री डेटा के हिसाब से कंपनी के नाम पर 'मार्केटिंग गिफ्ट' के तौर पर खरीदा गया था, आपके पर्सनल फंड से नहीं। तकनीकी तौर पर कंपनी के पैसों का अपने व्यक्तिगत श्रृंगार के लिए इस्तेमाल करना भी एक तरह की चोरी या गबन ही कहलाता है। क्या मैं सही हूँ?"

शालिनी का चेहरा पल भर में सफेद पड़ गया। उसने घबराकर अपने गले के हार को हाथ से छिपाने की कोशिश की। सावित्री देवी ने अनन्या की तरफ अब और भी गौर से देखा। उन्हें समझ आ गया था कि यह लड़की सिर्फ खूबसूरत नहीं है, इसके पास एक तेज़ दिमाग और खतरनाक जानकारी भी है।

"ज़बान बहुत तेज़ चलती है तुम्हारी," सावित्री देवी ने कड़क आवाज़ में माहौल को संभाला। "याद रखना, इस घर की बहू बनने के लिए सिर्फ मांग में भरा सिंदूर काफी नहीं होता। आज शाम को हमारे पुश्तैनी मंदिर में 'कुल-पूजा' है। शहर के सभी दिग्गज बिजनेसमैन और प्रेस वाले आएंगे। अगर तुमने वहां कोई भी ऐसी वैसी हरकत की जिससे हमारे खानदान की गरिमा को ठेस पहुँचे, तो मैं तुम्हें उसी वक्त इस घर की चौखट से बाहर कर दूँगी, फिर चाहे विक्रम कुछ भी कहे।"

विक्रम ने अनन्या की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक चेतावनी और एक अनकहा सवाल था—'क्या तुम यह सब झेल पाओगी?'

नाश्ता खत्म होते ही विक्रम अपनी जगह से खड़ा हुआ। "अनन्या, मेरे ऑफिस रूम में आओ। तुम्हें कुछ कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स साइन करने हैं और तुम्हारा नया वर्कस्टेशन तैयार है।"

जैसे ही वे डाइनिंग हॉल की भारी सीमाओं से बाहर निकले, अनन्या ने एक लंबी और राहत की सांस ली। विक्रम गलियारे में मुड़ा और दीवार से सटकर खड़ा हो गया, अपनी बाहें सीने पर बांध लीं। "तुमने शालिनी चाची का जो मुंह बंद किया, वह वाकई काबिले-तारीफ था। लेकिन दादी से सीधा पंगा लेना आग के दरिया में कूदने जैसा है। आज शाम की पूजा में तुम्हें हर कदम फूँक-फूँक कर रखना होगा। वे लोग तुम्हें नीचा दिखाने का एक भी मौका नहीं छोड़ेंगे।"

अनन्या ने एक हल्की शरारती मुस्कान के साथ कहा, "मिस्टर सिंघानिया, मैं आग से खेलना बचपन से जानती हूँ। बस आप यह पक्का कीजिए कि शाम तक मेरा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन चालू हो जाए। मुझे आपके डेटाबेस में कुछ ऐसा मिला है जो आपके 'प्रोजेक्ट X' के भविष्य के लिए बहुत कीमती... और शायद खतरनाक भी हो सकता है।"

विक्रम उसे बस देखता ही रह गया। वह यह समझ ही नहीं पा रहा था कि यह लड़की इतनी शांत और प्रभावी कैसे हो सकती है, जबकि पूरा परिवार उसके खून का प्यासा खड़ा है। वह धीरे से अपने मन में बुदबुदाया, "तुम वाकई एक पहेली हो, अनन्या कपूर... या शायद अब अनन्या विक्रम सिंघानिया।"

विक्रम, अनन्या को महल के एक ऐसे हिस्से में ले गया जो बाकी घर से बिल्कुल अलग था। भारी ओक के दरवाज़े खुले और अनन्या के सामने एक मॉडर्न 'होम-ऑफिस' था। दीवार पर तीन बड़ी स्क्रीन्स लगी थीं, बेहतरीन प्रोसेसर वाले कंप्यूटर्स थे और कमरे की लाइटिंग ऐसी थी जो एकाग्रता बढ़ा दे।

"यह तुम्हारा वर्कस्पेस है," विक्रम ने अपनी जेब में हाथ डालते हुए कहा। "तुम्हारी डिमांड के मुताबिक यहाँ हाई-स्पीड लीज्ड लाइन इंटरनेट और टॉप-नॉच सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर्स इंस्टॉल कर दिए गए हैं। लेकिन याद रखना, यहाँ जो भी डेटा तुम देखोगी, वह सिंघानia ग्रुप की प्रॉपर्टी है।"

अनन्या ने मेज़ पर हाथ फेरा। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड को छूते ही एक अलग ही आत्मविश्वास से भर गईं। "मुझे डेटा चुराने की ज़रूरत नहीं है मिस्टर सिंघानिया, मैं उसे बनाना जानती हूँ।"

विक्रम के जाने के बाद अनन्या ने काम शुरू किया। उसने 'प्रोजेक्ट X' की उन फाइल्स को एक्सेस किया जिन्हें कल रात उसने फिक्स किया था। जैसे-जैसे वह कोड की गहराई में उतरी, उसका माथा ठनकने लगा। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक नया बिजनेस सॉफ्टवेयर नहीं था; यह एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम था जो ग्लोबल मार्केट को कंट्रोल कर सकता था।

अचानक, उसकी स्क्रीन पर एक रेड सिग्नल चमका। "Unauthorized Access Detected?" अनन्या बुदबुदाई। उसने अपनी उंगलियों की रफ़्तार बढ़ाई और उस सोर्स को ट्रैक करने लगी जो गुप्त रूप से विक्रम के डेटा को कॉपी कर रहा था।

हैरानी की बात यह थी कि यह हैकिंग बाहर से नहीं, बल्कि सिंघानिया मैंशन के ही किसी इंटरनल सर्वर से हो रही थी। अनन्या ने कोड को डिकोड किया तो उसके सामने एक फोल्डर खुला जिसका नाम था— 'V.S. Past - 2015'।

उसने फोल्डर खोला और वहां कुछ ऐसी तस्वीरें और रिपोर्ट्स थीं जिन्होंने अनन्या के होश उड़ा दिए। वहां विक्रम की एक पुरानी तस्वीर थी जिसमें वह एक बहुत ही खुशमिज़ाज लड़का लग रहा था, और उसके साथ एक लड़की थी। अगली फाइल एक एक्सीडेंट की रिपोर्ट थी।

"तो यह है विक्रम सिंघानिया के 'कोल्ड' होने की वजह?" अनन्या ने खुद से सवाल किया। वह अभी और पढ़ना ही चाहती थी कि अचानक दरवाज़ा खुला और विक्रम अंदर दाखिल हुआ। अनन्या ने झटके से स्क्रीन बंद की, लेकिन विक्रम की बाज़ जैसी नज़रों ने उसकी घबराहट पकड़ ली।

"क्या देख रही थी तुम?" विक्रम की आवाज़ में शक और गुस्सा दोनों थे। वह तेज़ी से अनन्या की तरफ बढ़ा और मेज़ पर दोनों तरफ हाथ रखकर उसे अपने बीच में घेर लिया।

अनन्या का दिल तेज़ धड़कने लगा, लेकिन उसने अपनी आँखें नीची नहीं कीं। "मैं... मैं सिर्फ बैकएंड देख रही थी। आपके सिस्टम में एक 'लीक' है मिस्टर सिंघानिया। कोई आपके घर के अंदर बैठकर आपका डेटा चुरा रहा है।"

विक्रम का चेहरा और भी सख्त हो गया। "मेरी जासूसी करने की कोशिश मत करना अनन्या। मैंने तुम्हें यहाँ सिर्फ एक साल के लिए रखा है। अपना काम करो और मेरे अतीत या मेरे सिस्टम की उन गलियों में मत घुसो जहाँ जाने की इजाज़त मैंने तुम्हें नहीं दी है।"

अनन्या ने साहस जुटाकर कहा, "आपका अतीत आपके भविष्य को बर्बाद कर रहा है। अगर मैंने आज उस लीक को नहीं रोका होता, तो शाम की पूजा से पहले आपकी आधी नेटवर्थ गायब हो चुकी होती।"

विक्रम एक पल के लिए खामोश हुआ। उसने अनन्या की आँखों में देखा—वहां कोई छल नहीं, सिर्फ एक जीनियस की ईमानदारी थी। उसने धीरे से अपना हाथ पीछे खींचा।

"शाम की पूजा की तैयारी करो," विक्रम ने धीमे लहजे में कहा। "शालिनी चाची ने तुम्हारे लिए एक भारी लहंगा और कुछ खानदानी गहने भेजे हैं। उन्हें पहन लेना। शाम को शहर के सबसे बड़े इंवेस्टर्स आ रहे हैं। अगर तुमने वहां कोई गड़बड़ की, तो यह तुम्हारा आखिरी दिन होगा।"

विक्रम कमरे से बाहर निकल गया, लेकिन अनन्या को पता था कि उसने एक बहुत बड़ा राज़ देख लिया है। वह 'प्रोजेक्ट X' को हैक करने वाले उस अंदरूनी गद्दार को ढूंढने और विक्रम के उस घाव को समझने के लिए अब और भी ज़्यादा उत्सुक थी।

शाम होते-होते सिंघानिया मैंशन रोशनी से जगमगा उठा। फूलों की सजावट और कीमती इत्र की खुशबू ने पूरे माहौल को शाही बना दिया था। शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन, नेता और प्रेस के लोग वहां मौजूद थे। हर कोई उस रहस्यमयी लड़की को देखना चाहता था, जिसने रातों-रात विक्रम सिंघानिया को शादी के लिए मजबूर कर दिया था।

अनन्या ने शालिनी चाची का भेजा हुआ गहरा नीलमणि (Royal Blue) रंग का लहंगा पहना था। भारी कुंदन के गहने और माथे पर सजी छोटी सी बिंदिया उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे। जब वह सीढ़ियों से नीचे उतरी, तो हॉल में मौजूद हर शख्स की नजरें उस पर ठहर गईं।

विक्रम नीचे ही खड़ा मेहमानों से बात कर रहा था। जैसे ही उसकी नजर अनन्या पर पड़ी, वह एक पल के लिए अपनी बात भूल गया। उसने बहुत सी सुंदर औरतें देखी थीं, लेकिन अनन्या के चेहरे पर जो आत्मविश्वास और गरिमा थी, वह बेमिसाल थी। वह आगे बढ़ा और अनन्या का हाथ थामकर उसे भीड़ के सामने ले गया।

"मिस्टर एंड मिसेज विक्रम सिंघानिया," प्रेस के कैमरों की लाइटें चमकने लगीं।

तभी, भीड़ के बीच से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई, "वाह! क्या गजब का इत्तेफाक है।"

अनन्या के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने मुड़कर देखा तो सामने रोहन खड़ा था। उसके साथ उसकी पार्टनर ईशा भी थी, जिसने अनन्या को नीचा दिखाने के लिए बेहद भड़कीला लिबास पहना था। रोहन के चेहरे पर वही पुरानी घमंडी मुस्कान थी।

"अनन्या, मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी जल्दी 'मूव ऑन' कर लोगी। और वो भी शहर के सबसे अमीर आदमी के साथ? मानना पड़ेगा, तुम्हारी कोडिंग से ज़्यादा तुम्हारी किस्मत तेज़ है," रोहन ने सबके सामने ऊँची आवाज़ में कहा ताकि लोग सुन सकें।

हॉल में कानाफूसी शुरू हो गई। सावित्री देवी (दादी) की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। उन्हें डर था कि अनन्या उनके खानदान की नाक कटवा देगी।

ईशा ने चुटकी लेते हुए कहा, "सुना है यह शादी सिर्फ एक 'सौदा' है? क्यों अनन्या, कितना मिला तुम्हें इस नाटक के लिए?"

अनन्या का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, लेकिन उसने खुद को संभाला। इससे पहले कि वह कुछ बोलती, उसने महसूस किया कि विक्रम का हाथ उसकी कमर पर थोड़ा और कस गया है। विक्रम ने ठंडे और भारी लहजे में कहा, "मिस्टर खन्ना, मेरे घर में मेहमान बनकर आए हो तो मेहमान की तरह रहो। मेरी पत्नी की हैसियत तुम्हारे पूरे खानदान की कुल संपत्ति से ज़्यादा है। और जहाँ तक 'सौदे' की बात है... तुमने तो अनन्या को छोड़ा था क्योंकि तुम्हें पैसे की ज़रूरत थी, है ना? तो आज रात तुम्हारा बैंक बैलेंस चेक कर लेना, क्योंकि कपूर इंडस्ट्रीज के सारे शेयर अब अनन्या के नाम हैं। अब तुम उसके सामने एक कर्मचारी से ज़्यादा कुछ नहीं हो।"

रोहन का चेहरा शर्म से काला पड़ गया। प्रेस वालों ने तुरंत इस खबर को नोट कर लिया। अनन्या ने विक्रम की तरफ देखा, उसकी आँखों में कृतज्ञता थी। उसने रोहन की आँखों में आँखें डालकर कहा, "रोहन, कचरा जब घर से बाहर फेंक दिया जाता है, तो उसे दोबारा मुड़कर नहीं देखा जाता। तुम अब मेरे लिए वही कचरा हो। ईशा, तुम्हें मुबारक हो यह 'पुरानी चीज़'।"

पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। रोहन और ईशा वहां से खिसकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे।

पूजा शुरू हुई। मंत्रों की गूँज के बीच अनन्या और विक्रम ने साथ बैठकर आहुति दी। आरती के वक्त जब अनन्या ने दीया पकड़ा, तो विक्रम ने भी अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया। उस पल, दोनों के बीच एक अनकहा बिजली सा अहसास हुआ।

देर रात, जब मेहमान चले गए, अनन्या अपने कमरे में जाने लगी। तभी विक्रम ने उसे गलियारे (corridor) में रोका।

"आज तुमने अच्छा प्रदर्शन किया," विक्रम ने कहा।

"यह प्रदर्शन नहीं था विक्रम। यह सच था," अनन्या ने शांति से जवाब दिया। "लेकिन आपने जो किया... मेरे पिता की कंपनी के शेयर मेरे नाम करना... वह ज़रूरी नहीं था।"

विक्रम उसकी ओर एक कदम और बढ़ा। "सिंघानिया अपनी चीज़ों की हिफाजत करना जानते हैं। और अभी के लिए, तुम मेरी पत्नी हो।"

वह मुड़कर चला गया, लेकिन अनन्या वहीं खड़ी रह गई। उसने महसूस किया कि इस 'कॉन्ट्रैक्ट' में अब भावनाएं भी जुड़ने लगी हैं। लेकिन उसे वह 'लीक' और विक्रम का पुराना राज़ भी याद था। उसे पता था कि असली खतरा अभी टला नहीं है, वह इसी घर के अंदर छिपा है।

उसने अपने कमरे में जाकर अपना लैपटॉप खोला। 'प्रोजेक्ट X' के कोड के पीछे उसने एक नया नाम ढूंढ निकाला था जिसने उसे चौंका दिया—वह नाम था आर्यन (विक्रम का चचेरा भाई)।

अनन्या मुस्कुराई। "खेल अब शुरू हुआ है, आर्यन।"

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