Is Shreya Alive

Is Shreya Alive

पाँच साल बाद

India

रात

शहर की ऊँची-ऊँची बिल्डिंग्स पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी।

सड़कें खाली थीं।

हवा में हल्की ठंडक थी।

कांच की दीवारों से घिरी एक बड़ी कॉर्पोरेट बिल्डिंग दूर से काली दिख रही थी।

बस… एक केबिन की लाइट अभी भी जल रही थी।

पूरा फ्लोर अँधेरे में डूबा था।

सिर्फ वही केबिन… जैसे किसी की जिद पर रोशनी जला कर बैठा हो।

केबिन के अंदर…

वो आदमी कुर्सी पर झुका बैठा था।

लैपटॉप खुला था।

स्क्रीन पर फाइलें, ग्राफ, मेल्स… सब खुले थे।

लेकिन उसकी नजर उन पर नहीं थी।

उसकी आँखें स्क्रीन के आर-पार… कहीं बहुत दूर अटकी हुई थीं।

टेबल पर कॉफी का मग रखा था।

कॉफी ठंडी हो चुकी थी।

घड़ी में रात के 8 बज चुके थे।

Knock… knock…

उसने बिना नजर उठाए कहा —

“Come in.”

दरवाज़ा धीरे से खुला।

एक हैंडसम सा लड़का अंदर आया।

चेहरे पर चिंता साफ दिख रही थी।

“Sir… घर नहीं जाएंगे?”

कोई जवाब नहीं।

कमरे में सिर्फ एसी की हल्की आवाज थी।

वो थोड़ा और पास आया।

“Sir, ऐसे काम करते रहेंगे तो आपकी तबीयत खराब हो जाएगी…”

कुछ सेकंड की चुप्पी।

फिर धीमी, थकी हुई आवाज आई —

“तुम घर जाओ। रूही इंतज़ार कर रही होगी।”

लड़का ठिठका।

उसे पता था ये जवाब हर रात मिलता है।

लेकिन आज वो चुप नहीं रहा।

धीरे से बोला —

“लेकिन sir… आपकी बेटी भी आपका इंतज़ार कर रही होगी।

वो आपके बिना खाना नहीं खाती…”

कीबोर्ड पर चलती उंगलियाँ रुक गईं।

एक लंबी साँस उस आदमी के सीने से बाहर निकली।

कमरे की हवा अचानक भारी हो गई।

लड़के ने हिम्मत की —

“जब से श्रेया आपको छोड़कर गई है…

आपने खुद का ख्याल रखना छोड़ दिया है।

रीवा को माँ की जरूरत है…”

पहली बार उस आदमी ने उसकी तरफ देखा।

नजरें ठंडी थीं…

लेकिन उन आँखों के अंदर जमा हुआ दर्द साफ दिख रहा था।

लड़का अब धीरे-धीरे बोल रहा था, जैसे हर शब्द सोचकर निकल रहा हो —

“पाँच साल हो गए…

कोई खबर नहीं…

मुझे तो अब लगता है श्रेया—”

“Shut. Your. Mouth.”

आवाज़ ऊँची नहीं थी।

लेकिन इतनी सख्त… कि पूरा कमरा जैसे जम गया।

कुछ पल सन्नाटा।

फिर वही आदमी बोला —

“श्रेया जिंदा है।

और मैं उसे ढूंढ लूँगा।”

लड़के के हाथ हल्के से काँप गए।

“लेकिन… Arun sir… सबको तो पता है—”

उस आदमी की आँखें सिकुड़ गईं।

यहीं पहली बार उसका नाम सामने आया।

अरुण।

वो कुर्सी से उठा।

कुर्सी पीछे सरकने की आवाज कमरे में गूँज गई।

“कार निकालो।

रीवा मेरा इंतज़ार कर रही होगी।”

वो तेज कदमों से बाहर निकल गया।

लड़का कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा।

गहरी सांस ली।

फोन मिलाया —

“कार निकालो।”

पार्किंग

काली गाड़ी स्टार्ट हुई।

हेडलाइट्स ने अँधेरे को चीर दिया।

वो आदमी पीछे की सीट पर बैठा था।

चेहरा खिड़की की तरफ।

बाहर सड़कें पीछे छूट रही थीं।

उसकी आँखें खाली थीं।

अचानक… मोबाइल स्क्रीन जली।

वॉलपेपर पर एक फोटो थी।

धुंधली सी।

एक लड़की की।

उसने तुरंत स्क्रीन बंद कर दी।

जैसे वो तस्वीर देखना उसके लिए बहुत भारी हो।

दूसरी तरफ

प्रताप विला

एक कमरे में एक औरत कांच की Wall की पास खडी थीं वो शायद कुछ सोच रही थी. तभी एक आदमी उसे पीछे से huge करते हुए बोला जान क्या सोच रही हो वो औरत जो window के पास खडी थी वो और कोई नहीं बल्कि जानवी प्रताप थी श्रेया की मां और वो आदमी और कोई नहीं बल्कि श्रेया के डैड उदय प्रताप है. तभी जानवी गुस्से से उदय को खुद से दूर करते हुए बोली how dare you to call me jaan अगर आज के बाद मुझे अपने जान भी कहा तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा और आपकी हिम्मत भी कैसी हुए मुझे गाले लगाने की. जानवी में तुम्हारा पति हु और मुझे पूरा हक है तुम्हें गाले लगाने का और तुम्हे jaan कहने का उदय की बात पर जानवी दर्द भरी आवाज में बोली हक, Kiss हक की बात कर रहे हैं आप Mister प्रताप जो सालों पहले ही टूट चुका हैं जब आपके वजह से मुझसे मेरी बेटी दूर हुए है जानवी की बात सुन कर उदय बोला जानवी श्रेया सिर्फ तुम्हारी बेटी नहीं हैं मेरी भी हैं. उदय क्या सच में श्रेया आपकी भी बेटी हैं जब आपने उसे घर से बाहर निकाला था तब तो आपने उससे अपना रिश्ता अपना नाम अपना सब कुछ तो तोड दिया था न तो फिर अचानक से वह आपकी बेटी हो गई. वाह! क्या कमाल का मजाक हैं. जानवी हा में जनता हु की मैने श्रेया के साथ गलत किया है पर मेरा यकीन करो में श्रेया को बहुत जल्द ढूंढ लूंगा और सब कुछ ठीक कर दूंगा में हमारी बेटी को उसके घर में वापस लाऊंगा please मेरा यकीन करो में सब कुछ ठीक कर दूंगा. जानवी बोला आप तो सब कुछ ठीक कर ही रहे है न mr. pratap जानवी please mujhe Mister Pratap मत bolo मुझे तुम पहले के जैसे उदय नाम से पुकारो न Mister pratap जब तक आप मुझे मेरी बेटी नहीं ल देते है तब तक आप मुझजे दूर ही रहिए जब आप मुझे मेरी बेटी ला दोगे जब में खुशी खुशी आपको माफ कर दूंगी इतना कहकर जानवी बेड पर जाकर कोने में सो गई और उदय भी उसकी बात सुनकर बेड के दूसरे कोने जाकर सो गया जानवी की आंखों में आंसू थे. उदय को भी महसूस हो रहा था कि जानवी रो रही है उदय अपने मन में कहता है jaan में सब कुछ ठीक कर दूंगा दोनों के मन बस कुछ धुंधली यादें चल रही थी और एक ही सवाल था की पहले उनका रिश्ता कैसे था और अब कैसा है. दोनों के आंखों में बस आंसू थे इन पाँच साल में उदय और जानवी का रिश्ता बहुत ज्यादा बिगड था ऐसा नहीं था कि उदय ने जानवी की नाराजगी खत्म करने कोशिश नहीं की पर जानवी एक हि बात लेकर बैठी हुई थी की उसे श्रेया चाहिए उदय भी जनता था की की जानवी की ममता उसके ऊपर भारी पड रही है पर वो भी क्या करे उसे श्रेया का कोई भी पता नहीं चल रहा है तो उसकी आँखों में भी आंसू थे और फिर दोनों अपने साथ में बताए हुए यादो को याद करते हूए उनकी आँखों में आंसू आ गए

रात बहुत गहरी हो चुकी थी.

दोनों की पीठ एक- दूसरे की तरफ थी.

Janvi की आँखों से आँसू बह रहे थे.

Uday ने करवट बदली.

धीमी, टूटी आवाज में बोला —

Janvi. मैं तुम्हें कैसे यकीन दिलाऊँ.

कि Shreya मर चुकी है.

Janvi ने आँखें खोलीं.

आवाज में दर्द था, पर विश्वास भी —

नहीं. मेरी बेटी जिंदा है.

मुझे महसूस होता है.

कुछ देर बाद Janvi रोते- रोते सो गई.

Uday भी आँखें बंद किए पडा रहा.

और उसे भी नींद आ गई.

कमरे में सिर्फ घडी की टिक- टिक थी.

पूरा Pratap Villa अंधेरे में डूबा हुआ था.

सब सो चुके हैं.

एक इंसान मान चुका है — Shreya मर चुकी है. और

एक इंसान मान रहा है — Shreya जिंदा है.

Screen धीरे- धीरे काली होती है.

उसी कालेपन में.

दूर कहीं तेज रफ्तार से दौडती गाडियों की आवाज सुनाई देती है.

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