उसकी उंगलियाँ मेरा हाथ पकड़े हुए थीं, लेकिन मैं जानती थी कि वह मेरी हथेली में छिपी घबराहट को महसूस कर रहा था। मैंने गहरी साँस ली, और उसने मेरी उंगलियों को हल्के से दबा दिया — एक चुप्पी में कहा गया वादा, जिसे मैं बिना शब्दों के समझ गई।
सामने का दरवाज़ा खुला, और मैनेजर ने हाथ जोड़कर हमारा स्वागत किया। उसके चेहरे पर चौड़ी मुस्कान थी, जैसे हम उसकी ज़िंदगी के सबसे अहम ग्राहक हों। वह हमें अंदर ले गया, हॉल की ओर इशारा करते हुए। बड़ा सा स्टेज पीछे की दीवार से लगा हुआ था, जहाँ हमें रिसेप्शन के दौरान बैठना था।
“यहाँ पे आप दोनों के लिए पूरी स्टेज सेट कर देंगे हम, फुल डेकोर फ्रेश फ्लावर्स से,” मैनेजर ने कहा, उसकी आवाज़ में उत्साह था।
मैंने अपना सिर हिलाया, लेकिन मेरी नज़र पहले से ही दीवारों के रंग पर टिकी हुई थी। “कोई भी ब्राइट कलर यूज़ मत करना, मुझे सब कुछ न्यूड में चाहिए।”
मैनेजर ने तुरंत अपनी नोटबुक में लिखा, सिर हिलाते हुए। “समझ गया मैडम, न्यूड टोन ही लेंगे। गार्डन साइड देखेंगे अब चलिए?”
मैंने एक्सांश की तरफ देखा। वह चुप था, मुझे निर्णय लेने दे रहा था। “एकांश, चलो।”
उसने मेरा हाथ हल्के से दबाया, मैनेजर को आगे बढ़ने का इशारा किया, और हम हॉल से गुज़रने लगे। उसकी आँखें क्रीम रंग की दीवारों पर ठहरीं, फिर वह झुककर मेरे कान में फुसफुसाया, उसकी साँस मेरी गर्दन को छूती हुई।
“तुमने जो डिज़ाइन प्लान बनाया है ना, वो बिल्कुल परफेक्ट है।”
मेरे होंठों पर मुस्कान आ गई, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा। मैंने बस अपनी उंगलियों को उसकी उंगलियों में और गहराई से फँसा दिया।
बगीचे में आते ही गर्म हवा का झोंका मेरे चेहरे से टकराया। हरी घास, दूर तक फैले पेड़, और उनके बीच से झाँकती धूप — यह जगह सुंदर थी। मैंने चारों तरफ देखा, कल्पना करते हुए कि रात के समय यह कैसा दिखेगा।
“गार्डन में गोल्डन लाइट्स यूज़ हो तो अच्छी लगेगी ना? नेचर के साथ रात को गोल्डन डेकोरेशन?”
मैनेजर ने फिर से लिखा, और एक्सांश ने मुझे अपनी तरफ खींच लिया, उसका हाथ मेरी कमर पर आ गया। “हाँ, गोल्डन लाइट्स नेचर के साथ बहुत अच्छी लगेंगी। तुमने बिल्कुल सही सोचा है।”
मैंने उसकी तरफ देखा। “और तुम्हें क्या ऐड करनी है एकांश?”
उसने चारों तरफ देखा, अपनी ठुड्डी को हाथ से रगड़ते हुए, फिर मेरी तरफ मुस्कुराया। “जो तुम कर रही हो वो परफेक्ट है। मुझे कोई और चीज़ ऐड नहीं करनी।”
मैंने मैनेजर की तरफ रुख किया। “ठीक है फिर। मैनेजर, सारा डेकोरेशन डिसेंट होना चाहिए। ऐसे कोई भी जगह ज्यादा लैविश नहीं होगा। बिल्कुल न्यूट्रल।”
मैनेजर ने सिर हिलाया, और फिर से नोटबुक में लिखा। “और अब चलिए केटरिंग के मेन्यू भी चेक कर लेते हैं, जी।”
मैंने आह भरी। “हाँ, वो तुम डिसाइड करना। खाने के बारे में मुझे ज्यादा आइडिया नहीं।”
एकांश ने सिर हिलाया, मैनेजर की तरफ देखते हुए। “मैं पहले से मेन्यू आपको ईमेल कर दिया था, वही फाइनल है। बस चेक कर लेना, कोई चेंज नहीं चाहिए।”
मैनेजर ने अपना फोन निकाला, ईमेल चेक किया, और फिर सिर हिलाया। “सब ठीक है सर। आपकी ईमेल में जो मेन्यू दिया है, वो पूरी तरह से फॉलो करेंगे हम।”
एकांश ने अपना बटुआ निकाला, मैनेजर को एडवांस चेक दिया, और फिर मेरा हाथ पकड़ लिया। “अच्छा, हम अब चलते हैं। कल तक फाइनल कन्फर्मेशन आप हमें व्हाट्सएप कर देना।”
मैनेजर ने दोनों हाथों से चेक लिया, सिर हिलाया, और हमें पार्किंग तक छोड़ने आया। गाड़ी तक पहुँचते ही उसने फिर से सिर झुकाया।
एकांश ने मेरी तरफ देखा, मेरे लिए दरवाज़ा खोला, और फिर ड्राइवर सीट पर आकर बैठ गया। उसने सीट बेल्ट बाँधी, और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराया — एक नरम, गर्व भरी मुस्कान।
“सब हो गया। कैसा लगा पूरा एक्सपीरियंस? तुम सैटिस्फाई हो ना?”
मैंने सीट पर पीछे झुकते हुए आँखें बंद कर लीं। “हाँ, सब कुछ परफेक्ट था। बस 2 दिन में देखना है कि प्लान के मुताबिक सब जा रहा है कि नहीं।”
उसने गाड़ी स्टार्ट की, और मेन रोड पर निकलते ही अपना हाथ मेरे घुटने पर रख दिया। उसकी हथेली गर्म थी, और उसने हल्के से दबाया। “सब प्लान के मुताबिक ही होगा। तुम फिकर मत करो, मैं हूँ ना साथ में।”
मैंने अपना सिर सीट पर टिका लिया, आँखें बंद। खिड़की से अंदर आती हवा मेरे बालों को उड़ा रही थी। मैंने सुना कि उसने रेडियो की आवाज़ थोड़ी कम कर दी, और फिर उसका अंगूठा मेरे घुटने पर धीरे-धीरे घूमने लगा।
“थक गई ना? घर चलते हैं, अब आराम कर लेंगे।”
मैंने बिना आँखें खोले कहा, “लंच ऑर्डर कर देना सबके लिए।”
रेड लाइट पर रुकते हुए उसने अपना फोन निकाला, और मुझे पता था कि वह वही ऐप खोल रहा है जिसका हम दोनों हमेशा इस्तेमाल करते हैं। “तुम्हारे लिए एक्स्ट्रा बटर नान ले लूँ? जैसे तुम पसंद करो।”
“हाँ।”
उसने ऑर्डर कन्फर्म किया, फोन जेब में रखा, और गाड़ी चलाने लगा। “ऑर्डर कन्फर्म हो गया। घर पहुँचेंगे तब तक डिलीवर हो जाएगा।”
मैंने आँखें खोलीं, उसकी तरफ देखते हुए। “तुम्हें ऑफिस में कोई काम है?”
उसने सिर हिलाया, स्टीयरिंग घुमाते हुए घर की तरफ। “नहीं, आज के लिए सब काम फिनिश कर दिया था सुबह ही। बस पूरा दिन तुम्हारे साथ ही रहूँगा।”
“ठीक है।”
गाड़ी पार्किंग में आकर रुकी। उसने इंजन बंद किया, सीट बेल्ट खोली, और मेरी तरफ झुक गया। उसकी उंगलियाँ मेरे बालों के एक गुच्छे को हटाने के लिए आईं, जो हवा में उड़कर मेरे चेहरे पर आ गया था। उसकी उंगलियाँ मेरे गाल पर एक पल के लिए रुकीं, नरम और गर्म।
“चलो, अंदर चलते हैं। बाहर इतनी गर्मी है, अंदर एसी लगेगी।”
मैंने गहरी साँस ली। “मेरी भी साड़ी में जलन हो रही, अंदर जाते ही उतारूँगी मैं।”
उसके कान गुलाबी हो गए। पूरे दो सेकंड के लिए वह वहीं जम गया, फिर जल्दी से गाड़ी से बाहर निकल गया। मैंने देखा कि उसके होंठों पर एक छोटी सी मुस्कान दबी हुई थी, जिसे वह छिपाने की कोशिश कर रहा था।
उसने मेरा दरवाज़ा खोला, अपना हाथ बढ़ाया। “चलो, अंदर चलते हैं।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा, बाहर निकली, और उसके चेहरे को ध्यान से देखा। उसके गाल अभी भी गुलाबी थे। “तुम ऐसे क्यों ब्लश कर रहे हो?”
उसने हँसते हुए नाटक किया कि वह नाराज़ है, लेकिन उसके गालों का रंग और गहरा हो गया। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे एलिवेटर की तरफ खींच लिया, मेरी बाजू में हल्का सा चुटकी काटते हुए।
“क्या ब्लश कर रहा हूँ? तुम बस बकवास कर रही हो। चलो एलिवेटर में।”
“ओउच! मैं ऐसा भी क्या कह दिया? बस यही कि अंदर जाकर साड़ी उतार दूँगी। इतने में ही तुम ब्लश कर रहे हो।”
एलिवेटर के दरवाज़े बंद हुए, और उसने पीछे से मेरी कमर पर हाथ रख दिया। उसकी साँस मेरी गर्दन पर गर्म लगी, और मैंने उसके गालों पर अभी भी हल्का गुलाबी रंग देखा। वह मेरे कान के पास झुका, उसकी आवाज़ धीमी और शरारती थी।
“क्या करूँ, तुम ऐसी चीज़ें बोलती हो तो। नेचुरली होता है ना।”
“एकांश, तुम्हारा दिमाग बहुत गंदा है।”
वह हँसा, और एलिवेटर के डिंग होते ही उसने मेरी गर्दन पर एक नरम किस कर दी। फिर मुझे बाहर खींच लिया, उसके हाथ अभी भी मेरी कमर पर गर्म थे। “हाँ हाँ, मैं गंदा हूँ। अब चलो दरवाज़ा तो खोलो अंदर जाने के लिए।”
मैंने कार्ड स्वाइप किया, और दरवाज़ा खुला। “चलो।”
वह मेरे पीछे अंदर आया, दरवाज़ा अपने पैर से धीरे से बंद किया, और एंट्री टेबल पर अपनी चाबियाँ रख दीं। मैंने अभी तक अपने सैंडल नहीं उतारे थे कि उसने पीछे से मेरी कमर पर हाथ रख दिए, और साड़ी के रेशम के ऊपर से मेरे कंधे पर एक नरम किस कर दी।
“अब तुम चेंज कर लो, मैं ऑर्डर का वेट करता हूँ बालकनी में।”
उसने धीरे से मेरी कमर छोड़ी, और मैंने उसके होंठों पर वही शरारती मुस्कान देखी जो वह छिपाने की कोशिश कर रहा था। वह बेडरूम की तरफ मुझे जाते देखता रहा, फिर अपना फोन निकालकर बालकनी की तरफ बढ़ गया।
“जल्दी कर लेना,” उसने कंधे के ऊपर से कहा, और काँच का दरवाज़ा उसके पीछे बंद हो गया।
मैं बेडरूम में गई, साड़ी के पल्लू को निकालते हुए। उसकी नर्म, गर्म मुस्कान मेरे दिमाग में थी। तीन साल हो गए थे, और वह अभी भी मुझे ऐसे देखता था जैसे पहली बार — जैसे मैं कोई ऐसी चीज़ हूँ जिसे वह समझ नहीं पाता, लेकिन चाहता है।
जब मैं निकली, तो घर में खाने की खुशबू आ रही थी। मैं बालकनी की तरफ बढ़ी, और काँच के दरवाज़े को खोला। वह वहाँ खड़ा था, रेलिंग पर झुककर, नीचे सड़क की हलचल को देखते हुए। उसने मेरी आहट सुनी, और मुड़ा।
“आ गई।”
वह मुस्कुराया, मेरी तरफ बढ़ा, और मेरा हाथ पकड़कर मुझे किचन की तरफ ले गया। “खाना आ गया है। तुम पहले हाथ धो लो।”
मैंने सिंक के पास जाकर अपने हाथ धोए, और उसने पीछे से प्लेट्स निकालीं। हमने चुपचाप खाना निकाला, उसने मेरे लिए एक्स्ट्रा बटर नान अलग से रखा। मैंने कुर्सी पर बैठते हुए उसकी तरफ देखा।
“बहुत भूख लगी है।”
“तो खाओ।” उसने मेरी प्लेट में सब्जी डाली, और फिर अपने लिए निकालने लगा। हम चुपचाप खाने लगे, बस चम्मचों की आवाज़ और कभी-कभी उसकी मुस्कान।
खाने के बाद, वह प्लेट्स लेकर सिंक में रखने गया। मैं वापस बालकनी में आ गई, ठंडी हवा में खड़ी होकर। उसने पीछे से आकर मेरी कमर पर हाथ रखा, और अपनी ठुड्डी मेरे कंधे पर रख दी।
“सब कुछ ठीक हो जाएगा, तुम्हें पता है ना?”
मैंने पीछे मुड़कर उसकी तरफ देखा। उसकी आँखें गहरी थीं, और उनमें कुछ था जो मुझे हमेशा शांत कर देता था।
“हाँ, मुझे पता है।”
उसने मेरा हाथ पकड़ा, और बालकनी की रेलिंग पर ले गया। वहाँ खड़े होकर, नीचे शहर की रोशनियों को देखते हुए, उसने मेरी उंगलियों को अपनी उंगलियों में फँसा लिया।
“धन्यवाद,” उसने धीरे से कहा।
मैंने उसकी तरफ देखा। “किस बात का?”
वह मुस्कुराया, बिना मेरी तरफ देखे। “सब कुछ का।”
मैंने उसकी उंगलियों को दबाया, और अपना सिर उसके कंधे पर रख दिया। हवा में कहीं से फूलों की खुशबू आ रही थी, और मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं।
यह सब कुछ था, जो मुझे चाहिए था।
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