Ek Anjaan Rishta

Ek Anjaan Rishta

Mandap, Dhokha aur Ek Sauda

शहनाइयों की गूँज, गुलाबों की भीनी खुशबू और चारों तरफ बिखरी रोशनी—अनन्या कपूर के लिए यह सब किसी खूबसूरत ख्वाब जैसा होना चाहिए था। लेकिन नियति ने उसके लिए कुछ और ही लिख रखा था। लाल जोड़े में सजी अनन्या, अपने कमरे के आईने के सामने खड़ी थी। उसने अपनी हथेलियों पर रची गहरी लाल मेहंदी को देखा, जिसमें बड़ी बारीकी से 'रोहन' का नाम लिखा था। लेकिन अजीब बात थी, उसे आज खुशी से ज्यादा बेचैनी महसूस हो रही थी।

अचानक, बाहर हॉल में छाया शोर सन्नाटे में बदल गया। अनन्या का दिल जोर से धड़का। वह जानती थी कि यह सन्नाटा किसी शुभ समाचार का संकेत नहीं है। उसने तेजी से अपने कमरे का दरवाजा खोला और सीढ़ियों की तरफ भागी।

हॉल का नजारा देखकर अनन्या के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसके पिता, मिस्टर कपूर, सोफे पर ढह गए थे और उनके हाथ कांप रहे थे। रोहन के पिता सिर झुकाए खड़े थे और पास ही जमीन पर एक चिट्ठी पड़ी थी।

"वह नहीं आएगा! वह अपनी सेक्रेटरी के साथ भाग गया है!" अनन्या की बुआ की चीख ने पूरे हॉल को हिला दिया।

अनन्या ने कांपते हाथों से वह चिट्ठी उठाई। रोहन ने लिखा था—"अनन्या, मैं यह शादी नहीं कर सकता। मुझे पता चला है कि तुम्हारी पुश्तैनी जायदाद कानूनी पचड़ों में फंसी है। मुझे एक ऐसी पत्नी चाहिए जो मेरे बिजनेस में पैसा लगा सके, न कि वह जो खुद कर्ज में डूबी हो। मैं अपनी सेक्रेटरी से प्यार करता हूँ, वह कम से कम अमीर तो है।"

चिट्ठी पढ़ते ही अनन्या की आँखों के सामने अंधेरा छा गया। रोहन, जिससे वह पिछले दो साल से प्यार करती थी, वह इतना गिर सकता है? उसने सिर्फ अनन्या का दिल ही नहीं तोड़ा था, बल्कि सरेआम उसके पिता की इज्जत की नीलामी कर दी थी।

"हाय राम! अब इस बेचारी का क्या होगा?"

"देखा, मैंने पहले ही कहा था, बिना जांच-पड़ताल के शादी तय नहीं करनी चाहिए थी। अब तो कपूर खानदान की नाक कट गई!"

रिश्तेदारों और मेहमानों की ये कड़वी बातें अनन्या के कानों में पिघले हुए लोहे की तरह उतर रही थीं। उसने अपने पिता की तरफ देखा, जो शर्मिंदगी और दुख के कारण किसी से नजरें नहीं मिला पा रहे थे।

लेकिन अनन्या कपूर कोई आम लड़की नहीं थी। वह एक 'मल्टी-टैलेंटेड जीनियस' थी। दुनिया उसे सिर्फ एक अमीर बाप की बेटी समझती थी, लेकिन पर्दे के पीछे वही थी जो अपने पिता के गिरते हुए बिजनेस को अपनी बेहतरीन रणनीतियों और कोडिंग स्किल्स से बचा रही थी। उसका दिमाग एक सुपर कंप्यूटर से भी तेज चलता था।

रोहन ने सोचा था कि मैं टूट जाऊंगी? उसने सोचा था कि वह मेरे परिवार का तमाशा बनाएगा? अनन्या की मुट्ठियां भिंच गईं। उसकी आँखों के आंसू अब गायब हो चुके थे और उनकी जगह एक ठंडी आग ने ले ली थी।

उसने हॉल में चारों तरफ नजर दौड़ाई। हर कोई उसका मजाक उड़ाने के लिए तैयार खड़ा था। तभी उसकी नजर वीआईपी (VIP) सेक्शन में बैठे उस शख्स पर पड़ी, जो हाथ में वाइन का गिलास लिए इस पूरे ड्रामे को बड़ी तटस्थता से देख रहा था। उसके चेहरे पर न हमदर्दी थी, न ही हैरानी।

वह था—विक्रम सिंघानिया।

विक्रम, जिसके एक इशारे पर शेयर बाजार हिल जाता था। वह यहाँ किसी रिश्तेदारी की वजह से नहीं, बल्कि एक बिजनेस डील के सिलसिले में आया था। अनन्या का दिमाग तेजी से डेटा प्रोसेस करने लगा। उसे याद आया कि विक्रम सिंघानिया को अपने दादा की वसीयत पूरी करने के लिए एक महीने के भीतर शादी करनी थी, वरना उसकी सारी संपत्ति हाथ से निकल जाती।

अनन्या के होंठों पर एक जानलेवा मुस्कुराहट आई। उसने अपना घूंघट उठाया और उसे बड़ी मजबूती से अपने सिर पर सेट किया। वह रोते हुए अपने कमरे में नहीं गई, बल्कि पूरे आत्मविश्वास के साथ सीधा विक्रम सिंघानिया की तरफ बढ़ने लगी। हॉल में मौजूद हर शख्स की सांसें थम गईं।

अनन्या के कदम जब वीआईपी सोफे की तरफ बढ़े, तो पूरे हॉल में कानाफूसी का शोर अचानक एक सन्नाटे में तब्दील हो गया। लोग एक-दूसरे को कोहनियां मारकर इशारा करने लगे। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि एक दुल्हन, जिसका दूल्हा अभी-अभी मंडप छोड़कर भागा हो, वह शहर के सबसे खूंखार और ताकतवर बिजनेस टाइकून की तरफ क्यों जा रही है।

विक्रम सिंघानिया ने अपनी ठंडी, गहरी आँखों से अनन्या को अपनी ओर आते देखा। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, लेकिन भीतर ही भीतर वह इस लड़की की हिम्मत देख कर थोड़ा हैरान जरूर था। जहाँ दूसरी लड़कियां उसके सामने आने से कतराती थीं, यह लड़की सीधा उसकी आँखों में आँखें डाल कर खड़ी हो गई थी।

अनन्या, विक्रम के ठीक सामने जाकर रुक गई। उसने गौर किया कि विक्रम का व्यक्तित्व उसकी तस्वीरों से कहीं ज्यादा प्रभावशाली था। एक काला थ्री-पीस सूट, सलीके से संवारे हुए बाल और एक ऐसी शख्सियत जो बिना कुछ बोले भी सत्ता का अहसास कराती थी।

"मिस्टर सिंघानिया," अनन्या की आवाज पूरे हॉल में गूँजी। उसकी आवाज में न कंपन था, न ही कोई डर।

विक्रम ने अपनी कलाई पर बंधी महंगी घड़ी देखी और फिर बड़ी बेरुखी से कहा, "मिस कपूर, मेरे पास फालतू तमाशों के लिए वक्त नहीं है। अगर आप हमदर्दी की तलाश में यहाँ आई हैं, तो आप गलत इंसान के पास हैं।"

अनन्या ने एक हल्की सी मुस्कान दी, जो किसी चुनौती से कम नहीं थी। "मैं यहाँ हमदर्दी मांगने नहीं, बल्कि आपको एक 'ऑफर' देने आई हूँ। एक ऐसा ऑफर, जिसे ठुकराना आपके बिजनेस और आपकी विरासत (Legacy) के लिए बहुत महंगा साबित होगा।"

विक्रम ने अपना वाइन का गिलास टेबल पर रखा और थोड़ा आगे झुकते हुए उसे गौर से देखा। "दिलचस्प... बोलिए।"

अनन्या ने बिना हिचकिचाए कहा, "आपके दादा जी की वसीयत... जिसके मुताबिक आपको अपना पारिवारिक बिजनेस संभालने के लिए अगले 21 दिनों के भीतर शादी करनी अनिवार्य है। अगर आप ऐसा नहीं करते, तो सिंघानिया ग्रुप का 40% हिस्सा चैरिटी में चला जाएगा और आपके हाथ से पावर निकल जाएगी। क्या मैं सही हूँ?"

विक्रम की आँखों में एक चमक सी कौंधी। यह जानकारी बेहद गोपनीय थी। उसने अपनी कुर्सी के हत्थे पर अपनी उंगलियां बजाते हुए पूछा, "तुम्हें यह सब कैसे पता?"

"मैं सिर्फ एक दुल्हन नहीं हूँ मिस्टर सिंघानिया, मैं एक 'जीनियस' हूँ। डेटा माइनिंग और मार्केट रिसर्च मेरे लिए बच्चों का खेल है," अनन्या ने आत्मविश्वास से कहा। "आज रोहन भाग गया, मेरी इज्जत दांव पर है। आपको एक पत्नी चाहिए, मुझे अपने परिवार का सम्मान बचाना है। तो क्यों न हम एक समझौता कर लें? आप मुझसे अभी, इसी मंडप में शादी करेंगे। यह शादी सिर्फ एक 'कॉन्ट्रैक्ट' होगी—एक साल के लिए। एक साल बाद हम अपनी-अपनी राहें अलग कर लेंगे।"

पूरे हॉल में जैसे बम फूट गया। अनन्या के पिता, मिस्टर कपूर, भागते हुए उसके पास आए। "अनन्या! यह तुम क्या अनर्थ कर रही हो? होश में तो हो? तुम सिंघानिया साहब से ऐसी बात कैसे कर सकती हो?"

रिश्तेदारों ने फिर जहर उगलना शुरू किया। "देखो, दूल्हा भागा तो अब यह अमीर बाप के बेटे को फांस रही है! कैसी बेशर्म लड़की है!"

विक्रम अचानक अपनी जगह से खड़ा हुआ। उसका लंबा कद अनन्या के सामने एक दीवार की तरह खड़ा था। उसने अनन्या के चेहरे की तरफ अपना हाथ बढ़ाया। लोग समझे कि शायद वह उसे धक्का देगा या थप्पड़ मारेगा, लेकिन उसने सिर्फ अनन्या की ठुड्डी को पकड़कर उसका चेहरा ऊपर उठाया।

"एक साल का कॉन्ट्रैक्ट? और बदले में मुझे क्या मिलेगा? सिंघानिया साम्राज्य को किसी के सहारे की जरूरत नहीं है," विक्रम की आवाज ठंडी और भारी थी।

अनन्या ने पीछे हटने के बजाय उसकी आँखों में गहराई से देखा और धीमी आवाज में कहा, "मिस्टर सिंघानिया, आपके 'प्रोजेक्ट X' की कोडिंग फाइल में एक ऐसा बग (Bug) है जिसे आपकी पूरी आईटी टीम तीन महीने से नहीं सुलझा पाई है। अगर मैं उसे अभी, आधे घंटे में ठीक कर दूँ, तो क्या आप मेरा हाथ थामेंगे?"

विक्रम के चेहरे पर पहली बार हैरानी के भाव आए। उस प्रोजेक्ट के बारे में सिर्फ पांच लोग जानते थे। उसने अनन्या को ऊपर से नीचे तक देखा। लाल जोड़े में सजी यह लड़की किसी पहेली जैसी लग रही थी।

उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और अनन्या की कलाई पकड़ ली। "अगर तुमने वह बग ठीक कर दिया, तो आज इस मंडप से तुम अनन्या कपूर नहीं, बल्कि मिसेज अनन्या विक्रम सिंघानिया बनकर निकलोगी। लेकिन याद रखना मिस कपूर... सिंघानिया के साथ सौदे महंगे पड़ते हैं।"

अनन्या ने दृढ़ता से कहा, "मुझे सौदेबाजी बखूबी आती है, मिस्टर सिंघानिया। चलिए मंडप की तरफ!"

पूरे मैरिज हॉल में सन्नाटा इतना गहरा था कि लोगों के दिल की धड़कनें साफ सुनी जा सकती थीं। विक्रम सिंघानिया ने अपनी जेब से एक स्लीक, ग्रे रंग का लैपटॉप निकाला और उसे टेबल पर रख दिया। यह उसका पर्सनल वर्क स्टेशन था, जिसे वह हमेशा अपने साथ रखता था।

"तुम्हारे पास सिर्फ पंद्रह मिनट हैं, मिस कपूर," विक्रम ने अपनी घड़ी की ओर देखते हुए कहा। "अगर तुम 'प्रोजेक्ट X' के उस एन्क्रिप्शन एरर (Encryption Error) को बाईपास कर पाईं, तो यह शादी होगी। वरना, तुम्हें और तुम्हारे परिवार को इस अपमान के साथ जीना होगा।"

अनन्या ने एक गहरी सांस ली। उसने अपने भारी लहंगे की आस्तीन को थोड़ा ऊपर चढ़ाया और कीबोर्ड पर अपनी उंगलियां रख दीं। उसके चारों तरफ लोग जमा हो गए थे—उसके पिता डर और उम्मीद के साथ देख रहे थे, जबकि रिश्तेदार मन ही मन अनन्या की हार की दुआ मांग रहे थे।

अनन्या की उंगलियां कीबोर्ड पर बिजली की रफ्तार से चलने लगीं। कोड की हजारों लाइनें स्क्रीन पर दौड़ रही थीं। वह एक 'मल्टी-टैलेंटेड जीनियस' थी, और यह उसके लिए सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि उसकी गरिमा की लड़ाई थी।

विक्रम उसे गौर से देख रहा था। उसने आज तक कई प्रोफेशनल्स देखे थे, लेकिन एक दुल्हन के लिबास में, माथे पर बिंदिया और हाथों में भारी चूड़ियां पहने हुए किसी लड़की को इतनी महारत के साथ जटिल कोडिंग करते देखना उसके लिए बिल्कुल नया अनुभव था।

ठीक बारहवें मिनट पर, अनन्या ने 'Enter' दबाया। स्क्रीन पर एक हरा सिग्नल चमका—"Access Granted. Bug Fixed."

विक्रम के चेहरे पर पहली बार एक गहरी प्रशंसा का भाव आया। उसने अपनी कुर्सी पीछे की और खड़ा हो गया। "इम्प्रेसिव। बहुत इम्प्रेसिव।"

उसने अपना हाथ अनन्या की ओर बढ़ाया और ऊँची आवाज़ में बोला, जिसे पूरा हॉल सुन सके—"पंडित जी, रस्में शुरू कीजिए। सिंघानिया खानदान की बहू तैयार है।"

मचा हुआ कोहराम अचानक तालियों और फुसफुसाहट में बदल गया। रोहन के पिता, जो अभी तक अपनी हार पर मजे ले रहे थे, चुपके से वहां से खिसकने लगे। लेकिन विक्रम की नज़र उन पर पड़ गई।

"रुको!" विक्रम की आवाज़ किसी गरजते शेर जैसी थी। "रोहन के पिता से कहो कि अपने बेटे को बता दें... उसने आज सिर्फ एक लड़की को नहीं छोड़ा, बल्कि सिंघानिया ग्रुप की दुश्मनी मोल ली है। और कल सुबह तक कपूर इंडस्ट्रीज पर जो भी कर्ज था, वह अब सिंघानिया कॉर्पोरेशन का है। कोई भी उनके परिवार की तरफ आंख उठाकर नहीं देखेगा।"

अनन्या के पिता की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अनन्या ने विक्रम की ओर देखा। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक 'कॉन्ट्रैक्ट' है, लेकिन इस मर्द ने एक पल में उसे वह सुरक्षा दे दी थी जिसकी उसे सबसे ज्यादा ज़रूरत थी।

दोनों मंडप की ओर बढ़े। पंडित जी ने मंत्र पढ़ना शुरू किया। अनन्या और विक्रम एक-दूसरे के आमने-सामने बैठे। जब अग्नि के फेरे शुरू हुए, तो अनन्या को महसूस हुआ कि यह सिर्फ आग नहीं, बल्कि उसकी पुरानी ज़िंदगी का अंत और एक रहस्यमयी भविष्य की शुरुआत थी।

जब विक्रम ने अनन्या की मांग में सिंदूर भरा और उसके गले में मंगलसूत्र बांधा, तो अनन्या के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। विक्रम का हाथ ठंडा था, लेकिन उसकी पकड़ बहुत मज़बूत थी।

"अब तुम मेरी पत्नी हो, अनन्या," विक्रम ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा। "लेकिन याद रखना, यह सौदा है। मेरे घर में मेरे नियम चलेंगे।"

अनन्या ने उसकी आँखों में आँखें डालकर जवाब दिया, "और मेरे टैलेंट के बिना आपके नियम अधूरे रहेंगे, मिस्टर सिंघानिया।"

शादी संपन्न हुई। वह लड़की जो कुछ घंटों पहले एक 'अभागी' दुल्हन मानी जा रही थी, अब भारत के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य की मालकिन बन चुकी थी।

विदाई का वक्त आ चुका था। कपूर खानदान का वह घर, जहाँ कुछ देर पहले मातम जैसा माहौल था, अब वहां की हवाओं में एक अजीब सी खामोशी और हैरानी घुली हुई थी। फूलों से सजी लग्जरी 'रॉल्स रॉयस' गाड़ी दरवाजे पर खड़ी थी।

अनन्या ने अपने पिता के गले लगकर उन्हें सांत्वना दी। मिस्टर कपूर की आँखों में गर्व और चिंता का मिला-जुला भाव था। उन्होंने धीरे से अनन्या के कान में कहा, "बेटा, तूने आज मुझे डूबने से बचा लिया, लेकिन विक्रम सिंघानिया... वह एक दरिया नहीं, समंदर है। खुद को संभाल कर रखना।"

अनन्या ने मुस्कुराते हुए अपने पिता का हाथ थाम लिया। "फिक्र मत कीजिए पापा, मैं अब एक 'जीनियस' के साथ-साथ एक 'सिंघानिया' भी हूँ।"

विक्रम पहले ही गाड़ी के पिछले हिस्से में बैठ चुका था। वह अभी भी अपने फोन पर कुछ बिजनेस ईमेल्स चेक कर रहा था, जैसे कि उसने अभी-अभी कोई बड़ी शादी नहीं, बल्कि कोई साधारण मीटिंग खत्म की हो। अनन्या गाड़ी में बैठी, तो उसकी भारी रेशमी साड़ी विक्रम के जूतों को छू गई। विक्रम ने एक पल के लिए अपनी नज़रें फोन से हटाईं और अनन्या को देखा, फिर दोबारा काम में लग गया।

पूरी रास्त खामोशी छाई रही। शहर की चकाचौंध को पार करते हुए गाड़ी एक विशाल पहाड़ी के ऊपर बने एक भव्य महल नुमा गेट के सामने रुकी। गेट पर बड़े अक्षरों में लिखा था—'सिंघानिया मैंशन'।

महल के अंदर कदम रखते ही अनन्या की सांसें थम गईं। सफेद संगमरमर, ऊँचे झूमर और दीवारों पर लगी महंगी पेंटिंग्स... यह जगह किसी आलीशान जेल से कम नहीं लग रही थी। नौकरों की एक लंबी कतार स्वागत के लिए खड़ी थी।

विक्रम बिना रुके सीधे अंदर जाने लगा। वह हॉल के बीचों-बीच रुका और पीछे मुड़कर अनन्या को देखा। "यह तुम्हारा घर नहीं, मेरा साम्राज्य है। यहाँ सब कुछ एक सिस्टम से चलता है। तुम्हारी जरूरतें पूरी की जाएंगी, लेकिन मेरी प्राइवेसी में दखल देना तुम्हारी पहली और आखिरी गलती होगी।"

अनन्या ने अपना भारी पल्लू ठीक किया और शांति से जवाब दिया, "मुझे आपकी प्राइवेसी से ज्यादा आपके 'सर्वर' में दिलचस्पी है, मिस्टर सिंघानिया। और जहाँ तक नियमों की बात है, एक जीनियस अपने नियम खुद बनाना जानती है।"

विक्रम की आँखों में एक हल्की सी चमक आई, जिसे वह फौरन छिपा गया। "ऊपर बाएं हाथ वाला कमरा तुम्हारा है। आराम करो। कल सुबह 9 बजे मुझे डाइनिंग टेबल पर मिलो। हमें उस 'प्रोजेक्ट X' के बारे में बात करनी है जिसे तुमने फिक्स किया था।"

जैसे ही विक्रम अपने कमरे की ओर बढ़ा, अनन्या ने गहरी सांस ली। उसने अपने कमरे की खिड़की से बाहर देखा—आसमान में चाँद चमक रहा था, लेकिन उसके नीचे एक अनजाना रिश्ता अपनी जड़ें जमा रहा था। वह जानती थी कि यह सिर्फ एक कॉन्ट्रैक्ट नहीं है, यह एक ऐसी शतरंज की बिसात है जहाँ हर चाल सोच-समझकर चलनी होगी।

उसने अपने हाथ की वह अंगूठी देखी जो विक्रम ने उसे पहनाई थी। यह शादी एक धोखे से शुरू हुई थी, एक सौदे पर टिकी थी, लेकिन क्या यह कभी दिल तक पहुँच पाएगी? यह तो वक्त ही बताएगा।

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