छोटा योद्धा महरक्षक

छोटा योद्धा महरक्षक

इम्मोर्टल के अंत

* एपिसोड एक: ग्रह X का पतन और प्रतिशोध की उत्पत्ति"

ब्रह्मांड के अनंत विस्तार में, जहाँ आकाशगंगाएँ अपनी धुरी पर नाचती हैं, वहाँ एक ऐसा ग्रह स्थित था जिसे' प्लैनेट X' कहा जाता था. यह कोई साधारण पत्थर का गोला नहीं था, बल्कि दिव्य ऊर्जा और सुनहरी आभा से दमकता हुआ एक स्वर्ग था. यहाँ की मिट्टी में फौलाद की मजबूती थी और यहाँ की हवाओं में पराक्रम का संगीत बहता था.

इस ग्रह के निवासी' इम्मोर्टल स्पीशीज' (अमर प्रजाति) थे. प्लैनेट X की सबसे बडी विशेषता यह थी कि यहाँ जन्म लेने वाला हर बच्चा जन्म के पहले पल से ही एक पूर्ण योद्धा होता था. उनके नन्हे हाथों में इतनी ताकत होती थी कि वे लोहे की सलाखों को मोड दें, लेकिन प्रकृति का एक विचित्र नियम था—इन योद्धाओं को बोलना नहीं आता था. उनकी आवाज उनके शस्त्रों की खनक और उनकी आँखों के तेज में छिपी थी.

इसी महान साम्राज्य के अधिपति थे* किंग वारडोक* वारडोक केवल एक राजा नहीं, बल्कि शक्ति का साक्षात अवतार थे. कहा जाता था कि वारडोक का एक प्रहार चंद्रमा के अस्तित्व को धूल में मिला सकता था. उनकी पत्नी, रानी जानवी* ममता और युद्ध- कौशल का अनूठा संगम थीं. उनके चार अनमोल रत्न थे—* विद्युत, चट्टान, तेज और सिद्धीमा* ये चारों प्लैनेट X के राजकुमार और राजकुमारी थे.



किंग वारडोक के महल के विशाल प्रांगण में चारों बच्चे खेल रहे थे. उनकी उम्र भले ही कम थी, लेकिन उनकी शरारतें किसी विनाशकारी तूफान से कम नहीं थीं. विद्युत, जो सबसे बडा था, महल की ऊँची मीनारों के बीच बिजली की गति से दौडता था. वह जब भी जमीन पर पैर रखता, संगमरमर का फर्श चटक जाता. चट्टान, अपनी उम्र से कई गुना भारी पत्थरों को खिलौनों की तरह हवा में उछाल रहा था. वह हँसता (बिना आवाज के) और जब पत्थर नीचे गिरते, तो पूरे महल में भूकंप के झटके महसूस होते.

तेज और सिद्धीमा आपस में द्वंद्व युद्ध का अभ्यास कर रहे थे. सिद्धीमा की चपलता ऐसी थी कि वह हवा के झोंकों को काट सकती थी, जबकि तेज अपनी मुट्ठियों से ऐसी ऊर्जा पैदा कर रहा था जो छोटे- छोटे उल्कापिंडों को पिघला दे. जानवी उन्हें बालकनी से देख रही थीं. अचानक, विद्युत ने मस्ती- मस्ती में एक ऊँची छलांग लगाई और बादलों को चीरते हुए वायुमंडल के ऊपरी स्तर तक पहुँच गया. वारडोक ने उसे देख लिया. वे मुस्कुराए और अपनी जगह से हिले बिना, केवल अपनी उंगली के एक इशारे से गुरुत्वाकर्षण को ऐसे मोडा कि विद्युत धीरे से नीचे उतर आया.

वे चारों बच्चे वारडोक से लिपट गए. वारडोक ने उन्हें अपनी विशाल बाहों में भर लिया. उस पल, प्लैनेट X पर सिर्फ खुशियाँ थीं. वे बच्चे अपनी बेपनाह ताकत से बेखबर थे. वे नहीं जानते थे कि उनकी एक छोटी सी हंसी भी ब्रह्मांड के संतुलन को हिला सकती थी. जानवी ने उन सबके माथे चूमे. उस सुनहरी शाम में, उनकी मस्ती इतनी' आउट ऑफ कंट्रोल' थी कि महल के बगीचे के पेड उनकी ऊर्जा से खुद- ब- खुद चमकने लगे थे. लेकिन इस स्वर्ग के ऊपर काल के साये मंडरा रहे थे.

प्लैनेट X की इस बढती शक्ति ने तीन ब्रह्मांडीय शक्तियों (Prime Gods) के सिंहासन हिला दिए थे.

एक. अभय (Abhay): विनाश का देवता (God of Destroyer), जिसका अहंकार सूर्य से भी बडा था.

दो. विरे (Viray): सृजन का देवता (God of Creation), जो अपनी रचनाओं पर पूर्ण नियंत्रण चाहता था.

तीन. मोरगेना (Morgena): समय और आयाम की देवी (God of Time and Dimension), जो भविष्य की धुंध में देख सकती थी.

इन तीनों के मन में जलन और डर का जहर घुल चुका था. अभय ने गरजते हुए कहा, ये प्लैनेट X के निवासी. ये कीडे अब हमारी बराबरी करने लगे हैं. अगर इनकी ताकत इसी तरह बढती रही, तो एक दिन ये हमें अपने पैरों की धूल समझेंगे! विरे ने शांत स्वर में कहा, सम्मान डर से पैदा होता है, और वे हमसे डरना छोड चुके हैं। मोरगेना ने अपनी रहस्यमयी आँखों से देखा, वह समय दूर नहीं जब वारडोक के ये बच्चे हमारे तख्त छीन लेंगे. हमें इनका अंत करना होगा।

उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद डेमी- गोड, जहीरा* को चुना. जहीरा एक छोटी आकाशगंगा के रक्षक थे और वारडोक के सबसे पुराने दोस्त भी. लेकिन देवताओं के हुक्म के आगे दोस्ती की कोई कीमत नहीं थी. जहीरा को भारी मन से प्लैनेट X की तबाही का फरमान सुनाया गया.



जहीरा जब प्लैनेट X पहुँचे, तो वारडोक ने बाहें फैलाकर अपने दोस्त का स्वागत किया. जहीरा का दिल हजार टुकडों में टूट रहा था. कैसे वह उस हाथ को काट दे जिसने हमेशा उसे सहारा दिया था? लेकिन देवताओं का दबाव पहाड जैसा था.

माफ कर देना दोस्त. जहीरा ने रुँधे हुए गले से कहा. वारडोक चौंक गए, क्या हुआ जहीरा? तुम इतने उदास क्यों हो?

तभी जहीरा ने अपना हाथ उठाया. उसकी हथेली में अभय का दिया हुआ' डिस्ट्रॉयर बॉल' (Destroyer Ball) धधक रहा था. माफ कर देना वारडोक. मुझे हुक्म मिला है। वारडोक, जानवी और बच्चे पीछे हट गए. महल के सैनिक देवताओं के इस ऊर्जा के दबाव से घुटनों के बल नीचे गिर गए.

वारडोक ने शांत स्वर में पूछा, आखिर तुम ये क्यों कर रहे हो? जहीरा की आँखों से आंसू बह निकले, प्राइम देवताओं ने हुक्म दिया है. वे तुम सबको मिटाना चाहते हैं। वारडोक स्थिति समझ गए. उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चों की ओर देखा और फिर जहीरा से कहा, अगर यही विधाता की इच्छा है, तो ठीक है. तुम सिर्फ मुझे मार दो. मेरे जाते ही प्लैनेट X कमजोर पड जाएगा, देवताओं को कोई खतरा नहीं रहेगा. पर मेरे मासूम लोगों और बच्चों को छोड दो।

जहीरा का हाथ कांपने लगा. उसने चीखते हुए कहा, नहीं! मुझसे नहीं होगा! उसने ऊर्जा का गोला नीचे कर लिया और घुटनों के बल बैठकर रोने लगा. मैं इन चार बच्चों से उनके पिता को नहीं छीन सकता! वारडोक चिल्लाए, जहीरा! अपना काम करो! वरना प्राइम देवता तुम्हें भी नहीं छोडेंगे!

अचानक जहीरा का चेहरा डर से सफेद पड गया. उसने घडी की ओर देखा. नहीं वारडोक! यहाँ से भाग जाओ! जल्दी! देवताओं ने कहा था कि अगर मैंने दस मिनट में काम पूरा नहीं किया, तो वे सीधे प्लैनेट X के कोर (Core) में ब्लास्ट कर देंगे. अब सिर्फ एक मिनट बचा है! भागो!

वारडोक ने जानवी की आँखों में देखा. जानवी! बच्चों को लो और निकलो! जानवी रोने लगी, पर आपके बिना कैसे? वारडोक की आवाज बिजली की तरह गूँजी, जाओ! समय नहीं है! जानवी ने रोते हुए बच्चों को अपनी बाहों में लिया और अपनी दिव्य शक्ति से टेलिपोर्ट (Teleport) होकर दूर एक निर्जन चंद्रमा पर पहुँच गई.

इधर वारडोक पूरे ग्रह पर चेतावनी चिल्ला रहे थे, सब निकलो! ग्रह फटने वाला है! पर किसी को यकीन नहीं हुआ कि देवता उन्हें क्यों मारेंगे. उसी समय. एक ऐसा धमाका हुआ जिसने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया. प्लैनेट X का कोर फट गया. वारडोक की आँखों में उस धमाके की आखिरी चमक थी और अगले ही पल, वह सुनहरा ग्रह केवल मलबे और धूल के बादल में बदल गया.

दूर चंद्रमा पर खडी जानवी ने यह मंजर देखा. उसके मुँह से एक चीख निकलने वाली थी, पर उसने अपना हाथ मुँह पर रख लिया. उसकी सिसकियाँ शांत वातावरण में गूँज रही थीं. उसकी आँखों से आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी. गोद में चारों बच्चे भी अपने पिता और घर के खोने के दर्द में जोर- जोर से रो रहे थे.

तभी जहीरा वहां प्रकट हुए. वे बच गए थे, पर उनकी आत्मा मर चुकी थी. उसी समय आसमान फटा और अभय, विरे और मोरगेना वहां प्रकट हुए. अभय ने उपहास करते हुए कहा, देखा जहीरा? अगर तुम काम नहीं करोगे, तो हम करना जानते हैं. अच्छा हुआ तुम बच गए, क्योंकि तुम डेमी- गोड हो। उसने जानवी की ओर देखा, जो मलबे में छिपी थी. याद रखना, अगर इस प्रजाति का कोई भी जीव बचा, तो तुम्हारी खैर नहीं। इतना कहकर वे गायब हो गए.



जानवी की आँखें अब लाल हो चुकी थीं. आंसुओं की जगह अब प्रतिशोध की ज्वाला थी. एक पत्नी ने अपने पति को खोया था, एक माँ ने अपना घर. उसने ठान लिया कि अब रोने का समय नहीं, बल्कि उन देवताओं के घमंड को तोडने का समय है.

वह अपने चारों बच्चों को लेकर प्रकाश की गति (Lightyear speed) से ब्रह्मांड में उडने लगी. उसे एक सुरक्षित आश्रय चाहिए था. उडते- उडते उसकी नजर एक नीले ग्रह पर पडी—* पृथ्वी*

जैसे ही वह पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने वाली थी, उसे महसूस हुआ कि यहाँ का' फोर्स फील्ड' बहुत खतरनाक और प्रदूषित है. उसने तुरंत अपनी जादुई अंगूठी निकाली और एक सुरक्षा कवच (Pot) बनाया, जिसमें उसने चारों बच्चों को सुरक्षित रख दिया.

लेकिन जैसे ही वह वायुमंडल में दाखिल हुई, इंसानों ने उसे एक बाहरी खतरा समझा. जमीन से दर्जनों मिसाइलें उसकी ओर दागी गईं. जानवी ने खुद को ढाल बनाया. मिसाइलों के धमाकों ने जानवी को बुरी तरह घायल कर दिया. धमाके की तीव्रता इतनी थी कि बच्चों का वो सुरक्षा कवच उनसे अलग होकर दूर जा गिरा. उन धमाकों का बच्चों के कोमल दिमाग पर ऐसा असर पडा कि शायद उनकी याददाश्त हमेशा के लिए मिट गई.

जानवी लहूलुहान होकर एक तरफ गिरी और बच्चे दूसरी तरफ. उस योद्धा माँ की आँखों में आखिरी विचार था—* बदला. अभी शुरू हुआ है।

* क्या विद्युत, चट्टान, तेज और सिद्धीमा अपनी शक्तियों के साथ इंसानों के बीच बच पाएंगे?

* क्या जानवी जीवित है या उसने अपने बच्चों को बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया?

* और सबसे बडा सवाल—जब ये बच्चे बडे होंगे, तो क्या इन्हें अपना अतीत याद आएगा या ये खुद को साधारण इंसान समझेंगे?

आगे जानने के लिए सुनते रहिए, छोटा योद्धा महारक्षक"

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