Brummmmm
रात के 1:43 बजे थे।
सड़कें खाली थीं। हवा में हल्की ठंड थी। दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज़ आ रही थी और ऊपर आसमान में बादल धीरे-धीरे चाँद को ढक रहे थे।
विवान अपनी hoodie पहनकर अकेला चल रहा था।
कानों में earphones थे… लेकिन कोई music नहीं चल रहा था।
कई बार इंसान songs नहीं, silence सुनना चाहता है।
उसके कदम धीमे थे।
जैसे वो कहीं पहुँचने नहीं… बस खुद से भागने निकला हो।
फोन pocket में vibrate हुआ।
उसने निकाला।
“11 missed calls.”
उसने बिना देखे phone वापस रख दिया।
कुछ दूर आगे एक छोटी सी दुकान खुली थी। आधा shutter गिरा हुआ, अंदर पीली रोशनी, और एक बूढ़ा आदमी चुपचाप चाय बना रहा था।
विवान जाकर बैठ गया।
“एक cutting,” उसने धीरे से कहा।
बूढ़े आदमी ने उसकी आँखों में देखा और बोला,
“चीनी कम रखूँ? परेशान लोग ज्यादा मीठा पसंद नहीं करते।”
विवान हल्का सा मुस्कुराया।
“आप psychologist हो क्या?”
“नहीं… बस रात में आने वाले लोगों के चेहरे पढ़ना सीख गया हूँ।”
कुछ सेकंड खामोशी रही।
फिर अचानक बूढ़े आदमी ने पूछा—
“जिसे भूल नहीं पा रहे… वो सच में इतना खास था?”
ये सुनकर विवान रुक गया।
उसने पहली बार ध्यान से बूढ़े आदमी को देखा।
“आपको कैसे पता?”
“क्योंकि जिनके अंदर तूफान चलता है ना… उनकी आँखें हमेशा थकी हुई लगती हैं।”
विवान नीचे देखने लगा।
उसे याद आने लगा—
Late night calls…
random promises…
future plans…
और फिर एक दिन सिर्फ इतना:
“I think we should stop talking.”
बस।
इतना ही।
ना reason।
ना closure।
उस दिन के बाद विवान हर चीज़ में interest खो चुका था।
बूढ़े आदमी ने चाय सामने रखते हुए कहा—
“सबसे dangerous दर्द पता है क्या होता है?”
विवान चुप रहा।
“जब इंसान बाहर से normal act करे… लेकिन अंदर से धीरे-धीरे खत्म हो रहा हो।”
हवा और ठंडी हो चुकी थी।
विवान ने पूछा,
“आपको कभी किसी ने छोड़ा है?”
बूढ़ा आदमी हँसा।
“बेटा… जिंदगी ने छोड़ा है।”
फिर उसने जेब से एक पुरानी फोटो निकाली।
उसमें वो खुद था… उसके साथ एक औरत और एक छोटा बच्चा।
“ये मेरी wife और बेटा थे।”
“थे?”
“Accident।”
विवान कुछ बोल नहीं पाया।
बूढ़े आदमी ने आसमान की तरफ देखा।
“उस दिन लगा था सब खत्म हो गया। कई महीने कमरे से बाहर नहीं निकला। लोगों से बात करना बंद। खुद से भी।”
“फिर?”
“फिर समझ आया… जिंदगी किसी के जाने से रुकती नहीं। रुक जाते हैं सिर्फ हम।”
विवान पहली बार ध्यान से उसकी बातें सुन रहा था।
“देखो,” बूढ़ा आदमी बोला,
“कुछ लोग तुम्हारी कहानी का हिस्सा होते हैं… मंज़िल नहीं।”
बारिश की पहली बूंद जमीन पर गिरी।
फिर दूसरी।
फिर धीरे-धीरे तेज बारिश शुरू हो गई।
लोग भागने लगे।
लेकिन विवान वहीं बैठा रहा।
कई महीनों बाद उसके अंदर कुछ शांत हो रहा था।
उसने धीरे से पूछा,
“अगर कोई वापस आ जाए तो?”
बूढ़ा आदमी मुस्कुराया।
“जो इंसान तुम्हें तोड़कर गया था… वो वापस आ भी जाए ना… तब भी तुम पहले जैसे नहीं रहोगे।”
“तो क्या करना चाहिए?”
“खुद को इतना मजबूत बनाओ… कि किसी के आने या जाने से तुम्हारी जिंदगी का मौसम ना बदले।”
विवान काफी देर तक बारिश को देखता रहा।
फिर उसने phone निकाला।
Gallery खोली।
उन दोनों की photos देखीं…
और पहली बार बिना रोए… delete कर दीं।
बारिश अब भी चल रही थी।
सड़कें अब भी खाली थीं।
रात अब भी उतनी ही ठंडी थी।
लेकिन इस बार…
विवान अकेला नहीं लग रहा था।
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