एल्डोरिया की हवाओं में आज उत्सव की सुगंध नहीं, बल्कि बारूद और जलते हुए मांस की तीखी गंध घुली हुई थी। वह जेल, जिसकी दीवारों को अभेद्य माना जाता था, आज एक मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी थी। मशालों की फड़फड़ाती रोशनी में हर तरफ सिपाही जमीन पर बेजान पड़े थे। वह कालकोठरी, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता था, अब एक भयानक सन्नाटे की आगोश में थी—एक ऐसा सन्नाटा जो किसी आने वाले बड़े तूफान की मुनादी कर रहा था।
मलिक आजाद हो चुका था। यह खबर सूर्य नगरी में किसी महामारी की तरह फैल गई। जो शहर अब तक अपने नए 'गोल्डन नाइट' के जश्न में डूबा था, आज वहाँ दहशत का पहरा था। गलियों में सन्नाटा था और लोगों की आँखों में सिर्फ एक ही सवाल:
"वह गद्दार बाहर कैसे आया? और वह किस सच की बात कर रहा है?"
जेल के भीतर, कायलेन का सुनहरा कवच मशालों की आग को परावर्तित (reflect) कर रहा था, जिससे वह किसी जलते हुए अंगारे जैसा दिख रहा था। पास ही, लारा घुटनों के बल बैठकर जमीन पर पड़े सैनिकों की नब्ज टटोल रही थी। उसकी उंगलियां खून से सन चुकी थीं।
"कोई भी जिंदा नहीं बचा, कायलेन..."
लारा की आवाज में वह कँपकँपी थी जिसे उसने छुपाने की बहुत कोशिश की, पर नाकाम रही।
कायलेन की मुट्ठियाँ भिंच गईं। उसने चारों ओर देखा। तबाही का मंजर किसी एक इंसान के बस की बात नहीं थी
"यह अकेला मलिक नहीं कर सकता, लारा। मैंने उसके साथ कुछ नकाबपोश देखे थे। जरूर वेलरिस के वे बचे-कुचे लोग होंगे जो आज भी उस हार का बदला लेना चाहते हैं।"
तभी मलबे के नीचे से एक कमजोर हलचल हुई। एक कटा हुआ, खून से लथपथ हाथ पत्थर के नीचे से बाहर निकला। कायलेन बिजली की फुर्ती से उस ओर लपका और भारी पत्थर को हटाकर एक घायल सैनिक को बाहर निकाला। सैनिक की आँखों में मौत का साया साफ दिख रहा था।
उसने कायलेन के सुनहरे कवच को थामने की कोशिश की और कराहते हुए फुसफुसाया,
"मलिक... मलिक ने मुझसे कहा था... कि गोल्डन नाइट बनना... एक सुनहरे पिंजरे में फँसने जैसा है... जिसमें तुम्हारी वफादारी को गद्दारी बना दिया जाता है"
इतना कहते ही उसकी गर्दन एक तरफ लुढ़क गई। उसकी आखिरी सांस भी हवा में विलीन हो गई।
तभी घोड़ों के टापों की आवाज आई। राजा अलरिक अपने अंगरक्षकों के साथ वहाँ पहुँचे। जेल की हालत देख उनके माथे पर बल पड़ गए। उन्होंने कायलेन के कंधे पर हाथ रखा और भारी स्वर में कहा,
"कायलेन, विचलित मत हो। मलिक आखिर भागकर जाएगा कहाँ? हम उसे फिर से सलाखों के पीछे पहुँचा देंगे। अभी तुम आराम करो, हम यह मामला कल सुबह देखेंगे।"
लेकिन कायलेन की आँखों में प्रतिशोध की ज्वाला थी।
"महाराज, हमारा सबसे बड़ा दुश्मन, जिसने दस साल पहले गद्दारी की थी, वह आजाद है। मैं चैन से नहीं बैठ सकता। मैं उसे पाताल से भी ढूँढ निकालूँगा।"
अगली सुबह, सूर्य नगरी के रणनीतिक कक्ष (War Room) में भारी तनाव था। राजा अलरिक ने कायलेन, लारा और अपने खास मंत्रियों को बुलाया था।
लारा ने नक्शे पर नजर डालते हुए कहा,
"महाराज, मलिक के भागने की खबर से प्रजा डरी हुई है। हमें तुरंत कोई ठोस कदम उठाना होगा।"
राजा ने एक पुराने, धूल भरे नक्शे पर वेलरिस की सीमाओं के पास एक निशान लगाया।
"मलिक ने वेलरिस की पुरानी सरहदों के पास अपना ठिकाना बनाया है। गुप्तचरों की मानें तो वह वहाँ से एक बड़े हमले की योजना बना रहा है। कायलेन, लारा... तुम अपनी सबसे कुशल टुकड़ी लेकर निकलो। मुझे मलिक का सिर चाहिए, चाहे उसके लिए मुझे पूरा जंगल ही क्यों न फूंकना पड़े!"
राजा का आदेश मिलते ही कायलेन और लारा ने पास में रखीं अपनी तलवारें म्यान में डालीं और घोड़ों पर सवार होकर धूल उड़ाते हुए निकल पड़े।
दोपहर ढलते-ढलते वे उस घने और मनहूस जंगल में दाखिल हुए जो कभी वेलरिस साम्राज्य का हृदय हुआ करता था। दस साल पहले यह इलाका खुशहाल था, पर अब यहाँ सिर्फ कंटीली झाड़ियाँ और खंडहरों के अवशेष थे। हवा यहाँ भारी महसूस होती थी, जैसे अतीत की चीखें आज भी यहाँ दफन हों।
कायलेन आगे बढ़ रहा था कि अचानक उसकी नजर सड़क किनारे टूटे हुए एक रथ पर पड़ी। उसने तुरंत लगाम खींची।
"यह तो हमारे शाही रसद (supplies) का रथ है!"
लारा ने अपनी तलवार निकाल ली।
रथ के चारों ओर संघर्ष के गहरे निशान थे—टूटी हुई लकड़ियाँ, बिखरा हुआ अनाज—लेकिन ताज्जुब की बात यह थी कि वहाँ एक भी लाश नहीं थी। तभी पास की झाड़ियों में सरसराहट हुई।
"बाहर आओ!"
कायलेन की दहाड़ जंगल के सन्नाटे को चीर गई।
एक घायल सैनिक, जिसके कपड़े तार-तार थे, रेंगते हुए बाहर आया। उसके हाथ में खून से सना एक खत था। लारा ने वह खत लिया और जोर से पढ़ा:
"मुझे पता था तुम यहाँ जरूर आओगे, 'गोल्डन नाइट'। अगर तुम्हें मुझे पकड़ना है और उस सच का सामना करना है, तो आज शाम तक पहाड़ की चोटी वाली गुफा में पहुँच जाना।"
लारा ने खत को मुट्ठी में भींच लिया।
"कायलेन, यह साफ तौर पर एक जाल है। वह तुम्हें उकसा रहा है। हमें अकेले नहीं जाना चाहिए।"
कायलेन की आँखें अंगारे की तरह जल रही थीं।
"जाल हो या हकीकत, लारा, मुझे फर्क नहीं पड़ता। उसने मेरे सिपाहियों का अपमान किया है। अगर वह मुझे बुला रहा है, तो मैं उसे निराश नहीं करूँगा।"
लारा ने उसकी जिद देखी तो समझ गई कि इसे रोकना नामुमकिन है।
"तो फिर मैं भी तुम्हारे साथ आऊँगी। तुम अकेले उस शैतान का सामना नहीं करोगे।"
शाम की धुंधलके में गुफा का मुहाना किसी दानव के खुले हुए मुँह जैसा लग रहा था। कायलेन ने अपनी सेना और लारा को बाहर ही रुकने का आदेश दिया और मशाल लेकर अकेले अंदर कदम रखा
अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था। दीवारों पर खून से अजीबोगरीब निशान बने थे। गुफा के बीचों-बीच एक साया खड़ा था, जिसकी पीठ कायलेन की तरफ थी। वह मलिक था। उसके बदन पर वही फटे हुए कैदी के कपड़े थे, लेकिन उसके हाथ में एक विशाल काली तलवार थी जो मशाल की रोशनी को सोख रही थी।
"आखिरकार... एल्डोरिया का नया खिलौना आ ही गया,"
मलिक की आवाज पत्थरों से टकराकर गूँजी।
"मलिक! अपनी बकवास बंद करो और आत्मसमर्पण कर दो!"
कायलेन ने अपनी सुनहरी तलवार तान दी।
"तुमने निहत्थे लोगों को क्यों मारा? तुम एल्डोरिया के खून के प्यासे क्यों हो गए हो?"
मलिक धीरे से मुड़ा। उसकी एक आँख पर पुराना गहरा जख्म था और उसकी दूसरी आँख में ऐसी नफरत थी जो किसी की भी रूह कँपा दे।
"निहत्थे? कायलेन, तुम्हें सचमुच लगता है कि जो तुम देख रहे हो, वही सच है? उन लोगों ने मेरे परिवार को राख में मिला दिया, पूरे वेलरिस को मिटा दिया और तुम उन्हें मासूम कहते हो?"
उसने अपनी काली तलवार कायलेन की ओर तानी।
"एल्डोरिया ने वेलरिस पर हमला किया था, कायलेन। भुखमरी का बहाना तो सिर्फ एक पर्दा था!"
कायलेन ने दांत पीसते हुए प्रहार किया,
"झूठ! वेलरिस हम पर हमला करने वाला था, महाराज ने हमें बचाया था!"
दोनों की तलवारें आपस में टकराईं और गुफा में चिंगारियां फूट पड़ीं। मलिक पीछे हटा और जोर से हँसा,
"अरे हाँ! मैं तो भूल ही गया था कि तुम तो बस एक कठपुतली हो। तुम्हें सच का पता ही कहाँ है? तुम तो बस वही देख रहे हो जो तुम्हें दिखाया जा रहा है।"
दोनों के बीच तलवारों का खूनी खेल शुरू हो गया। कायलेन ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक जोरदार वार किया, जिससे मलिक के कंधे पर गहरा जख्म हुआ। लेकिन मलिक ने हार नहीं मानी। उसने मुस्कुराते हुए अपनी जेब से एक धुआँ छोड़ने वाला बम जमीन पर पटका।
"वक्त आने पर तुम्हें सब पता चल जाएगा, गोल्डन नाइट..."
धुएँ के गुबार के पीछे से मलिक की परछाईं धुंधली होने लगी।
"अभी तो बहुत कुछ देखना बाकी है। अगली बार जब हम मिलेंगे, तो तुम्हारी यह सुनहरी चमक तुम्हें खुद चुभने लगेगी।"
जब धुआँ छँटा, मलिक गायब था। कायलेन ने गुफा के कोने में देखा—वहाँ कुछ फटे हुए कपड़े पड़े थे जिन पर वेल्रिस की शाही मुहर लगी थी, लेकिन वे खून से सने थे।
पहाड़ के ऊपर, आग के पास बैठा कायलेन अपनी तलवार को देख रहा था। लारा उसके घाव पर पट्टी बाँध रही थी।
"क्या उसने कुछ कहा?"
लारा ने धीमे से पूछा।
कायलेन खामोश रहा। मलिक के शब्द उसके दिमाग में ज़हर की तरह दौड़ रहे थे। वो बस मुझे भटकना चाहता है, वो चाहता है कि एल्डोरिया की सबसे बड़ी ढाल कमजोर पड़ जाए।
तभी, दूर क्षितिज पर एक भयानक चीख सुनाई दी। पहाड़ के दूसरी तरफ बसे एक छोटे से गाँव से आग की लपटें उठ रही थीं।
"मलिक!"
कायलेन गुस्से में खड़ा हो गया।
"वह अब निर्दोष गाँव वालों को निशाना बना रहा है! वह एक जानवर बन चुका है।"
बिना सोचे-समझे, कायलेन अपने घोड़े पर कूदा और उस जलते हुए गाँव की तरफ दौड़ पड़ा। उसके दिल में सिर्फ एक ही लक्ष्य था—मलिक का अंत।
लेकिन वह यह नहीं देख पा रहा था कि उसका गुस्सा उसे उस रास्ते पर ले जा रहा है जहाँ से वापसी का कोई दरवाजा नहीं खुलता। क्या वह बुराई को खत्म कर रहा था, या अनजाने में उसी 'झूठ की दीवार' को और नीचा कर रहा था?
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