कुछ मुलाक़ातें किस्मत लिखती हैं, लेकिन उनका अंत इंसान कभी नहीं लिख पाता।
वाराणसी की गलियों में शुरू हुई एक मासूम-सी मुलाक़ात, धीरे-धीरे पाँच ज़िंदगियों की सबसे बड़ी कहानी बन जाती है।
निशांत, एक साधारण लड़का जो संगीत में अपना भविष्य तलाश रहा है।
काशी, जिसकी मुस्कान में सुकून था, लेकिन आँखों में एक अनकहा दर्द।
मिशा, मयूर और प्रियेष—ये पाँचों दोस्त थे, लेकिन एक रात सब कुछ बदल गया।
काशी की मौत के बाद दोस्ती नफ़रत में बदल जाती है। रिश्ते टूट जाते हैं, भरोसा बिखर जाता है और हर किसी के पास अपनी-अपनी सच्चाई होती है।
क्या काशी की मौत सिर्फ़ एक हादसा थी... या उसके पीछे कोई ऐसा राज़ था जिसने पाँच ज़िंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया?
"काशी – एक याद" सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि दोस्ती, संगीत, यादों, अधूरे रिश्तों और उन सवालों की कहानी है, जिनके जवाब कभी आसान नहीं होते।
कभी-कभी इंसान चला जाता है... लेकिन उसकी याद पूरी ज़िंदगी साथ चलती है।
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