Chapter 2: The Night That Should Never Change

रात वही थी।

आसमान फटा हुआ था।

हवा में आग, खून और चक्र की बदबू थी।

इतिहास की वह रात

जिसे कोई बदल नहीं पाया—

क्यूबी की रात।

कोनोहा जल रहा था।

घर गिर रहे थे,

निंजा मर रहे थे,

और आसमान में एक राक्षस

हँस रहा था।

एक छोटे से कमरे में—

एक नवजात बच्चा

कपड़े में लिपटा हुआ

शांत पड़ा था।

वह रो नहीं रहा था।

👶 “तो… मैं सच में वापस आ गया हूँ।”

उसकी आँखें बंद थीं,

लेकिन उसकी चेतना पूरी तरह जाग चुकी थी।

यह बच्चा नहीं था जो सोच रहा था—

यह वह आदमी था

जिसने सब कुछ खो दिया था।

दरवाज़ा खुला।

कुशिना उज़ुमाकी लड़खड़ाती हुई अंदर आई।

उसका शरीर ज़ख़्मों से भरा था।

उसने बच्चे को उठाया।

“नारूटो…”

उसकी आवाज़ काँप रही थी,

लेकिन उसकी पकड़ मज़बूत थी।

नारूटो ने उसकी धड़कन महसूस की।

तेज़।

कमज़ोर।

अस्थायी।

👶 “माँ…”

शब्द बाहर नहीं आए।

लेकिन दर्द आया।

बाहर—

मिनाटो नामिकाज़े

क्यूबी के सामने खड़ा था।

चौथा होकागे।

एक आदमी

जो जानता था

कि वह आज नहीं बचेगा।

“कुशिना!”

मिनाटो चिल्लाया।

उसकी आँखें बच्चे पर पड़ीं।

एक पल के लिए—

सब कुछ रुक गया।

उसने नारूटो को देखा।

और नारूटो—

उसे।

👶 “पापा…”

उस पल

नारूटो सब भूल जाना चाहता था।

भविष्य।

युद्ध।

मौत।

लेकिन समय निर्दयी था।

सीलिंग शुरू हुई।

क्यूबी की दहाड़

पूरे आकाश को चीर रही थी।

मिनाटो ने हाथ जोड़े।

कुशिना ने दाँत भींचे।

“नारूटो…”

कुशिना ने फुसफुसाया।

“तुम्हें अकेला छोड़ने के लिए माफ़ करना।”

नारूटो का दिल फट गया।

👶 “नहीं…”

“इस बार नहीं…”

लेकिन उसका शरीर छोटा था।

कमज़ोर।

तभी—

क्यूबी की चेतना

सील के भीतर उतरी।

🦊 “तो… यह वही बच्चा है।”

नारूटो ने पहली बार

उस ओर देखा।

👶 “कुरामा…”

क्यूबी चुप हो गया।

🦊 “तुम…”

🦊 “तुम बच्चे नहीं हो।”

अंतिम क्षण

क्यूबी सील हो चुका था।

कुशिना गिर पड़ी।

मिनाटो ने आख़िरी बार

अपने बेटे को पकड़ा।

उसके हाथ काँप रहे थे।

“मज़बूत बनना…”

मिनाटो ने कहा।

“लेकिन अकेला मत बनना।”

उसकी चक्र लौ बुझ गई।

कुशिना की साँस भी

उसी पल रुक गई।

सन्नाटा।

एक बच्चा

मरे हुए माता-पिता के बीच पड़ा था।

नारूटो ने रोने की कोशिश की।

लेकिन आँसू नहीं निकले।

👶 “मैं फिर देर से पहुँचा…”

सील के भीतर—

कुरामा ने धीरे से कहा:

🦊 “अब तुम्हारे पास कोई नहीं है, लड़के।”

नारूटो की चेतना काँपी।

👶 “गलत।”

“अब मेरे पास समय है।”

पहली बार—

नवजात नारूटो रोया।

और उसकी रोने की आवाज़ में—

कोनोहा का भविष्य

काँप उठा।

🌑 Chapter 2 Ends

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