रात का समय था। बारिश हल्के-हल्के खिड़की पर गिर रही थी।
Harshal ने Rui का माथा फिर छुआ — अब भी बहुत गरम।
“Rui… मैं दवा लेकर आती हूँ, तुम लेटी रहो।”
लेकिन Rui ने उसका हाथ पकड़ लिया — “नहीं Harshal… मुझे किसी दवा की ज़रूरत नहीं है।”
उसकी आवाज़ धीमी थी, पर उसमें एक अनजानी ठंडक थी।
Harshal ने उसकी ओर देखा — Rui की आँखें पहले जैसी नहीं थीं। उनमें हल्की सी नीली चमक थी, जैसे भीतर कोई अंधेरा और रोशनी एक साथ जल रही हो।
“Rui, तुम… ठीक हो न?”
“हाँ, बस थोड़ा थक गई थी,” Rui ने मुस्कुराया, पर वो मुस्कान सामान्य नहीं थी।
Harshal ने उसके गले के पास हल्की सी चोट देखी, जैसे कोई पुराना निशान चमक उठा हो।
“ये निशान पहले नहीं था…”
“वो पुराना है,” Rui ने जल्दी से शॉल खींच लिया।
Harshal ने फिर कहा — “तुम मुझसे कुछ छुपा रही हो Rui?”
Rui ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा — “अगर बताऊँ, तो क्या तुम डर जाओगी?”
Harshal चुप रही। बारिश की आवाज़ कमरे में फैल गई।
फिर Rui ने धीरे से कहा —
“हर इंसान का खून एक कहानी कहता है, Harshal…
तुम्हारे खून में भी वो गर्मी है, जो मेरे लिए बहुत कीमती है।”
Harshal ने हैरानी से उसे देखा —
“क्या मतलब है तुम्हारा?”
Rui ने कुछ नहीं कहा। बस खिड़की की तरफ देखती रही।
बिजली चमकी — और उस पल Harshal ने उसकी परछाई में कुछ देखा —
Rui की आँखें पूरी नीली थीं, और उसकी परछाई में दिल की धड़कन नहीं थी।
Harshal के होंठ सूख गए —
“Rui… तुम आखिर हो कौन?”
रात की खामोशी में Rui की आवाज़ अब भी गूंज रही थी—
“तुम्हारा खून... मेरे भीतर बह रहा है, Harshal…”
Harshal कुछ पल तक उसे देखती रही, मानो शब्दों ने उसके दिल की धड़कनें रोक दी हों।
Rui ने आगे कहा —
“तुमने जो खून डोनेट किया था… वही मेरे शरीर में है।
पर वो बाकी लोगों जैसा नहीं था।
तुम्हारे खून में कुछ अलग है — वो मुझे जिंदा रखता है,
मुझे इंसानों के बीच जीने देता है।”
Harshal के होंठ कांपे — “मतलब… तुम इंसान नहीं हो?”
Rui मुस्कुराई, धीमे से बोली — “शायद आधी इंसान, आधी कुछ और।
मुझे खुद भी नहीं पता मैं क्या हूँ, पर जब तुम्हारा खून मेरे अंदर आया… मैं पूरी हो गई।”
उस रात Harshal सो नहीं सकी।
वो बस Rui के पास बैठी रही — उसकी साँसों की गर्मी, उसकी धड़कनों की नर्मी महसूस करते हुए।
Rui नींद में बड़बड़ाई — “मुझे छोड़कर मत जाना…”
Harshal ने उसके सिर पर हाथ रखा — “मैं कहीं नहीं जाऊँगी।”
फिर Rui के पास तकिया रख दिया ताकि उसे लगे कि Harshal अब भी वहीं है।
सुबह अलार्म बजा —
“अरे यार, फिर लेट हो गई!” Harshal बोली हड़बड़ाते हुए।
पर फिर Rui का चेहरा देखा — अब भी हल्की नींद में, लेकिन शांत।
“आज ऑफिस नहीं जाऊँगी,” Harshal ने खुद से कहा।
“उसकी तबीयत अभी ठीक नहीं है… मैं घर से ही काम कर लूँगी।”
वो किचन में गई, Rui के लिए सूप बनाया।
जैसे ही Rui ने सूप का पहला घूंट लिया, हल्की सी मुस्कान आई —
“ये सूप… तुम्हारे हाथों का है न?”
Harshal मुस्कुराई — “हाँ, अब ठीक लग रहा है न?”
Rui बोली — “हाँ, तुम्हारा बनाया सब कुछ मेरे लिए दवा है।”
Harshal ने Rui की आँखों में देखा —
अब डर नहीं था, बस एक अजीब सा खिंचाव था।
दिल कह रहा था — यह रिश्ता खून से नहीं, किस्मत से जुड़ा
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