सिंघानिया मैंशन की दीवारें जितनी ऊँची थीं, उतनी ही खामोश भी। अनन्या ने जब अपने कमरे का दरवाज़ा खोला, तो सामने का नज़ारा देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह कमरा किसी फाइव-स्टार होटल के कामरे से भी कहीं ज़्यादा बड़ा और आलीशान था। कमरे के बीचों-बीच एक विशाल 'किंग साइज' बेड था, जिस पर मखमली चादरें बिछी थीं। छत से लटकता झूमर मद्धम रोशनी बिखेर रहा था, जो कमरे के क्रीम और गोल्डन इंटीरियर को और भी राजसी बना रहा था।
अनन्या ने भारी मन से अपना छोटा सा बैग (जो उसके पिता ने विदाई के वक्त गाड़ी में रखवा दिया था) बेड पर रखा। आज का दिन उसके लिए किसी रोलर-कोस्टर सवारी जैसा रहा था। सुबह वह रोहन की दुल्हन बनने के सपने देख रही थी, और रात होते-होते वह उस इंसान की पत्नी बन चुकी थी जिसे पूरा शहर 'बिजनेस की दुनिया का जल्लाद' कहता था।
उसने खिड़की के पास जाकर भारी पर्दे हटाए। बाहर दूर-दूर तक फैला शहर की रोशनी का समंदर दिख रहा था। अनन्या ने ठंडी सांस ली। "तो यह है मेरी नई ज़िंदगी," उसने खुद से फुसफुसाकर कहा। तभी दरवाजे पर दस्तक हुई।
अनन्या ने पीछे मुड़कर देखा, विक्रम दरवाजे पर खड़ा था। उसने अपना कोट उतार दिया था और अपनी कमीज़ की आस्तीनें ऊपर चढ़ा ली थीं। वह अब भी उतना ही प्रभावशाली लग रहा था, लेकिन उसकी आँखों में थकान की जगह एक अजीब सी गहराई थी।
"उम्मीद है कमरा तुम्हें पसंद आया होगा," विक्रम ने कमरे के अंदर कदम रखते हुए कहा। उसकी आवाज़ में कोई अपनापन नहीं था, बस एक औपचारिकता थी।
अनन्या ने अपनी घबराहट छिपाते हुए कहा, "पसंद आने या न आने से क्या फर्क पड़ता है मिस्टर सिंघानिया? यह समझौता है, कोई हनीमून नहीं।"
विक्रम के होंठों पर एक टेढ़ी मुस्कान आई। "स्मार्ट। मुझे खुशी है कि तुम अपनी लिमिट्स जानती हो। इस अलमारी में तुम्हारी ज़रूरत का सारा सामान है। कल सुबह 9 बजे नाश्ते पर तैयार रहना। मेरी दादी और परिवार के बाकी लोग तुमसे मिलना चाहेंगे। याद रखना, उनके सामने तुम्हें एक 'आदर्श बहू' का नाटक करना होगा। मैं नहीं चाहता कि वसीयत मिलने से पहले किसी को भी हमारे इस कॉन्ट्रैक्ट का पता चले।"
अनन्या ने अपनी ठुड्डी ऊपर उठाई। "नाटक करने में मैं माहिर नहीं हूँ, लेकिन हाँ, मैं अपनी डील का हिस्सा बखूबी निभाऊंगी। पर मेरी एक शर्त है।"
विक्रम जो बाहर जाने के लिए मुड़ा था, रुक गया। "शर्त? अभी तो शादी हुई है और तुम्हारी मांगें शुरू हो गईं?"
"यह मांग नहीं, ज़रूरत है," अनन्या ने मेज पर रखे अपने पुराने लैपटॉप की ओर इशारा करते हुए कहा। "मुझे एक हाई-स्पीड एन्क्रिप्टेड सर्वर और एक अलग वर्कस्पेस चाहिए। मैं सिर्फ यहाँ बैठकर गहने पहनने वाली गुड़िया बनकर नहीं रह सकती। मुझे आपके 'प्रोजेक्ट X' के अगले फेज पर काम करना है।"
विक्रम ने उसे गौर से देखा। उसे लगा था कि वह शायद डायमंड सेट या क्रेडिट कार्ड मांगेगी, लेकिन उसने काम मांगा। विक्रम ने सिर हिलाया। "कल सुबह तुम्हारे कमरे में सेटअप लग जाएगा। अब सो जाओ। कल का दिन तुम्हारे लिए आसान नहीं होने वाला।"
विक्रम के जाने के बाद अनन्या ने चैन की सांस ली। उसने अपना भारी गहना उतारा और आईने में खुद को देखा। मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र... ये सब एक साल की मोहलत थी। उसने बिस्तर पर लेटते हुए आँखें मूँद लीं, लेकिन नींद कोसों दूर थी। उसके दिमाग में अभी भी रोहन का वह अपमानजनक चेहरा और विक्रम की वो सर्द आँखें घूम रही थीं।
अगली सुबह, जब सूरज की पहली किरण अनन्या के कमरे में आई, तो वह पहले से ही तैयार थी। उसने एक साधारण लेकिन ग्रेसफुल सफेद और सुनहरी साड़ी पहनी थी। उसने बालों को खुला छोड़ा और हल्का सा मेकअप किया। वह जानती थी कि आज उसकी असली परीक्षा है।
जैसे ही वह नीचे विशाल डाइनिंग हॉल की तरफ बढ़ी, उसे नीचे से लोगों के हँसने और बातें करने की आवाज़ें आईं। अनन्या ने सीढ़ियों पर हाथ रखा और खुद से कहा, "डरना मत अनन्या। तुम एक कपूर हो, और अब एक सिंघानिया भी।"
नीचे डाइनिंग टेबल पर एक बुजुर्ग महिला बैठी थी जिनके चेहरे पर कठोरता साफ़ झलक रही थी। उनके साथ एक और महिला और एक हमउम्र लड़का बैठा था। जैसे ही अनन्या ने हॉल में कदम रखा, सबकी बातें अचानक रुक गईं और सबकी नज़रें अनन्या के चेहरे पर जम गईं।
सीढ़ियों से नीचे उतरते समय अनन्या को महसूस हुआ कि डाइनिंग हॉल की भव्यता जितनी चमकदार है, वहां का माहौल उतना ही ठंडा और बोझिल है। मेज के केंद्र में एक बुजुर्ग महिला बैठी थीं, जिनकी सफेद साड़ी की तहें भी उतनी ही सख्त थीं जितना उनका चेहरा। वह विक्रम की दादी, सावित्री देवी थीं—सिंघानिया साम्राज्य की असली शासक। उनके दाहिने हाथ की तरफ विक्रम की सौतेली माँ, अनिता, और बायीं तरफ उसका चचेरा भाई, आर्यन बैठा था।
जैसे ही अनन्या ने मेज के पास कदम रखे, हॉल में चल रही कानाफूसी अचानक थम गई। सावित्री देवी ने अपनी नज़रों का सोने का चश्मा थोड़ा नीचे खिसकाया और अनन्या को ऊपर से नीचे तक ऐसे देखा जैसे कोई पारखी किसी नकली हीरे की शुद्धता की जांच कर रहा हो। उनकी आँखों में अनन्या के लिए कोई स्वागत नहीं, बल्कि एक गहरी चुनौती थी।
"तो, यह है वह लड़की जिसने कल रात हमारे खानदान की सदियों पुरानी परंपराओं का तमाशा बना दिया?" सावित्री देवी की आवाज़ में ज़हर और अधिकार दोनों घुले हुए थे।
अनन्या ने बिना डरे उनके पैर छूने के लिए हाथ बढ़ाया, लेकिन दादी ने अपनी कुर्सी थोड़ी पीछे खींच ली। अनन्या रुकी नहीं, वह सीधी खड़ी हुई और उनके चेहरे पर टिकी नज़रों से नज़रें मिलाईं। अनन्या मुस्कुराई, एक ऐसी मुस्कान जो सम्मानजनक भी थी और आत्मविश्वास से भरी भी।
"प्रणाम दादी जी। तमाशा तो तब होता जब सिंघानिया खानदान का वारिस मंडप पर अकेला खड़ा रह जाता और दुनिया थू-थू करती। मैंने तो बस उस खाली जगह को भरा है और आपके परिवार की इज्जत को गिरने से बचाया है," अनन्या ने शांति से जवाब दिया।
मेज पर अचानक मौत जैसा सन्नाटा छा गया। आर्यन, जो विक्रम का चचेरा भाई था, उसने अपनी प्लेट में देखते हुए दबी हुई हंसी रोकने की कोशिश की। उसे समझ आ गया था कि घर में कोई ऐसा आया है जो दादी को टक्कर दे सकता है। तभी विक्रम डाइनिंग हॉल में दाखिल हुआ। उसने अपनी कुर्सी खींची और अनन्या के ठीक बगल में बैठ गया। उसकी भारी और मजबूत मौजूदगी ने अनन्या को एक अनकही सुरक्षा दी।
"दादी, अनन्या अब मेरी पत्नी और इस घर की बहू है। बेहतर होगा कि हम बीती बातों पर बहस करने के बजाय नाश्ते पर ध्यान दें," विक्रम ने अपने चिर-परिचित सपाट और ठंडे लहजे में कहा।
"पत्नी?" विक्रम की चाची, शालिनी, जो पास ही बैठी थीं, उन्होंने तंज कसते हुए कहा। "विक्रम, शादियां बराबर के खानदानों में होती हैं। यहाँ तो लड़की का बाप दिवालिया होने की कगार पर है और खुद लड़की एक 'हैकर' बताई जा रही है। क्या भरोसा कि यह हमारे घर की तिजोरियों की चाबियाँ अपनी उंगलियों के जादू से न उड़ा ले जाए?"
अनन्या ने अपना जूस का गिलास धीरे से नीचे रखा। मेज पर रखे कटलरी की खनक भी उस सन्नाटे में गूँज उठी। उसने शालिनी की आँखों में आँखें डालकर बड़े आराम से कहा, "चाची जी, पहली बात—मैं 'हैकर' नहीं, एक 'सिस्टम आर्किटेक्ट' हूँ। मैं सिस्टम तोड़ती नहीं, उन्हें और बेहतर बनाती हूँ। और जहाँ तक तिजोरियों की बात है, मुझे दूसरों की दौलत चुराने में नहीं, बल्कि अपना खुद का साम्राज्य खड़ा करने में दिलचस्पी है।"
अनन्या थोड़ा और आगे झुकी और शालिनी के गले में चमक रहे हार की तरफ इशारा किया। "वैसे चाची जी, आपके गले का यह बेशकीमती हार... पिछले साल के 'सिंघानिया ज्वैलर्स' के इन्वेंट्री डेटा के हिसाब से कंपनी के नाम पर 'मार्केटिंग गिफ्ट' के तौर पर खरीदा गया था, आपके पर्सनल फंड से नहीं। तकनीकी तौर पर कंपनी के पैसों का अपने व्यक्तिगत श्रृंगार के लिए इस्तेमाल करना भी एक तरह की चोरी या गबन ही कहलाता है। क्या मैं सही हूँ?"
शालिनी का चेहरा पल भर में सफेद पड़ गया। उसने घबराकर अपने गले के हार को हाथ से छिपाने की कोशिश की। सावित्री देवी ने अनन्या की तरफ अब और भी गौर से देखा। उन्हें समझ आ गया था कि यह लड़की सिर्फ खूबसूरत नहीं है, इसके पास एक तेज़ दिमाग और खतरनाक जानकारी भी है।
"ज़बान बहुत तेज़ चलती है तुम्हारी," सावित्री देवी ने कड़क आवाज़ में माहौल को संभाला। "याद रखना, इस घर की बहू बनने के लिए सिर्फ मांग में भरा सिंदूर काफी नहीं होता। आज शाम को हमारे पुश्तैनी मंदिर में 'कुल-पूजा' है। शहर के सभी दिग्गज बिजनेसमैन और प्रेस वाले आएंगे। अगर तुमने वहां कोई भी ऐसी वैसी हरकत की जिससे हमारे खानदान की गरिमा को ठेस पहुँचे, तो मैं तुम्हें उसी वक्त इस घर की चौखट से बाहर कर दूँगी, फिर चाहे विक्रम कुछ भी कहे।"
विक्रम ने अनन्या की तरफ देखा। उसकी आँखों में एक चेतावनी और एक अनकहा सवाल था—'क्या तुम यह सब झेल पाओगी?'
नाश्ता खत्म होते ही विक्रम अपनी जगह से खड़ा हुआ। "अनन्या, मेरे ऑफिस रूम में आओ। तुम्हें कुछ कॉन्ट्रैक्ट पेपर्स साइन करने हैं और तुम्हारा नया वर्कस्टेशन तैयार है।"
जैसे ही वे डाइनिंग हॉल की भारी सीमाओं से बाहर निकले, अनन्या ने एक लंबी और राहत की सांस ली। विक्रम गलियारे में मुड़ा और दीवार से सटकर खड़ा हो गया, अपनी बाहें सीने पर बांध लीं। "तुमने शालिनी चाची का जो मुंह बंद किया, वह वाकई काबिले-तारीफ था। लेकिन दादी से सीधा पंगा लेना आग के दरिया में कूदने जैसा है। आज शाम की पूजा में तुम्हें हर कदम फूँक-फूँक कर रखना होगा। वे लोग तुम्हें नीचा दिखाने का एक भी मौका नहीं छोड़ेंगे।"
अनन्या ने एक हल्की शरारती मुस्कान के साथ कहा, "मिस्टर सिंघानिया, मैं आग से खेलना बचपन से जानती हूँ। बस आप यह पक्का कीजिए कि शाम तक मेरा हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन चालू हो जाए। मुझे आपके डेटाबेस में कुछ ऐसा मिला है जो आपके 'प्रोजेक्ट X' के भविष्य के लिए बहुत कीमती... और शायद खतरनाक भी हो सकता है।"
विक्रम उसे बस देखता ही रह गया। वह यह समझ ही नहीं पा रहा था कि यह लड़की इतनी शांत और प्रभावी कैसे हो सकती है, जबकि पूरा परिवार उसके खून का प्यासा खड़ा है। वह धीरे से अपने मन में बुदबुदाया, "तुम वाकई एक पहेली हो, अनन्या कपूर... या शायद अब अनन्या विक्रम सिंघानिया।"
विक्रम, अनन्या को महल के एक ऐसे हिस्से में ले गया जो बाकी घर से बिल्कुल अलग था। भारी ओक के दरवाज़े खुले और अनन्या के सामने एक मॉडर्न 'होम-ऑफिस' था। दीवार पर तीन बड़ी स्क्रीन्स लगी थीं, बेहतरीन प्रोसेसर वाले कंप्यूटर्स थे और कमरे की लाइटिंग ऐसी थी जो एकाग्रता बढ़ा दे।
"यह तुम्हारा वर्कस्पेस है," विक्रम ने अपनी जेब में हाथ डालते हुए कहा। "तुम्हारी डिमांड के मुताबिक यहाँ हाई-स्पीड लीज्ड लाइन इंटरनेट और टॉप-नॉच सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर्स इंस्टॉल कर दिए गए हैं। लेकिन याद रखना, यहाँ जो भी डेटा तुम देखोगी, वह सिंघानia ग्रुप की प्रॉपर्टी है।"
अनन्या ने मेज़ पर हाथ फेरा। उसकी उंगलियाँ कीबोर्ड को छूते ही एक अलग ही आत्मविश्वास से भर गईं। "मुझे डेटा चुराने की ज़रूरत नहीं है मिस्टर सिंघानिया, मैं उसे बनाना जानती हूँ।"
विक्रम के जाने के बाद अनन्या ने काम शुरू किया। उसने 'प्रोजेक्ट X' की उन फाइल्स को एक्सेस किया जिन्हें कल रात उसने फिक्स किया था। जैसे-जैसे वह कोड की गहराई में उतरी, उसका माथा ठनकने लगा। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक नया बिजनेस सॉफ्टवेयर नहीं था; यह एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम था जो ग्लोबल मार्केट को कंट्रोल कर सकता था।
अचानक, उसकी स्क्रीन पर एक रेड सिग्नल चमका। "Unauthorized Access Detected?" अनन्या बुदबुदाई। उसने अपनी उंगलियों की रफ़्तार बढ़ाई और उस सोर्स को ट्रैक करने लगी जो गुप्त रूप से विक्रम के डेटा को कॉपी कर रहा था।
हैरानी की बात यह थी कि यह हैकिंग बाहर से नहीं, बल्कि सिंघानिया मैंशन के ही किसी इंटरनल सर्वर से हो रही थी। अनन्या ने कोड को डिकोड किया तो उसके सामने एक फोल्डर खुला जिसका नाम था— 'V.S. Past - 2015'।
उसने फोल्डर खोला और वहां कुछ ऐसी तस्वीरें और रिपोर्ट्स थीं जिन्होंने अनन्या के होश उड़ा दिए। वहां विक्रम की एक पुरानी तस्वीर थी जिसमें वह एक बहुत ही खुशमिज़ाज लड़का लग रहा था, और उसके साथ एक लड़की थी। अगली फाइल एक एक्सीडेंट की रिपोर्ट थी।
"तो यह है विक्रम सिंघानिया के 'कोल्ड' होने की वजह?" अनन्या ने खुद से सवाल किया। वह अभी और पढ़ना ही चाहती थी कि अचानक दरवाज़ा खुला और विक्रम अंदर दाखिल हुआ। अनन्या ने झटके से स्क्रीन बंद की, लेकिन विक्रम की बाज़ जैसी नज़रों ने उसकी घबराहट पकड़ ली।
"क्या देख रही थी तुम?" विक्रम की आवाज़ में शक और गुस्सा दोनों थे। वह तेज़ी से अनन्या की तरफ बढ़ा और मेज़ पर दोनों तरफ हाथ रखकर उसे अपने बीच में घेर लिया।
अनन्या का दिल तेज़ धड़कने लगा, लेकिन उसने अपनी आँखें नीची नहीं कीं। "मैं... मैं सिर्फ बैकएंड देख रही थी। आपके सिस्टम में एक 'लीक' है मिस्टर सिंघानिया। कोई आपके घर के अंदर बैठकर आपका डेटा चुरा रहा है।"
विक्रम का चेहरा और भी सख्त हो गया। "मेरी जासूसी करने की कोशिश मत करना अनन्या। मैंने तुम्हें यहाँ सिर्फ एक साल के लिए रखा है। अपना काम करो और मेरे अतीत या मेरे सिस्टम की उन गलियों में मत घुसो जहाँ जाने की इजाज़त मैंने तुम्हें नहीं दी है।"
अनन्या ने साहस जुटाकर कहा, "आपका अतीत आपके भविष्य को बर्बाद कर रहा है। अगर मैंने आज उस लीक को नहीं रोका होता, तो शाम की पूजा से पहले आपकी आधी नेटवर्थ गायब हो चुकी होती।"
विक्रम एक पल के लिए खामोश हुआ। उसने अनन्या की आँखों में देखा—वहां कोई छल नहीं, सिर्फ एक जीनियस की ईमानदारी थी। उसने धीरे से अपना हाथ पीछे खींचा।
"शाम की पूजा की तैयारी करो," विक्रम ने धीमे लहजे में कहा। "शालिनी चाची ने तुम्हारे लिए एक भारी लहंगा और कुछ खानदानी गहने भेजे हैं। उन्हें पहन लेना। शाम को शहर के सबसे बड़े इंवेस्टर्स आ रहे हैं। अगर तुमने वहां कोई गड़बड़ की, तो यह तुम्हारा आखिरी दिन होगा।"
विक्रम कमरे से बाहर निकल गया, लेकिन अनन्या को पता था कि उसने एक बहुत बड़ा राज़ देख लिया है। वह 'प्रोजेक्ट X' को हैक करने वाले उस अंदरूनी गद्दार को ढूंढने और विक्रम के उस घाव को समझने के लिए अब और भी ज़्यादा उत्सुक थी।
शाम होते-होते सिंघानिया मैंशन रोशनी से जगमगा उठा। फूलों की सजावट और कीमती इत्र की खुशबू ने पूरे माहौल को शाही बना दिया था। शहर के बड़े-बड़े बिजनेसमैन, नेता और प्रेस के लोग वहां मौजूद थे। हर कोई उस रहस्यमयी लड़की को देखना चाहता था, जिसने रातों-रात विक्रम सिंघानिया को शादी के लिए मजबूर कर दिया था।
अनन्या ने शालिनी चाची का भेजा हुआ गहरा नीलमणि (Royal Blue) रंग का लहंगा पहना था। भारी कुंदन के गहने और माथे पर सजी छोटी सी बिंदिया उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे। जब वह सीढ़ियों से नीचे उतरी, तो हॉल में मौजूद हर शख्स की नजरें उस पर ठहर गईं।
विक्रम नीचे ही खड़ा मेहमानों से बात कर रहा था। जैसे ही उसकी नजर अनन्या पर पड़ी, वह एक पल के लिए अपनी बात भूल गया। उसने बहुत सी सुंदर औरतें देखी थीं, लेकिन अनन्या के चेहरे पर जो आत्मविश्वास और गरिमा थी, वह बेमिसाल थी। वह आगे बढ़ा और अनन्या का हाथ थामकर उसे भीड़ के सामने ले गया।
"मिस्टर एंड मिसेज विक्रम सिंघानिया," प्रेस के कैमरों की लाइटें चमकने लगीं।
तभी, भीड़ के बीच से एक जानी-पहचानी आवाज़ आई, "वाह! क्या गजब का इत्तेफाक है।"
अनन्या के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। उसने मुड़कर देखा तो सामने रोहन खड़ा था। उसके साथ उसकी पार्टनर ईशा भी थी, जिसने अनन्या को नीचा दिखाने के लिए बेहद भड़कीला लिबास पहना था। रोहन के चेहरे पर वही पुरानी घमंडी मुस्कान थी।
"अनन्या, मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी जल्दी 'मूव ऑन' कर लोगी। और वो भी शहर के सबसे अमीर आदमी के साथ? मानना पड़ेगा, तुम्हारी कोडिंग से ज़्यादा तुम्हारी किस्मत तेज़ है," रोहन ने सबके सामने ऊँची आवाज़ में कहा ताकि लोग सुन सकें।
हॉल में कानाफूसी शुरू हो गई। सावित्री देवी (दादी) की आँखें गुस्से से लाल हो गईं। उन्हें डर था कि अनन्या उनके खानदान की नाक कटवा देगी।
ईशा ने चुटकी लेते हुए कहा, "सुना है यह शादी सिर्फ एक 'सौदा' है? क्यों अनन्या, कितना मिला तुम्हें इस नाटक के लिए?"
अनन्या का दिल ज़ोर से धड़क रहा था, लेकिन उसने खुद को संभाला। इससे पहले कि वह कुछ बोलती, उसने महसूस किया कि विक्रम का हाथ उसकी कमर पर थोड़ा और कस गया है। विक्रम ने ठंडे और भारी लहजे में कहा, "मिस्टर खन्ना, मेरे घर में मेहमान बनकर आए हो तो मेहमान की तरह रहो। मेरी पत्नी की हैसियत तुम्हारे पूरे खानदान की कुल संपत्ति से ज़्यादा है। और जहाँ तक 'सौदे' की बात है... तुमने तो अनन्या को छोड़ा था क्योंकि तुम्हें पैसे की ज़रूरत थी, है ना? तो आज रात तुम्हारा बैंक बैलेंस चेक कर लेना, क्योंकि कपूर इंडस्ट्रीज के सारे शेयर अब अनन्या के नाम हैं। अब तुम उसके सामने एक कर्मचारी से ज़्यादा कुछ नहीं हो।"
रोहन का चेहरा शर्म से काला पड़ गया। प्रेस वालों ने तुरंत इस खबर को नोट कर लिया। अनन्या ने विक्रम की तरफ देखा, उसकी आँखों में कृतज्ञता थी। उसने रोहन की आँखों में आँखें डालकर कहा, "रोहन, कचरा जब घर से बाहर फेंक दिया जाता है, तो उसे दोबारा मुड़कर नहीं देखा जाता। तुम अब मेरे लिए वही कचरा हो। ईशा, तुम्हें मुबारक हो यह 'पुरानी चीज़'।"
पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। रोहन और ईशा वहां से खिसकने के अलावा कुछ नहीं कर सकते थे।
पूजा शुरू हुई। मंत्रों की गूँज के बीच अनन्या और विक्रम ने साथ बैठकर आहुति दी। आरती के वक्त जब अनन्या ने दीया पकड़ा, तो विक्रम ने भी अपना हाथ उसके ऊपर रख दिया। उस पल, दोनों के बीच एक अनकहा बिजली सा अहसास हुआ।
देर रात, जब मेहमान चले गए, अनन्या अपने कमरे में जाने लगी। तभी विक्रम ने उसे गलियारे (corridor) में रोका।
"आज तुमने अच्छा प्रदर्शन किया," विक्रम ने कहा।
"यह प्रदर्शन नहीं था विक्रम। यह सच था," अनन्या ने शांति से जवाब दिया। "लेकिन आपने जो किया... मेरे पिता की कंपनी के शेयर मेरे नाम करना... वह ज़रूरी नहीं था।"
विक्रम उसकी ओर एक कदम और बढ़ा। "सिंघानिया अपनी चीज़ों की हिफाजत करना जानते हैं। और अभी के लिए, तुम मेरी पत्नी हो।"
वह मुड़कर चला गया, लेकिन अनन्या वहीं खड़ी रह गई। उसने महसूस किया कि इस 'कॉन्ट्रैक्ट' में अब भावनाएं भी जुड़ने लगी हैं। लेकिन उसे वह 'लीक' और विक्रम का पुराना राज़ भी याद था। उसे पता था कि असली खतरा अभी टला नहीं है, वह इसी घर के अंदर छिपा है।
उसने अपने कमरे में जाकर अपना लैपटॉप खोला। 'प्रोजेक्ट X' के कोड के पीछे उसने एक नया नाम ढूंढ निकाला था जिसने उसे चौंका दिया—वह नाम था आर्यन (विक्रम का चचेरा भाई)।
अनन्या मुस्कुराई। "खेल अब शुरू हुआ है, आर्यन।"
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