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छोटा योद्धा महरक्षक

इम्मोर्टल के अंत

* एपिसोड एक: ग्रह X का पतन और प्रतिशोध की उत्पत्ति"

ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में, जहाँ आकाशगंगाएँ अपनी धुरी पर नाचती हैं, वहाँ एक ऐसा ग्रह स्थित था जिसे' प्लैनेट X' कहा जाता था. यह कोई साधारण पत्थर का गोला नहीं था, बल्कि दिव्य ऊर्जा और सुनहरी आभा से दमकता हुआ एक स्वर्ग था. यहाँ की मिट्टी में फौलाद की मजबूती थी और यहाँ की हवाओं में पराक्रम का संगीत बहता था.

इस ग्रह के निवासी' इम्मोर्टल स्पीशीज' (अमर प्रजाति) थे. प्लैनेट X की सबसे बडी विशेषता यह थी कि यहाँ जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म के पहले पल से ही एक पूर्ण योद्धा होता था. उनके नन्हे हाथों में इतनी ताकत होती थी कि वे लोहे की सलाखों को मोड दें, लेकिन प्रकृति का एक विचित्र नियम था—इन योद्धाओं को बोलना नहीं आता था. उनकी आवाज उनके शस्त्रों की खनक और उनकी आँखों के तेज में छिपी थी.

इसी महान साम्राज्य के अधिपति थे* किंग वारडोक* वारडोक केवल एक राजा नहीं, बल्कि शक्ति का साक्षात अवतार थे. कहा जाता था कि वारडोक का एक प्रहार चंद्रमा के अस्तित्व को धूल में मिला सकता था. उनकी पत्नी, रानी जानवी* ममता और युद्ध- कौशल का अनूठा संगम थीं. उनके चार अनमोल रत्न थे—* विद्युत, चट्टान, तेज और सिद्धीमा* ये चारों प्लैनेट X के राजकुमार और राजकुमारी थे.



किंग वारडोक के महल के विशाल प्रांगण में चारों बच्चे खेल रहे थे. उनकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन उनकी शरारतें किसी विनाशकारी तूफान से कम नहीं थीं. विद्युत, जो सबसे बडा था, महल की ऊँची मीनारों के बीच बिजली की गति से दौडता था. वह जब भी जमीन पर पैर रखता, संगमरमर का फर्श चटक जाता. चट्टान, अपनी उम्र से कई गुना भारी पत्थरों को खिलौनों की तरह हवा में उछाल रहा था. वह हँसता (बिना आवाज के) और जब पत्थर नीचे गिरते, तो पूरे महल में भूकंप के झटके महसूस होते.

तेज और सिद्धीमा आपस में द्वंद्व युद्ध का अभ्यास कर रहे थे. सिद्धीमा की चपलता ऐसी थी कि वह हवा के झोंकों को काट सकती थी, जबकि तेज अपनी मुट्ठियों से ऐसी ऊर्जा पैदा कर रहा था जो छोटे- छोटे उल्कापिंडों को पिघला दे. जानवी उन्हें बालकनी से देख रही थीं. अचानक, विद्युत ने मस्ती- मस्ती में एक ऊँची छलांग लगाई और बादलों को चीरते हुए वायुमंडल के ऊपरी स्तर तक पहुँच गया. वारडोक ने उसे देख लिया. वे मुस्कुराए और अपनी जगह से हिले बिना, केवल अपनी उंगली के एक इशारे से गुरुत्वाकर्षण को ऐसे मोडा कि विद्युत धीरे से नीचे उतर आया.

वे चारों बच्चे वारडोक से लिपट गए. वारडोक ने उन्हें अपनी विशाल बाहों में भर लिया. उस पल, प्लैनेट X पर सिर्फ खुशियाँ थीं. वे बच्चे अपनी बेपनाह ताकत से बेखबर थे. वे नहीं जानते थे कि उनकी एक छोटी सी हंसी भी ब्रह्मांड के संतुलन को हिला सकती थी. जानवी ने उन सबके माथे चूमे. उस सुनहरी शाम में, उनकी मस्ती इतनी' आउट ऑफ कंट्रोल' थी कि महल के बगीचे के पेड उनकी ऊर्जा से खुद- ब- खुद चमकने लगे थे. लेकिन इस स्वर्ग के ऊपर काल के साये मंडरा रहे थे.

प्लैनेट X की इस बढती शक्ति ने तीन ब्रह्मांडीय शक्तियों (Prime Gods) के सिंहासन हिला दिए थे.

एक. अभय (Abhay): विनाश का देवता (God of Destroyer), जिसका अहंकार सूर्य से भी बडा था.

दो. विरे (Viray): सृजन का देवता (God of Creation), जो अपनी रचनाओं पर पूर्ण नियंत्रण चाहता था.

तीन. मोरगेना (Morgena): समय और आयाम की देवी (God of Time and Dimension), जो भविष्य की धुंध में देख सकती थी.

इन तीनों के मन में जलन और डर का जहर घुल चुका था. अभय ने गरजते हुए कहा, ये प्लैनेट X के निवासी. ये कीडे अब हमारी बराबरी करने लगे हैं. अगर इनकी ताकत इसी तरह बढती रही, तो एक दिन ये हमें अपने पैरों की धूल समझेंगे! विरे ने शांत स्वर में कहा, सम्मान डर से पैदा होता है, और वे हमसे डरना छोड चुके हैं। मोरगेना ने अपनी रहस्यमयी आँखों से देखा, वह समय दूर नहीं जब वारडोक के ये बच्चे हमारे तख्त छीन लेंगे. हमें इनका अंत करना होगा।

उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद डेमी- गोड, जहीरा* को चुना. जहीरा एक छोटी आकाशगंगा के रक्षक थे और वारडोक के सबसे पुराने दोस्त भी. लेकिन देवताओं के हुक्म के आगे दोस्ती की कोई कीमत नहीं थी. जहीरा को भारी मन से प्लैनेट X की तबाही का फरमान सुनाया गया.



जहीरा जब प्लैनेट X पहुँचे, तो वारडोक ने बाहें फैलाकर अपने दोस्त का स्वागत किया. जहीरा का दिल हजार टुकडों में टूट रहा था. कैसे वह उस हाथ को काट दे जिसने हमेशा उसे सहारा दिया था? लेकिन देवताओं का दबाव पहाड जैसा था.

माफ कर देना दोस्त. जहीरा ने रुँधे हुए गले से कहा. वारडोक चौंक गए, क्या हुआ जहीरा? तुम इतने उदास क्यों हो?

तभी जहीरा ने अपना हाथ उठाया. उसकी हथेली में अभय का दिया हुआ' डिस्ट्रॉयर बॉल' (Destroyer Ball) धधक रहा था. माफ कर देना वारडोक. मुझे हुक्म मिला है। वारडोक, जानवी और बच्चे पीछे हट गए. महल के सैनिक देवताओं के इस ऊर्जा के दबाव से घुटनों के बल नीचे गिर गए.

वारडोक ने शांत स्वर में पूछा, आखिर तुम ये क्यों कर रहे हो? जहीरा की आँखों से आंसू बह निकले, प्राइम देवताओं ने हुक्म दिया है. वे तुम सबको मिटाना चाहते हैं। वारडोक स्थिति समझ गए. उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों की ओर देखा और फिर जहीरा से कहा, अगर यही विधाता की इच्छा है, तो ठीक है. तुम सिर्फ मुझे मार दो. मेरे जाते ही प्लैनेट X कमजोर पड जाएगा, देवताओं को कोई खतरा नहीं रहेगा. पर मेरे मासूम लोगों और बच्चों को छोड दो।

जहीरा का हाथ कांपने लगा. उसने चीखते हुए कहा, नहीं! मुझसे नहीं होगा! उसने ऊर्जा का गोला नीचे कर लिया और घुटनों के बल बैठकर रोने लगा. मैं इन चार बच्चों से उनके पिता को नहीं छीन सकता! वारडोक चिल्लाए, जहीरा! अपना काम करो! वरना प्राइम देवता तुम्हें भी नहीं छोडेंगे!

अचानक जहीरा का चेहरा डर से सफेद पड गया. उसने घडी की ओर देखा. नहीं वारडोक! यहाँ से भाग जाओ! जल्दी! देवताओं ने कहा था कि अगर मैंने दस मिनट में काम पूरा नहीं किया, तो वे सीधे प्लैनेट X के कोर (Core) में ब्लास्ट कर देंगे. अब सिर्फ एक मिनट बचा है! भागो!

वारडोक ने जानवी की आँखों में देखा. जानवी! बच्चों को लो और निकलो! जानवी रोने लगी, पर आपके बिना कैसे? वारडोक की आवाज बिजली की तरह गूँजी, जाओ! समय नहीं है! जानवी ने रोते हुए बच्चों को अपनी बाहों में लिया और अपनी दिव्य शक्ति से टेलिपोर्ट (Teleport) होकर दूर एक निर्जन चंद्रमा पर पहुँच गई.

इधर वारडोक पूरे ग्रह पर चेतावनी चिल्ला रहे थे, सब निकलो! ग्रह फटने वाला है! पर किसी को यकीन नहीं हुआ कि देवता उन्हें क्यों मारेंगे. उसी समय. एक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया. प्लैनेट X का कोर फट गया. वारडोक की आँखों में उस धमाके की आखिरी चमक थी और अगले ही पल, वह सुनहरा ग्रह केवल मलबे और धूल के बादल में बदल गया.

दूर चंद्रमा पर खडी जानवी ने यह मंजर देखा. उसके मुँह से एक चीख निकलने वाली थी, पर उसने अपना हाथ मुँह पर रख लिया. उसकी सिसकियाँ शांत वातावरण में गूँज रही थीं. उसकी आँखों से आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी. गोद में चारों बच्चे भी अपने पिता और घर के खोने के दर्द में जोर- जोर से रो रहे थे.

तभी जहीरा वहां प्रकट हुए. वे बच गए थे, पर उनकी आत्मा मर चुकी थी. उसी समय आसमान फटा और अभय, विरे और मोरगेना वहां प्रकट हुए. अभय ने उपहास करते हुए कहा, देखा जहीरा? अगर तुम काम नहीं करोगे, तो हम करना जानते हैं. अच्छा हुआ तुम बच गए, क्योंकि तुम डेमी- गोड हो। उसने जानवी की ओर देखा, जो मलबे में छिपी थी. याद रखना, अगर इस प्रजाति का कोई भी जीव बचा, तो तुम्हारी खैर नहीं। इतना कहकर वे गायब हो गए.



जानवी की आँखें अब लाल हो चुकी थीं. आंसुओं की जगह अब प्रतिशोध की ज्वाला थी. एक पत्नी ने अपने पति को खोया था, एक माँ ने अपना घर. उसने ठान लिया कि अब रोने का समय नहीं, बल्कि उन देवताओं के घमंड को तोडने का समय है.

वह अपने चारों बच्चों को लेकर प्रकाश की गति (Lightyear speed) से ब्रह्मांड में उडने लगी. उसे एक सुरक्षित आश्रय चाहिए था. उडते- उडते उसकी नजर एक नीले ग्रह पर पडी—* पृथ्वी*

जैसे ही वह पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने वाली थी, उसे महसूस हुआ कि यहाँ का' फोर्स फील्ड' बहुत खतरनाक और प्रदूषित है. उसने तुरंत अपनी जादुई अंगूठी निकाली और एक सुरक्षा कवच (Pot) बनाया, जिसमें उसने चारों बच्चों को सुरक्षित रख दिया.

लेकिन जैसे ही वह वायुमंडल में दाखिल हुई, इंसानों ने उसे एक बाहरी खतरा समझा. जमीन से दर्जनों मिसाइलें उसकी ओर दागी गईं. जानवी ने खुद को ढाल बनाया. मिसाइलों के धमाकों ने जानवी को बुरी तरह घायल कर दिया. धमाके की तीव्रता इतनी थी कि बच्चों का वो सुरक्षा कवच उनसे अलग होकर दूर जा गिरा. उन धमाकों का बच्चों के कोमल दिमाग पर ऐसा असर पडा कि शायद उनकी याददाश्त हमेशा के लिए मिट गई.

जानवी लहूलुहान होकर एक तरफ गिरी और बच्चे दूसरी तरफ. उस योद्धा माँ की आँखों में आखिरी विचार था—* बदला. अभी शुरू हुआ है।

* क्या विद्युत, चट्टान, तेज और सिद्धीमा अपनी शक्तियों के साथ इंसानों के बीच बच पाएंगे?

* क्या जानवी जीवित है या उसने अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया?

* और सबसे बडा सवाल—जब ये बच्चे बडे होंगे, तो क्या इन्हें अपना अतीत याद आएगा या ये खुद को साधारण इंसान समझेंगे?

आगे जानने के लिए सुनते रहिए, छोटा योद्धा महारक्षक"

शुरुआत

एपिसोड दो: रहस्यमयी आगमन और चार शक्तियों की शुरुआत



(संगीत: कोमल, गूढ. झरने की आवाज, हल्की चिडियों की चहचहाहट. )

यह एक शांत, हरा- भरा नीला ग्रह है.

सुबह की पहली किरणें घने पत्तों को चीरती हुई नीचे गिर रही हैं.

हवा में ताजी मिट्टी और रात भर की ओस की ठंडी महक घुली हुई है.

हर साँस के साथ एक सुकून भीतर उतरता है.

मानो यह जगह किसी भी खतरे से कोसों दूर हो.

लेकिन.

क्या सच में यह शांति हमेशा रहने वाली है?

या यह सिर्फ तूफान से पहले की खामोशी है?



सामने, दो ऊँची पहाडियों के बीच एक विशाल झरना गिर रहा है.

श्वेत, झागदार जलधाराएँ पत्थरों से टकराकर एक मधुर, निरंतर संगीत बना रही हैं.

पानी की हल्की फुहारें हवा में तैरती हैं.

जो त्वचा को छूकर एक ठंडी लहर सी छोड जाती हैं.

पेडों की पत्तियाँ धीमे- धीमे हिल रही हैं.

और पूरा जंगल एक गहरी, शांत लय में साँस ले रहा है.

लेकिन तभी—

(संगीत में अचानक गहरा कंपन जुडता है. )

आसमान में एक अजीब सी सरसराहट गूँजती है.

पहले धीमी.

फिर तेज.

और फिर बेचैन कर देने वाली.

यह आवाज कहाँ से आ रही है?



ऊपर. बहुत ऊपर.

अंतरिक्ष की गहराइयों से एक धातुई पॉड तेजी से नीचे गिर रहा है.

उसकी रफ्तार इतनी तेज है कि वायुमंडल से टकराते ही वह लाल आग की चमक में घिर जाता है.

उसके पीछे जलते हुए कणों की एक लंबी, धुएँदार लकीर बनती जाती है.

वह सीधे इस शांत जंगल की ओर बढ रहा है.

क्या यह कोई दुर्घटना है?

या किसी बडी योजना का हिस्सा?



झरने के किनारे.

एक बूढा इंसान ध्यान में बैठा है.

सफेद बाल. शांत चेहरा. स्थिर साँसें.

मानो वह इस संसार से परे हो.

उसे दुनिया की कोई खबर नहीं.

लेकिन अचानक—

(ध्वनि: हल्की कंपन. )

जमीन काँपती है.

उसकी आँखें धीरे- धीरे खुलती हैं.

उन आँखों में गहराई है.

अनुभव है.

और एक अजीब सा आने वाले खतरे का आभास.



आकाश में एक तीव्र सफेद रोशनी चमकती है.

यह सिर्फ रोशनी नहीं.

यह शुद्ध ऊर्जा है. कुछ असामान्य. कुछ खतरनाक.

बूढा इंसान तुरंत उठ खडा होता है.

उसकी उम्र भले ही अधिक हो.

लेकिन उसके कदमों में अभी भी तेजी है.

वह उस रोशनी की दिशा में दौड पडता है.

सूखी पत्तियाँ उसके पैरों के नीचे चरमराती हैं.

हवा उसके बालों को पीछे उडा रही है.

आखिर वह क्या देखने जा रहा है?



(ध्वनि: गगनभेदी धमाका — BOOM! )

अचानक एक भयानक विस्फोट होता है.

जंगल काँप उठता है.

पक्षी डरकर आसमान में उड जाते हैं.

हवा में अब जली हुई मिट्टी, धुएँ और गरम धातु की गंध भर जाती है.

जहाँ कुछ देर पहले हरियाली थी.

अब वहाँ धूल का एक विशाल गुबार उठ रहा है.



बूढा उस जगह पहुँचता है.

उसका नाम है—भूषण.

वह धीरे- धीरे उस धूल को चीरता हुआ आगे बढता है.

उसकी साँसें भारी हो रही हैं.

लेकिन उसकी नजरें उस चीज को ढूँढ रही हैं.

जो अभी- अभी आसमान से गिरी है.



और फिर—

उसे दिखता है.

एक गोल, धातु का पॉड.

जो जमीन में धँसा हुआ है.

उसकी सतह लाल गर्म है.

और उससे हल्का धुआँ उठ रहा है.

आखिर इस पॉड के अंदर क्या छिपा है?



तभी—

(ध्वनि: सी. सस. )

पॉड का दरवाजा धीरे- धीरे खुलता है.

गरम भाप बाहर निकलती है.

भूषण झुककर अंदर देखता है.

और एक पल के लिए उसकी साँस थम जाती है.



अंदर चार बच्चे हैं.

तीन लडके. और एक छोटी बच्ची.

उनके चेहरे शांत हैं.

मानो वे गहरी नींद में हों.

उनके शरीर के चारों ओर हल्की चमक है.



भूषण के मन में सवाल उठते हैं—

ये बच्चे कौन हैं?

इन्हें यहाँ किसने भेजा?

और क्यों?



वह तुरंत फैसला करता है—

इन्हें यहाँ छोडना सुरक्षित नहीं.

वह एक- एक करके बच्चों को उठाता है.

उसके हाथों में कठोरता नहीं.

बल्कि एक अजीब सा अपनापन है.



वह उन्हें अपनी पुरानी पत्थर की कोठी में ले जाता है.

(ध्वनि: लकडी की आग की आवाज. )

कमरे में हल्की गर्मी है.

लकडी की महक फैली है.



कुछ देर बाद.

चारों बच्चे धीरे- धीरे अपनी आँखें खोलते हैं.

उनकी नजर भूषण पर पडती है.

और उनके चेहरे पर एक मासूम मुस्कान आ जाती है.

क्या उन्हें पहले से पता था कि वे सुरक्षित हैं?



भूषण मुस्कुराते हुए कहता है—

मैं भूषण हूँ. तुम मुझे दादाजी कह सकते हो.

जब बच्चे अपने नाम नहीं बता पाते.

तो वह खुद उनके नाम रखता है—

तुम. विद्युत.

तुम चट्टान.

तुम तेज.

और तुम. सिद्धिमा.



बच्चों की आँखें चमक उठती हैं.

मानो उन्हें अपनी पहचान मिल गई हो.

क्या यही नाम आगे चलकर इतिहास बनाएँगे?



समय बीतता है — आठ साल बाद

(संगीत: ऊर्जा से भरी हल्की धुन. )

अब ये बच्चे बडे हो चुके हैं.

उनकी हँसी जंगल में गूँजती है.

उनकी गति. उनकी शक्ति. अब सामान्य नहीं रही.



एक दिन.

तेज नदी किनारे बैठा है.

पानी की लहरें शांत हैं.

तभी—

(ध्वनि: टहनी टूटने की आवाज. )

एक विशाल अजगर उस पर हमला करता है!

तेज घबरा जाता है—

लेकिन.

अजगर अचानक हवा में रुक जाता है!



यह कैसे संभव है?



विद्युत सामने आता है.

उसकी आँखों में ऊर्जा चमक रही है.

वह अजगर को पकडकर तेजी से घुमाता है.

और दूर फेंक देता है.



अजगर फिर हमला करता है.

तभी चट्टान आगे बढता है.

और एक शक्तिशाली वार करता है.

अजगर जमीन पर गिर जाता है.



दूर खडी सिद्धिमा यह सब देख लेती है.

वह दौडकर दादाजी के पास जाती है.



भूषण गुस्से में आ जाते हैं—

तुम लोग अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हो!

उनकी आवाज गूँज उठती है.

आज रात तुम घर के अंदर नहीं आओगे!



क्या यह सिर्फ सजा है?

या इसके पीछे कोई गहरी वजह छिपी है?



रात का सन्नाटा

ठंडी हवा बह रही है.

तीनों भाई बाहर बैठे हैं.

सिद्धिमा चुपके से खाना लेकर आती है.

भैया. माफ कर दो.

कुछ पल की खामोशी.

फिर विद्युत नरम पडता है.



क्या यही उनका असली रिश्ता है.



अगली सुबह

तीनों ध्यान में बैठे हैं.

तभी एक चीख सुनाई देती है.



क्या उन्हें जाना चाहिए?

या दादाजी की बात माननी चाहिए?



विद्युत कहता है—

हम किसी को मुसीबत में नहीं छोड सकते.

तीनों दौड पडते हैं.



पहाडियों पर.

एक आदमी भेडिया- मानवों से घिरा है.



तीनों भाई पहुँचते हैं.

भेडिये हवा में रुक जाते हैं.

और फिर दूर फेंक दिए जाते हैं.



आदमी हैरान होकर कहता है—

क्या तुम लोग भी सुप्रीम टूर्नामेंट के लिए जा रहे हो?



यह सुप्रीम टूर्नामेंट क्या है?

और इसमें ऐसा क्या है जो हर शक्तिशाली व्यक्ति को खींच रहा है?



वह अपना नाम बताता है—प्राण.

और चला जाता है.



तीनों घर लौटते हैं.

विद्युत पूछता है—

दादाजी. क्या सच में सुप्रीम टूर्नामेंट है?

भूषण मुस्कुराते हैं—

हाँ. और वही तुम्हारी असली परीक्षा होगी.



सात साल बाद.

उनकी शक्ति अब अपने चरम पर है.

उनकी आँखों में आत्मविश्वास है.

उनके भीतर एक अज्ञात आग जल रही है.



और अब—

वह दिन आ गया है.



(संगीत: तेज उभार. फिर सन्नाटा. )

क्या ये चारों उस टूर्नामेंट में जीत पाएँगे?

क्या उनकी असली पहचान सामने आएगी?

और क्या उनके अतीत का रहस्य खुल जाएगा?



आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए—

ब्रह्मांड के रक्षक”

द टूर्नामेंट

एपिसोड: सुप्रीम टूर्नामेंट – युद्ध का आरंभ



(संगीत: भव्य, गूंजता हुआ. भीड का शोर. ढोल की गहरी थाप. )

एक विशाल पर्वत के बीचों- बीच.

खडा था — सुप्रीम एरीना.

उसका दरवाजा इतना विशाल था.

कि मानो वह किसी दुनिया का नहीं. बल्कि देवताओं के युद्ध का प्रवेश द्वार हो.

काले पत्थरों से बना.

ऊपर अजीब चिन्ह उकेरे हुए.

और जैसे ही हवा उस पर टकराती—

(ध्वनि: गूंजती हुई“ हूऊऊ. )

क्या इस दरवाजे के अंदर सिर्फ मुकाबला है.

या कुछ और भी छुपा है?



धीरे- धीरे.

वह विशाल दरवाजा खुलने लगता है.

(ध्वनि: पत्थरों के रगडने की भारी आवाज. )

भीतर से एक तेज रोशनी बाहर फैलती है.

और फिर—

भीड का शोर.

हजारों योद्धाओं की ऊर्जा.

गूंजता हुआ वातावरण.



अंदर.

एक गोलाकार एरीना.

चारों ओर दर्शकों की विशाल भीड.

ऊपर तैरते हुए ऊर्जा के गोले.

बीच में— युद्धभूमि.

जहाँ सिर्फ एक नियम था—

जीत या हार. बीच कुछ नहीं.



प्रवेश द्वार पर खडे थे—

विद्युत. चट्टान. तेज. और सिद्धिमा.

चारों की नजरें उस एरीना पर टिक जाती हैं.

चट्टान हल्की मुस्कान के साथ कहता है—

भैया. यहाँ तो मजा आने वाला है.

तेज हंसते हुए बोला—

बस तू ज्यादा उत्साहित मत हो जाना. पिछली बार पेड ही उखाड दिया था तूने.

चट्टान हँसकर—

अरे वो गलती से हुआ था. पेड खुद आ गया था मेरे सामने!

विद्युत सिर पकड लेता है—

तुम दोनों को बस मजाक सूझता है. ये कोई खेल नहीं है.

क्या ये हंसी. कुछ देर में डर में बदलने वाली है?



(ध्वनि: गूंजती हुई आवाज. )

सभी योद्धाओं का स्वागत है. सुप्रीम टूर्नामेंट में!

पूरा एरीना गूंज उठता है.



पहली लडाई

दो योद्धा मैदान में उतरते हैं.

एक— भारी शरीर वाला.

दूसरा— तेज और फुर्तीला.

(ध्वनि: फाइट! )

पहला वार—

तेज योद्धा हवा में उछलता है.

दूसरा तुरंत जमीन तोड देता है.

पत्थर हवा में उडते हैं.

भीड चीख उठती है.

कुछ ही पलों में—

एक जोरदार वार.

और पहला योद्धा जमीन पर गिर जाता है.

क्या इतनी जल्दी कोई हार सकता है?



चट्टान सीटी बजाता है—

अरे यार. ये तो जल्दी खत्म हो गया!

तेज हंसता है—

तू जाता तो दो सेकंड में खत्म करता!

चट्टान—

दो सेकंड? मैं तो एक सेकंड में कर देता!



चट्टान की एंट्री

(ध्वनि: नाम पुकारा जाता है. )

अगला मुकाबला— चट्टान बनाम. कुणाल!

भीड गूंज उठती है.

चट्टान मुस्कुराते हुए आगे बढता है.



सामने आता है— कुणाल

पतला. लेकिन आँखों में खतरनाक आत्मविश्वास.

वह मुस्कुराता है—

तुम दिखते जितने भारी हो. उतने धीमे भी होगे.

चट्टान हंसता है—

और तुम जितने पतले हो. उतने ही हल्के भी होगे!

भीड हंस पडती है.



(ध्वनि: फाइट! )

कुणाल बिजली की गति से हमला करता है.

लेकिन—

चट्टान वहीं खडा रहता है.

वार लगता है—

और.

कुछ नहीं होता.



कुणाल चौंक जाता है—

ये. ये कैसे?

चट्टान मुस्कुराता है—

भाई. नाम सुना नहीं क्या? चट्टान हूँ मैं!



अचानक—

चट्टान जोर से जमीन पर पैर मारता है.

पूरा एरीना हिल जाता है.

कुणाल संतुलन खो देता है.



चट्टान मौका देखकर उसे पकड लेता है—

और हवा में उछाल देता है!

भीड—“ ओह्ह्ह!



लेकिन—

कुणाल हवा में खुद को संभाल लेता है.

और पीछे से हमला करता है.

एक तेज वार—

चट्टान थोडा पीछे हटता है.



क्या कुणाल सच में मजबूत है?



चट्टान मुस्कुराता है—

अब मजा आएगा.

वह पूरी ताकत से पंच मारता है—

हवा फटती है—

कुणाल बचने की कोशिश करता है—

लेकिन.

वार लगता है.



कुणाल जमीन पर गिर जाता है.

और उठ नहीं पाता.



(ध्वनि: विजेता— चट्टान! )

भीड तालियों से गूंज उठती है.



चट्टान वापस आते हुए कहता है—

भैया. ये तो वार्म- अप था!

तेज हंसता है—

अब मेरी बारी है. असली शो देखने का!



तेज की एंट्री

अगला मुकाबला— तेज बनाम. रेशिमा!

एक लडकी मैदान में उतरती है.

शांत. लेकिन आँखों में आत्मविश्वास.



तेज मुस्कुराता है—

नाम तो अच्छा है. देखता हूँ ताकत कैसी है.

रेशिमा धीरे से—

तुम्हें पता चल जाएगा.



(ध्वनि: फाइट! )

एक सेकंड.

दो सेकंड.

तेज गायब!



वह कहाँ गया?



अचानक—

पीछे से हमला!

लेकिन—

रेशिमा पहले से तैयार.

वह तेज को रोक लेती है.



तेज चौंक जाता है—

अरे. ये तो तेज है!

रेशिमा मुस्कुराती है—

तुम्हारी तरह.



दोनों के बीच तेजी की लडाई शुरू होती है.

वार. बचाव. फिर वार.

इतनी तेज कि आँखें भी पीछे रह जाएँ.



भीड खडी हो जाती है.



तेज हंसते हुए—

अब असली स्पीड दिखाता हूँ!

वह और तेज हो जाता है.

हवा में कई परछाइयाँ बन जाती हैं.



असली तेज कौन है?



रेशिमा ध्यान लगाती है.

और—

एकदम सही समय पर—

वह असली तेज को पकड लेती है!



तेज चौंक जाता है—

ये कैसे.



रेशिमा—

स्पीड से ज्यादा जरूरी है. समझ.



लेकिन—

तेज मुस्कुराता है—

अब समझ दिखाता हूँ.



वह अपनी पूरी ताकत लगाता है.

और एक तेज वार करता है.



रेशिमा पीछे हटती है.

संतुलन बिगडता है.



तेज मौका नहीं छोडता—

और उसे जमीन पर गिरा देता है.



(ध्वनि: विजेता— तेज! )



तेज वापस आता है—

कैसा लगा शो?

चट्टान—

ठीक था. मेरा बेहतर था!



दोनों हंसते हैं.



अंत का सस्पेंस

विद्युत और सिद्धिमा खडे सब देख रहे हैं.

विद्युत की आँखें गंभीर हैं.

क्या उसे कुछ अजीब महसूस हो रहा है?



दूर.

एक अंधेरे कोने में.

कोई उन्हें देख रहा है.

एरीना का माहौल बदल चुका था.

भीड अब और ज्यादा उत्साहित थी.

हर कोई अगली लडाई का इंतजार कर रहा था.

ऊपर ऊर्जा के गोले तेज चमकने लगे.

और तभी—

(ध्वनि: गूंजती हुई घोषणा)

अगला मुकाबला— सिद्धिमा. बनाम. बैभव!



भीड एक पल के लिए शांत हो गई.

फिर अचानक—

शोर. चीखें. तालियाँ.



सिद्धिमा धीरे- धीरे आगे बढती है.

उसके कदम हल्के हैं.

लेकिन आँखों में एक गहरी एकाग्रता है.

उसके चेहरे पर न घमंड है. न डर.

बस. एक संतुलन.

क्या यही उसकी असली ताकत है?



दूसरी ओर—

मैदान में प्रवेश करता है— बैभव

लंबा. सुदृढ.

उसके शरीर से एक स्थिर, भारी ऊर्जा निकल रही है.

उसकी आँखें सीधी सिद्धिमा पर टिक जाती हैं.

वह हल्की मुस्कान के साथ कहता है—

तो तुम हो. सिद्धिमा.



सिद्धिमा शांत स्वर में—

और तुम. बैभव.



बैभव हंसता है—

सुना है तुम अलग हो.

लेकिन यहाँ. फर्क नहीं पडता.



क्या यह सिर्फ आत्मविश्वास है.

या बैभव सच में खतरनाक है?



(ध्वनि: फाइट! )



पहला पल.

दोनों स्थिर.

कोई भी जल्दबाजी नहीं करता.



दूसरा पल—

बैभव अचानक आगे बढता है!

उसकी गति तेज नहीं.

लेकिन हर कदम भारी है.

जमीन हल्की काँपती है.



वह सीधा वार करता है—

सिद्धिमा साइड में हट जाती है.

वार जमीन पर लगता है—

और पत्थर टूट जाते हैं!



भीड—“ ओह्ह!



अगर यह वार लगता. तो क्या होता?



सिद्धिमा अब ध्यान से बैभव को देखने लगती है.

वह समझ रही है.

यह लडाई ताकत की नहीं.

सही समय की है.



बैभव मुस्कुराता है—

भागोगी. या लडोगी?



सिद्धिमा हल्के स्वर में—

मैं. समझ रही हूँ.



बैभव चौंकता है—

क्या?



अचानक—

सिद्धिमा आगे बढती है.

उसकी गति तेज. लेकिन नियंत्रित.

वह एक वार करती है—

बैभव रोक लेता है.



दोनों के हाथ टकराते हैं—

(ध्वनि: ठाऽऽक! )

ऊर्जा की लहर फैलती है.



भीड खडी हो जाती है.



अब दोनों के बीच असली लडाई शुरू होती है—

वार. बचाव. फिर वार.

हर मूव सटीक.

कोई भी गलती नहीं कर रहा.



यह लडाई कौन जीतेगा. जब दोनों बराबर हैं?



बैभव अचानक जोर से जमीन पर हाथ मारता है—

धूल का गुबार उठता है.

दिखाई देना बंद.



सिद्धिमा आँखें बंद कर लेती है.



क्या वह डर गई है?



नहीं.

वह सुन रही है.

हवा की आवाज.

कदमों की हलचल.



अचानक—

वह पीछे मुडती है—

और बैभव का वार रोक लेती है!



बैभव चौंक जाता है—

तुमने. देखा कैसे?



सिद्धिमा धीरे से—

मैंने देखा नहीं. महसूस किया.



भीड—“ वाह!



अब सिद्धिमा तेज हो जाती है.

उसकी चाल बदल जाती है.

अब वह सिर्फ बच नहीं रही.

हमला भी कर रही है.



तीन तेज वार—

बैभव पीछे हटता है.

पहली बार.

उसके चेहरे पर तनाव आता है.



क्या सिद्धिमा अब बढत ले रही है?



बैभव गहरी साँस लेता है—

ठीक है. अब असली ताकत देखो.



उसके शरीर से ऊर्जा निकलने लगती है.

जमीन काँपती है.



वह आगे बढता है—

इस बार पहले से ज्यादा तेज.



एक जोरदार वार—

सिद्धिमा बच नहीं पाती—

वह पीछे फिसल जाती है.



भीड चिल्लाती है—



क्या यह मोड है लडाई का?



सिद्धिमा धीरे- धीरे उठती है.

उसके हाथ में हल्की चोट है.

लेकिन उसकी आँखें. अब और शांत हैं.



वह खुद से कहती है—

ताकत. नियंत्रण से बडी नहीं होती.



वह गहरी साँस लेती है.



और फिर—

उसके चारों ओर हल्की ऊर्जा फैलने लगती है.



बैभव देखता है—

तो अब तुम भी.



सिद्धिमा कुछ नहीं कहती.



(ध्वनि: धीमी ऊर्जा की गूंज. )



अब दोनों फिर आमने- सामने हैं.



बैभव हमला करता है—

सिद्धिमा इस बार सीधा टकराती है!



दोनों की ताकत टकराती है—

(ध्वनि: तेज ऊर्जा विस्फोट)



पूरा एरीना हिल जाता है.



दोनों पीछे हटते हैं.

लेकिन गिरते नहीं.



अभी भी कोई नहीं जीता.



भीड अब पागल हो चुकी है.



बैभव हंसता है—

तुम. सच में अलग हो.



सिद्धिमा—

और तुम. मजबूत हो.



दोनों एक- दूसरे को देखते हैं.



अंतिम राउंड.



बैभव पूरी ताकत लगाता है.

सिद्धिमा पूरी एकाग्रता.



दोनों दौडते हैं.



टकराव—



(ध्वनि: जोरदार विस्फोट. )



धूल का बादल.

कुछ दिखाई नहीं देता.



कुछ पल सन्नाटा.



फिर—

एक आकृति खडी होती है.



कौन जीता?



धीरे- धीरे धूल हटती है.



सिद्धिमा खडी है.

थोडी घायल.

लेकिन संतुलित.



बैभव घुटनों पर है.

मुस्कुरा रहा है.



अच्छी. लडाई थी.



और वह गिर जाता है.



(ध्वनि: विजेता— सिद्धिमा! )



भीड गूंज उठती है.



लेकिन—

सिद्धिमा की नजर कहीं और है.



ऊपर. एरीना के अंधेरे हिस्से में.



क्या कोई उन्हें देख रहा है?

क्या यह सिर्फ शुरुआत है?

और क्या अगली लडाई. इससे भी खतरनाक होगी?



आगे क्या होगा. पढ़िए आगे भी।

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