शुरुआत

एपिसोड दो: रहस्यमयी आगमन और चार शक्तियों की शुरुआत



(संगीत: कोमल, गूढ. झरने की आवाज, हल्की चिडियों की चहचहाहट. )

यह एक शांत, हरा- भरा नीला ग्रह है.

सुबह की पहली किरणें घने पत्तों को चीरती हुई नीचे गिर रही हैं.

हवा में ताजी मिट्टी और रात भर की ओस की ठंडी महक घुली हुई है.

हर साँस के साथ एक सुकून भीतर उतरता है.

मानो यह जगह किसी भी खतरे से कोसों दूर हो.

लेकिन.

क्या सच में यह शांति हमेशा रहने वाली है?

या यह सिर्फ तूफान से पहले की खामोशी है?



सामने, दो ऊँची पहाडियों के बीच एक विशाल झरना गिर रहा है.

श्वेत, झागदार जलधाराएँ पत्थरों से टकराकर एक मधुर, निरंतर संगीत बना रही हैं.

पानी की हल्की फुहारें हवा में तैरती हैं.

जो त्वचा को छूकर एक ठंडी लहर सी छोड जाती हैं.

पेडों की पत्तियाँ धीमे- धीमे हिल रही हैं.

और पूरा जंगल एक गहरी, शांत लय में साँस ले रहा है.

लेकिन तभी—

(संगीत में अचानक गहरा कंपन जुडता है. )

आसमान में एक अजीब सी सरसराहट गूँजती है.

पहले धीमी.

फिर तेज.

और फिर बेचैन कर देने वाली.

यह आवाज कहाँ से आ रही है?



ऊपर. बहुत ऊपर.

अंतरिक्ष की गहराइयों से एक धातुई पॉड तेजी से नीचे गिर रहा है.

उसकी रफ्तार इतनी तेज है कि वायुमंडल से टकराते ही वह लाल आग की चमक में घिर जाता है.

उसके पीछे जलते हुए कणों की एक लंबी, धुएँदार लकीर बनती जाती है.

वह सीधे इस शांत जंगल की ओर बढ रहा है.

क्या यह कोई दुर्घटना है?

या किसी बडी योजना का हिस्सा?



झरने के किनारे.

एक बूढा इंसान ध्यान में बैठा है.

सफेद बाल. शांत चेहरा. स्थिर साँसें.

मानो वह इस संसार से परे हो.

उसे दुनिया की कोई खबर नहीं.

लेकिन अचानक—

(ध्वनि: हल्की कंपन. )

जमीन काँपती है.

उसकी आँखें धीरे- धीरे खुलती हैं.

उन आँखों में गहराई है.

अनुभव है.

और एक अजीब सा आने वाले खतरे का आभास.



आकाश में एक तीव्र सफेद रोशनी चमकती है.

यह सिर्फ रोशनी नहीं.

यह शुद्ध ऊर्जा है. कुछ असामान्य. कुछ खतरनाक.

बूढा इंसान तुरंत उठ खडा होता है.

उसकी उम्र भले ही अधिक हो.

लेकिन उसके कदमों में अभी भी तेजी है.

वह उस रोशनी की दिशा में दौड पडता है.

सूखी पत्तियाँ उसके पैरों के नीचे चरमराती हैं.

हवा उसके बालों को पीछे उडा रही है.

आखिर वह क्या देखने जा रहा है?



(ध्वनि: गगनभेदी धमाका — BOOM! )

अचानक एक भयानक विस्फोट होता है.

जंगल काँप उठता है.

पक्षी डरकर आसमान में उड जाते हैं.

हवा में अब जली हुई मिट्टी, धुएँ और गरम धातु की गंध भर जाती है.

जहाँ कुछ देर पहले हरियाली थी.

अब वहाँ धूल का एक विशाल गुबार उठ रहा है.



बूढा उस जगह पहुँचता है.

उसका नाम है—भूषण.

वह धीरे- धीरे उस धूल को चीरता हुआ आगे बढता है.

उसकी साँसें भारी हो रही हैं.

लेकिन उसकी नजरें उस चीज को ढूँढ रही हैं.

जो अभी- अभी आसमान से गिरी है.



और फिर—

उसे दिखता है.

एक गोल, धातु का पॉड.

जो जमीन में धँसा हुआ है.

उसकी सतह लाल गर्म है.

और उससे हल्का धुआँ उठ रहा है.

आखिर इस पॉड के अंदर क्या छिपा है?



तभी—

(ध्वनि: सी. सस. )

पॉड का दरवाजा धीरे- धीरे खुलता है.

गरम भाप बाहर निकलती है.

भूषण झुककर अंदर देखता है.

और एक पल के लिए उसकी साँस थम जाती है.



अंदर चार बच्चे हैं.

तीन लडके. और एक छोटी बच्ची.

उनके चेहरे शांत हैं.

मानो वे गहरी नींद में हों.

उनके शरीर के चारों ओर हल्की चमक है.



भूषण के मन में सवाल उठते हैं—

ये बच्चे कौन हैं?

इन्हें यहाँ किसने भेजा?

और क्यों?



वह तुरंत फैसला करता है—

इन्हें यहाँ छोडना सुरक्षित नहीं.

वह एक- एक करके बच्चों को उठाता है.

उसके हाथों में कठोरता नहीं.

बल्कि एक अजीब सा अपनापन है.



वह उन्हें अपनी पुरानी पत्थर की कोठी में ले जाता है.

(ध्वनि: लकडी की आग की आवाज. )

कमरे में हल्की गर्मी है.

लकडी की महक फैली है.



कुछ देर बाद.

चारों बच्चे धीरे- धीरे अपनी आँखें खोलते हैं.

उनकी नजर भूषण पर पडती है.

और उनके चेहरे पर एक मासूम मुस्कान आ जाती है.

क्या उन्हें पहले से पता था कि वे सुरक्षित हैं?



भूषण मुस्कुराते हुए कहता है—

मैं भूषण हूँ. तुम मुझे दादाजी कह सकते हो.

जब बच्चे अपने नाम नहीं बता पाते.

तो वह खुद उनके नाम रखता है—

तुम. विद्युत.

तुम चट्टान.

तुम तेज.

और तुम. सिद्धिमा.



बच्चों की आँखें चमक उठती हैं.

मानो उन्हें अपनी पहचान मिल गई हो.

क्या यही नाम आगे चलकर इतिहास बनाएँगे?



समय बीतता है — आठ साल बाद

(संगीत: ऊर्जा से भरी हल्की धुन. )

अब ये बच्चे बडे हो चुके हैं.

उनकी हँसी जंगल में गूँजती है.

उनकी गति. उनकी शक्ति. अब सामान्य नहीं रही.



एक दिन.

तेज नदी किनारे बैठा है.

पानी की लहरें शांत हैं.

तभी—

(ध्वनि: टहनी टूटने की आवाज. )

एक विशाल अजगर उस पर हमला करता है!

तेज घबरा जाता है—

लेकिन.

अजगर अचानक हवा में रुक जाता है!



यह कैसे संभव है?



विद्युत सामने आता है.

उसकी आँखों में ऊर्जा चमक रही है.

वह अजगर को पकडकर तेजी से घुमाता है.

और दूर फेंक देता है.



अजगर फिर हमला करता है.

तभी चट्टान आगे बढता है.

और एक शक्तिशाली वार करता है.

अजगर जमीन पर गिर जाता है.



दूर खडी सिद्धिमा यह सब देख लेती है.

वह दौडकर दादाजी के पास जाती है.



भूषण गुस्से में आ जाते हैं—

तुम लोग अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल कर रहे हो!

उनकी आवाज गूँज उठती है.

आज रात तुम घर के अंदर नहीं आओगे!



क्या यह सिर्फ सजा है?

या इसके पीछे कोई गहरी वजह छिपी है?



रात का सन्नाटा

ठंडी हवा बह रही है.

तीनों भाई बाहर बैठे हैं.

सिद्धिमा चुपके से खाना लेकर आती है.

भैया. माफ कर दो.

कुछ पल की खामोशी.

फिर विद्युत नरम पडता है.



क्या यही उनका असली रिश्ता है.



अगली सुबह

तीनों ध्यान में बैठे हैं.

तभी एक चीख सुनाई देती है.



क्या उन्हें जाना चाहिए?

या दादाजी की बात माननी चाहिए?



विद्युत कहता है—

हम किसी को मुसीबत में नहीं छोड सकते.

तीनों दौड पडते हैं.



पहाडियों पर.

एक आदमी भेडिया- मानवों से घिरा है.



तीनों भाई पहुँचते हैं.

भेडिये हवा में रुक जाते हैं.

और फिर दूर फेंक दिए जाते हैं.



आदमी हैरान होकर कहता है—

क्या तुम लोग भी सुप्रीम टूर्नामेंट के लिए जा रहे हो?



यह सुप्रीम टूर्नामेंट क्या है?

और इसमें ऐसा क्या है जो हर शक्तिशाली व्यक्ति को खींच रहा है?



वह अपना नाम बताता है—प्राण.

और चला जाता है.



तीनों घर लौटते हैं.

विद्युत पूछता है—

दादाजी. क्या सच में सुप्रीम टूर्नामेंट है?

भूषण मुस्कुराते हैं—

हाँ. और वही तुम्हारी असली परीक्षा होगी.



सात साल बाद.

उनकी शक्ति अब अपने चरम पर है.

उनकी आँखों में आत्मविश्वास है.

उनके भीतर एक अज्ञात आग जल रही है.



और अब—

वह दिन आ गया है.



(संगीत: तेज उभार. फिर सन्नाटा. )

क्या ये चारों उस टूर्नामेंट में जीत पाएँगे?

क्या उनकी असली पहचान सामने आएगी?

और क्या उनके अतीत का रहस्य खुल जाएगा?



आगे जानने के लिए पढ़ते रहिए—

ब्रह्मांड के रक्षक”

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