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Dil Wala Dulhania Le Jayenge

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राज, सिमरन, बाबूजी और लंदन की गलियों से पंजाब के सरसों के खेतों तक का सफर—यहाँ है **'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' (DDLJ)** की पूरी कहानी:

## **भाग 1: लंदन का आशियाना और एक अनजान सफर**

कहानी की शुरुआत लंदन में होती है। **चौधरी बलदेव सिंह** (अमरीश पुरी) पिछले बीस सालों से लंदन में रह रहे हैं, लेकिन उनका दिल आज भी पंजाब के खेतों में धड़कता है। वह बेहद संस्कारी और कड़े सिद्धांतों वाले इंसान हैं। उनकी दो बेटियां हैं—**सिमरन** (काजोल) और छुटकी। सिमरन एक बेहद रोमांटिक लड़की है, जो डायरियों में अपनी कविताओं के जरिए अपने सपनों के राजकुमार की कल्पना करती है।

एक दिन, बलदेव सिंह को पंजाब से उनके परम मित्र का खत आता है। बचपन का वादा निभाने का वक्त आ गया है—सिमरन की शादी बलदेव सिंह के दोस्त के बेटे **कुलजीत** से तय कर दी जाती है। सिमरन इस बात से दुखी है क्योंकि वह किसी अनजान से शादी नहीं करना चाहती, लेकिन वह अपने बाबूजी की मर्जी के खिलाफ जाने की सोच भी नहीं सकती। वह अपने बाबूजी से एक आखिरी ख्वाहिश मांगती है: अपनी सहेलियों के साथ एक महीने के लिए **यूरोप ट्रिप** पर जाने की इजाजत। बलदेव सिंह मान जाते हैं।

इसी लंदन शहर में रहता है **राज मल्होत्रा** (शाहरुख खान)। वह एक अमीर, बेफिक्र, दिलफेंक और मlengthीला लड़का है, जिसके पिता (अनुपम खेर) उसे बेहद लाड-प्यार देते हैं। राज भी अपने दोस्तों के साथ उसी यूरोप ट्रिप पर निकल पड़ता है।

## **भाग 2: यूरोप की वादियां और दिल का कनेक्शन**

ट्रिप की शुरुआत में राज और सिमरन की मुलाकात बेहद अजीब और नोकझोंक भरी होती है। राज की चुलबुली हरकतें सिमरन को चिढ़ाती हैं। लेकिन कहानी में मोड़ तब आता है जब स्विट्जरलैंड की हसीन वादियों में दोनों की ट्रेन छूट जाती है।

अब दोनों के पास एक-दूसरे के साथ सफर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। कार के सफर, खूबसूरत रास्तों, और बर्फ से ढकी वादियों के बीच दोनों का वक्त साथ गुजरता है। राज की बेवकूफियों के पीछे छिपी उसकी शराफत और सिमरन की सादगी दोनों को करीब लाती है। सफर के आखिरी दिन, सिमरन को अहसास होता है कि उसे राज से प्यार हो गया है। लेकिन जैसे ही वे लंदन वापस पहुंचते हैं, हकीकत सामने खड़ी होती है। स्टेशन पर अलविदा कहते वक्त राज को भी अहसास होता है कि सिमरन ही उसकी जिंदगी है, लेकिन सिमरन भारी मन से अपने घर लौट जाती है।

## **भाग 3: पंजाब की सरसों और प्यार की परीक्षा**

जब सिमरन घर लौटकर अपनी मां (फरीदा जलाल) को बताती है कि वह किसी और से प्यार करती है, तो बलदेव सिंह यह बात सुन लेते हैं। उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। वे तुरंत सब कुछ समेटकर पूरे परिवार के साथ भारत (पंजाब) शिफ्ट हो जाते हैं, ताकि सिमरन की शादी तुरंत कुलजीत से कर सकें।

लंदन में राज का दिल टूट जाता है, लेकिन उसके पिता उसे हिम्मत देते हैं और कहते हैं कि अगर वह सच्चा आशिक है, तो अपनी दुल्हन को खुद लेकर आए। राज पंजाब पहुंच जाता है।

पंजाब के लहलहाते सरसों के खेतों में राज और सिमरन का दोबारा मिलन होता है (वो मशहूर सीन जहाँ राज बाहें फैलाए खड़ा होता है)। सिमरन राज से कहती है कि वे दोनों भाग जाएं, लेकिन राज साफ मना कर देता है। राज का मानना है कि वह सिमरन को भगाकर नहीं, बल्कि उसके बाबूजी का दिल जीतकर, पूरे सम्मान के साथ अपनी दुल्हन बनाकर ले जाएगा।

## **भाग 4: घर में एंट्री और क्लाइमेक्स**

राज एक सोची-समझी रणनीति के तहत कुलजीत से दोस्ती करता है और शादी के घर में एक मेहमान बनकर एंट्री पा लेता है। वह धीरे-धीरे घर के हर सदस्य का दिल जीत लेता है। यहाँ तक कि वह बलदेव सिंह के साथ सुबह की सैर पर जाने लगता है और कबूतरों को दाना खिलाने में उनका साथ देता है, जिससे बलदेव सिंह भी उसे पसंद करने लगते हैं।

शादी के दिन नजदीक आ रहे होते हैं। सिमरन की मां को जब राज की हकीकत पता चलती है, तो वह दोनों को भाग जाने के लिए कहती हैं और अपने गहने सौंपती हैं। लेकिन राज अपनी बात पर अड़ा रहता है।

तभी किस्मत एक पलटी मारती है। बलदेव सिंह को अचानक राज और सिमरन की एक पुरानी तस्वीर मिल जाती है, जो यूरोप ट्रिप की थी। उन्हें समझ आ जाता है कि राज ही वह लड़का है जिससे सिमरन प्यार करती है। बलदेव सिंह का भरोसा टूट जाता है। वे राज को थप्पड़ मारते हैं और उसे तुरंत वहां से चले जाने को कहते हैं।

## **अंतिम दृश्य: जा सिमरन जा...**

राज मायूस होकर अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन पहुंच जाता है। ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ चुकी होती है। तभी कुलजीत और उसके गुंडे वहां राज को मारने पहुंच जाते हैं। दोनों के बीच भयंकर लड़ाई होती है, लेकिन बलदेव सिंह वहां पहुंचकर लड़ाई रुकवा देते हैं।

राज और उसके पिता ट्रेन में बैठ जाते हैं। ट्रेन धीरे-धीरे चलने लगती है। तभी सिमरन दौड़ती हुई प्लेटफॉर्म पर आती है। कुलजीत उसका हाथ पकड़ लेता है, लेकिन बलदेव सिंह कुलजीत का हाथ छुड़ा देते हैं। सिमरन रोते हुए अपने बाबूजी से मिन्नतें करती है।

राज ट्रेन के दरवाजे पर खड़ा होकर हाथ आगे बढ़ाता है। बलदेव सिंह सिमरन की आंखों में सच्चा प्यार और राज की शराफत को देख लेते हैं। उनका सख्त दिल पिघल जाता है। वे सिमरन का हाथ छोड़ते हुए अपना ऐतिहासिक डायलॉग बोलते हैं:

> **"जा सिमरन जा... जी ले अपनी जिंदगी... जा अपने राज के पास!"**

>

सिमरन तेजी से दौड़ती है और राज का हाथ पकड़कर चलती ट्रेन में चढ़ जाती है। बलदेव सिंह मुस्कुराते हैं, और ट्रेन दोनों प्रेमियों को लेकर आगे बढ़ जाती है।

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