कसमों-ए-वादों को तिरे हम भी जो सच मानते रहें
पागल हम ही थे जो तिरे झूठ को सच मानके निभाते रहें
Author: Deepak Bundela
कसमों-ए-वादों को तिरे हम भी जो सच मानते रहें
पागल हम ही थे जो तिरे झूठ को सच मानके निभाते रहें
अक्सर सच के झूठ ज़िन्दगी तबाह कर देते हैं