रात के लगभग ग्यारह बजे थे. पूरे गाँव में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था. दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनाई दे रही थी. तभी अचानक आराध्या की नींद खुल गई.
उसे लगा जैसे किसी ने बहुत धीमी आवाज में उसका नाम पुकारा हो.
आराध्या.
वह घबराकर बिस्तर पर उठ बैठी. कमरे में कोई नहीं था. उसने चारों ओर नजर दौडाई, लेकिन सब कुछ सामान्य दिखाई दिया.
धीरे- धीरे वह खिडकी के पास गई और बाहर झाँकने लगी.
उसकी नजर गाँव के बाहर पहाडी पर बनी पुरानी हवेली पर पडी. वर्षों से वीरान पडी उस हवेली की एक खिडकी में हल्की पीली रोशनी चमक रही थी.
आराध्या का दिल तेजी से धडकने लगा.
इतनी रात को हवेली में कौन हो सकता है? उसने खुद से कहा.
कुछ देर तक वह उसी रोशनी को देखती रही. फिर अचानक रोशनी गायब हो गई. जैसे वहाँ कभी कोई था ही नहीं.
अगली सुबह आराध्या अपने सबसे अच्छे दोस्त रोहन के पास पहुँची और रात की पूरी घटना उसे बता दी.
मुझे लगता है हमें हवेली में जाकर देखना चाहिए, आराध्या ने कहा.
रोहन पहले तो हिचकिचाया, लेकिन उसकी जिज्ञासा भी बढ चुकी थी.
कुछ ही देर बाद दोनों पहाडी की ओर बढ रहे थे.
हवेली सामने खडी थी—पुरानी, खामोश और रहस्यमयी.
उसका विशाल लोहे का दरवाजा जंग से भरा हुआ था. आराध्या ने हिम्मत जुटाकर दरवाजे को धक्का दिया.
कrrrr.
दरवाजा डरावनी आवाज के साथ खुल गया.
अंदर से ठंडी हवा का एक तेज झोंका आया, जिससे दोनों सिहर उठे.
वे सावधानी से अंदर बढने लगे. हर तरफ धूल जमी हुई थी और दीवारों पर मकडी के जाले लटक रहे थे.
तभी आराध्या की नजर फर्श पर पडी एक पुरानी चमडे की डायरी पर गई.
उसने झुककर डायरी उठाई. उसके कवर पर सुनहरे अक्षरों में कुछ लिखा था, जो समय के साथ लगभग मिट चुका था.
जैसे ही उसने पहला पन्ना खोला, अंदर एक रहस्यमयी नक्शा दिखाई दिया.
नक्शे पर लाल स्याही से हवेली का चित्र बना हुआ था. उसके बीचों- बीच एक गोल निशान बना था, जिसके नीचे लिखा था—
सच्चाई यहीं दफन है.
आराध्या और रोहन हैरानी से एक- दूसरे को देखने लगे.
तभी हवेली के किसी अंधेरे कोने से कदमों की आवाज सुनाई दी.
ठक. ठक. ठक.
दोनों के दिल की धडकनें तेज हो गईं.
आवाज धीरे- धीरे उनकी ओर बढ रही थी.
अचानक आराध्या के हाथ में पकडी डायरी जोर- जोर से काँपने लगी.
उसके पन्ने अपने आप पलटने लगे.
फड. फड. फड.
कुछ सेकंड बाद पन्ने एक जगह आकर रुक गए.
आराध्या ने नीचे देखा और उसकी साँस गले में अटक गई.
उस पन्ने पर एक तस्वीर बनी थी.
वह तस्वीर उसी की थी.
ये. ये मेरी तस्वीर यहाँ कैसे हो सकती है? आराध्या बुदबुदाई.
लेकिन अगला दृश्य और भी डरावना था.
तस्वीर के नीचे लिखा था—
मृत्यु की तिथि: तेरह जून, दो हजार छब्बीस"
डर के मारे उसके हाथ से डायरी छूटकर फर्श पर गिर गई.
उसी क्षण ऊपर की मंजिल से किसी के दौडने की आवाज आने लगी.
धम. धम. धम.
जैसे कोई पूरी रफ्तार से उनकी ओर भाग रहा हो.
रोहन ने काँपते हुए सीढियों की तरफ देखा.
और उसका चेहरा सफेद पड गया.
सीढियों के ऊपर अंधेरे में एक परछाईं खडी थी.
उसकी लाल चमकती आँखें सीधे आराध्या को घूर रही थीं.
फिर वह भयानक आवाज गूँजी—
तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था.
अचानक हवेली का मुख्य दरवाजा अपने आप बंद हो गया.
धडाम!
पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया.
और उसी अंधेरे में डायरी का आखिरी पन्ना अपने आप खुल गया.
उस पर खून जैसे लाल अक्षरों में लिखा था—
अगला शिकार — आराध्या"
तभी हवेली में एक दिल दहला देने वाली चीख गूँज उठी.
आआआआआह्ह्ह्ह.
क्रमशः.
क्या आराध्या सच में हवेली का अगला शिकार बनने वाली है, या फिर हवेली के अंधेरे राज़ों के पीछे कोई ऐसा सच छिपा है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की? अगर आपको ऐसी रहस्यमयी डायरी मिल जाए, तो क्या आप उसके सारे राज़ जानने की हिम्मत करेंगे? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए!"
आआआआआह्ह्ह्ह.
चीख अभी भी हवेली की दीवारों में गूंज रही थी.
उस भयावह आवाज की प्रतिध्वनि जैसे हर कोने से टकराकर वापस लौट रही थी. पुरानी दीवारें, टूटी हुई छत और जर्जर खिडकियाँ उस चीख को अपने भीतर समेटे हुए थीं. ऐसा लग रहा था मानो हवेली खुद उस दर्दनाक आवाज को बार- बार दोहरा रही हो.
लेकिन अगले ही पल.
सब कुछ अचानक शांत हो गया.
सन्नाटा इतना गहरा था कि अपनी ही सांसों की आवाज साफ सुनाई दे रही थी.
हवा भी जैसे रुक गई थी. टूटी खिडकियों से आती ठंडी हवा का झोंका भी थम चुका था. पूरे कमरे में एक अजीब- सी बेचैनी फैल गई थी.
आराध्या की आँखें खुलीं तो वह हवेली के उसी कमरे में थी.
जहाँ उसने डायरी उठाई थी.
डायरी अब भी जमीन पर पडी थी.
लेकिन अब उसका आखिरी पन्ना खुला हुआ था.
और उस पर लिखा“ अगला शिकार — आराध्या” धीरे- धीरे धुंधला हो रहा था. जैसे स्याही नहीं. कुछ और ही मिट रहा हो.
रोहन घबराकर बोला:
आराध्या. हमें यहाँ से निकलना चाहिए!
उसकी आवाज में साफ डर झलक रहा था. उसके चेहरे का रंग उड चुका था और हाथ काँप रहे थे.
आराध्या ने जल्दी से डायरी उठाई.
लेकिन जैसे ही उसने उसे छुआ.
दरवाजा अपने आप बंद हो गया.
धडाम!
आवाज इतनी तेज थी कि पूरा कमरा काँप उठा.
हवेली की धूल उडकर हवा में फैल गई.
अंधेरा और गहरा हो गया.
तभी ऊपर से फिर वही आवाज आई.
धम. धम. धम.
कोई धीरे- धीरे सीढियाँ उतर रहा था.
हर कदम के साथ आवाज और साफ होती जा रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत पुरानी और भारी चीज उनकी तरफ बढ रही हो.
आराध्या ने कांपते हुए ऊपर देखा.
लेकिन इस बार वहाँ कोई साफ दिखाई नहीं दे रहा था.
सिर्फ एक परछाईं.
जो दीवार पर चल रही थी. लेकिन उसका शरीर कहीं नहीं था.
रोहन पीछे हट गया:
ये. ये क्या है?
उसकी आँखें डर से फैल गई थीं.
तभी डायरी अपने आप खुल गई.
उसके पन्ने तेजी से पलटने लगे.
फड. फड. फड.
और फिर अचानक रुक गए.
उस पन्ने पर अब नया संदेश लिखा था:
पहली रात शुरू हो चुकी है.
आराध्या ने जैसे ही ये पढा.
पूरा कमरा हिलने लगा.
खिडकियाँ अपने आप खुल- बंद होने लगीं.
पुरानी लकडियों की चरमराहट पूरे कमरे में गूंजने लगी.
और हवेली के हर कोने से फुसफुसाहट आने लगी:
वापस जाओ.
वरना तुम भी यहाँ रह जाओगी.
वे आवाजें इतनी धीमी थीं कि समझ नहीं आ रहा था कि वे सच थीं या सिर्फ भ्रम.
आराध्या की आँखों में डर और सवाल दोनों थे.
ये डायरी आखिर चाहती क्या है?
तभी रोहन ने इशारा किया.
दीवार पर एक नया दरवाजा दिखाई दिया था.
जो पहले वहाँ था ही नहीं.
पुरानी दीवार के बीचों- बीच अचानक उभरा वह दरवाजा बेहद रहस्यमयी लग रहा था.
उस पर लिखा था:
सच वहीं है. जहाँ जाना मना है।
अचानक परछाईं तेजी से उनकी तरफ बढी.
और रोहन चिल्लाया:
भागो!
दोनों उस नए दरवाजे की तरफ दौडे.
उनके कदमों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी.
जैसे ही आराध्या ने दरवाजे को छुआ.
एक तेज चमक हुई.
और दोनों अंदर खिंच गए.
दरवाजा अपने आप बंद हो गया.
और हवेली फिर से खामोश हो गई.
लेकिन इस बार.
किसी और के कदमों की आवाज अंदर से आ रही थी.
धीरे- धीरे.
और लगातार.
मानो कोई उनका इंतजार कर रहा हो.
क्रमशः.
क्या वह नया कमरा हवेली का सबसे बडा सच छुपाता है?
आखिर उन कदमों की आवाज किसकी थी?
और क्या आराध्या इस रहस्य से जिंदा बाहर निकल पाएगी?
आपको क्या लगता है, हवेली में कौन छिपा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए.
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तेज चमक के बाद आराध्या और रोहन जमीन पर आ गिरे.
कुछ क्षणों तक दोनों को समझ ही नहीं आया कि उनके साथ क्या हुआ था.
उनके कानों में अभी भी एक अजीब- सी गूंज सुनाई दे रही थी. ऐसा लग रहा था मानो वे किसी दूसरी दुनिया से होकर यहाँ पहुँचे हों. दोनों की साँसें तेज चल रही थीं और दिल बेकाबू होकर धडक रहा था.
जब आराध्या ने धीरे- धीरे आँखें खोलीं, तो उसने खुद को एक अजीब कमरे में पाया.
कमरा गोल आकार का था. चारों तरफ पुरानी पत्थर की दीवारें थीं, जिन पर नमी जमी हुई थी. कई जगहों पर पत्थरों के बीच दरारें दिखाई दे रही थीं. छत से लटकता एक टूटा हुआ झूमर हवा के बिना ही धीरे- धीरे हिल रहा था.
उसकी चरमराहट पूरे कमरे में गूंज रही थी.
रोहन ने काँपती आवाज में पूछा,
हम. हम कहाँ आ गए हैं?
आराध्या ने चारों तरफ नजर दौडाई.
यह कमरा हवेली के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग था.
कमरे में एक भी खिडकी नहीं थी.
सिर्फ एक पुराना लकडी का दरवाजा था, जिस पर लोहे की भारी जंजीरें लगी हुई थीं.
जंजीरों पर जंग लगी हुई थी, मानो उन्हें वर्षों से किसी ने छुआ तक न हो.
अचानक कमरे में किसी के फुसफुसाने की आवाज गूँजी.
वापस जाओ.
दोनों चौंक पडे.
आवाज इतनी धीमी थी कि जैसे कोई उनके कान के बिल्कुल पास बोल रहा हो.
लेकिन वहाँ कोई नहीं था.
कमरे का हर कोना खाली था.
कौन है? आराध्या ने डरते हुए पूछा.
कोई जवाब नहीं मिला.
कुछ पल बाद फिर वही आवाज सुनाई दी.
वापस जाओ. अभी भी समय है.
इस बार आवाज पहले से ज्यादा स्पष्ट थी.
रोहन घबराकर आराध्या के पास आ गया.
मुझे यह जगह बिल्कुल ठीक नहीं लग रही।
उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था.
तभी आराध्या की नजर कमरे के बीचों- बीच रखी एक पत्थर की मेज पर पडी.
उस पर धूल से ढका एक छोटा लकडी का डिब्बा रखा था.
डिब्बा बेहद पुराना लग रहा था.
उसकी सतह पर अजीब निशान बने हुए थे जिन्हें समझ पाना मुश्किल था.
वह सावधानी से उसके पास पहुँची.
जैसे ही उसने डिब्बे को छुआ, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया.
साँसों से धुंध निकलने लगी.
कमरे की हवा बर्फ जैसी ठंडी महसूस होने लगी.
रोहन घबराकर पीछे हट गया.
इसे मत खोलो!
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी.
आराध्या ने डिब्बा खोल दिया.
अंदर एक पुरानी काले- सफेद तस्वीर थी.
तस्वीर में एक परिवार हवेली के सामने खडा था.
तस्वीर के किनारे पीले पड चुके थे और उस पर समय के निशान साफ दिखाई दे रहे थे.
लेकिन तस्वीर को ध्यान से देखते ही आराध्या का दिल रुकने जैसा हो गया.
उस तस्वीर में खडी एक लडकी बिल्कुल उसी जैसी दिख रही थी.
वही चेहरा.
वही आँखें.
वही मुस्कान.
ये. ये कैसे हो सकता है? वह बुदबुदाई.
उसके हाथ काँपने लगे.
तभी तस्वीर के पीछे कुछ लिखा दिखाई दिया.
काँपते हाथों से उसने तस्वीर पलटी.
उस पर लिखा था—
श्राप कभी खत्म नहीं होता. वह लौटकर आता है.
ये शब्द पढते ही उसकी रीढ में सिहरन दौड गई.
अचानक कमरे की दीवारों पर खरोंचने की आवाज आने लगी.
खर्र. खर्र.
खर्र. खर्र.
जैसे कोई पत्थर के पीछे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो.
आवाज धीरे- धीरे तेज होती जा रही थी.
रोहन डर के मारे चिल्ला उठा.
आराध्या! दीवार देखो!
दीवार पर अचानक लाल रंग के शब्द उभरने लगे.
ऐसा लग रहा था मानो किसी अदृश्य हाथ ने उन्हें अभी- अभी लिखा हो.
धीरे- धीरे पूरा वाक्य दिखाई देने लगा—
उसे जगा मत देना.
दोनों के चेहरों का रंग उड गया.
किसे? आराध्या फुसफुसाई.
लेकिन तभी.
धम!
कमरे का दरवाजा अपने आप खुल गया.
आवाज इतनी भयानक थी कि दोनों एक पल के लिए वहीं जड हो गए.
बाहर घना अंधेरा था.
और उस अंधेरे के बीच एक लंबा गलियारा दिखाई दे रहा था.
गलियारे की दीवारों पर लगे पुराने चित्र आधे अंधेरे में और भी डरावने लग रहे थे.
गलियारे के अंत में किसी ने लालटेन पकड रखी थी.
एक सफेद साया.
वह बिना हिले खडा था.
उसके चेहरे की जगह सिर्फ अंधेरा दिखाई दे रहा था.
कुछ सेकंड तक सब शांत रहा.
फिर अचानक वह साया मुडा.
और अंधेरे में गायब हो गया.
उसी क्षण डायरी अपने आप खुल गई.
उसके पन्ने तेजी से पलटने लगे.
फड. फड. फड.
और फिर एक पन्ने पर आकर रुक गए.
उसके नए पन्ने पर सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी—
अगर सच जानना है. तो उसका पीछा करो।
आराध्या और रोहन ने एक- दूसरे की तरफ देखा.
उनके सामने दो रास्ते थे.
वापस लौट जाना.
या उस रहस्यमयी साये का पीछा करना.
लेकिन उन्हें नहीं पता था कि गलियारे के आखिर में उनका इंतजार सिर्फ सच नहीं.
बल्कि मौत भी कर रही थी.
और सबसे डरावनी बात यह थी कि जिस साये का वे पीछा करने वाले थे. वह पहले से ही उनके पीछे खडा था.
क्रमशः.
आखिर तस्वीर में दिखने वाली आराध्या जैसी लडकी कौन थी?
दीवार पर लिखे" उसे जगा मत देना" का क्या मतलब था?
गलियारे के अंत में खडा वह रहस्यमयी साया कौन था?
क्या आराध्या और रोहन उसका पीछा करेंगे, या फिर कोई भयानक जाल उनका इंतजार कर रहा है?
और सबसे बडा सवाल—हवेली में ऐसा कौन छिपा है, जिसका नाम सुनकर लोग आज भी डर जाते हैं?
आपको क्या लगता है? वह साया दोस्त है या दुश्मन? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए.
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