THE HACKER TRAP
मुंबई… सपनों की नगरी।
इसी शहर में पुलिस उपनिरीक्षक निलेश अपने परिवार के साथ रहता था। परिवार में उसके माता-पिता और उसकी छोटी बहन राम्या थी।
राम्या पढ़ाई में हमेशा अव्वल रही थी, लेकिन उसकी असली ताकत उसकी पढ़ाई से कहीं आगे थी—कंप्यूटर।
कंप्यूटर की दुनिया में राम्या बेहद तेज़ थी। मुश्किल से मुश्किल पासवर्ड तोड़ना और कंप्यूटर सिस्टम में छिपी जानकारी ढूँढ निकालना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी।
निलेश के परिवार में उसके चाचा मिथुन, चाची हेमा और उनकी बेटी शीतल भी अक्सर आते-जाते रहते थे। निलेश को अपने चाचा मिथुन पर बहुत भरोसा था।
सब कुछ सामान्य था… लेकिन कुछ दिनों से मुंबई में एक के बाद एक लड़कियों के गायब होने की घटनाएँ सामने आ रही थीं।
चौदह से पच्चीस साल की लड़कियाँ अचानक गायब हो रही थीं।
न कोई सुराग…
न कोई गवाह…
न कोई ऐसी कड़ी, जिससे पुलिस अपराधियों तक पहुँच सके।
इस मामले की जाँच निलेश के जिम्मे थी।
निलेश दिन-रात इस मामले को सुलझाने में लगा हुआ था। लेकिन जितना वह इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करता, मामला उतना ही उलझता जाता।
फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिसने इस मामले को उसके अपने मोहल्ले तक पहुँचा दिया।
जिस इलाके में सुरक्षा काफी अच्छी थी, वहीं से लड़कियों के गायब होने की घटनाएँ शुरू हो गईं।
निलेश की नजर धीरे-धीरे अपने पड़ोस में रहने वाले एक नए आदमी पर जाकर टिक गई।
वह आदमी कुछ समय पहले ही वहाँ रहने आया था।
उसका व्यवहार शुरू से ही अजीब था।
न किसी से ज्यादा बात करता…
न किसी के घर आता-जाता…
और न ही अपने बारे में किसी को कुछ बताता।
लेकिन सबसे अजीब बात यह थी कि जिस समय शहर में लड़कियाँ गायब हो रही थीं, वह आदमी हर रात लगभग उसी समय अपने घर से बाहर निकलता था।
निलेश को उस पर शक होने लगा।
लेकिन राम्या को यह पूरी कहानी कुछ और ही लग रही थी…
उस रात घर में सभी के सो जाने के बाद राम्या चुपचाप अपने कमरे में गई।
उसने दरवाज़ा बंद किया और धीरे से अपना लैपटॉप खोला।
कुछ देर तक वह स्क्रीन को देखती रही।
फिर उसने अपने भाई निलेश के लैपटॉप से उसी मामले की जाँच शुरू कर दी।
राम्या ने मामले से जुड़ी जानकारी निकालने की कोशिश की।
लेकिन इस बार कंप्यूटर सिस्टम ने उसे रोक दिया।
“प्रवेश अस्वीकृत…”
राम्या कुछ पल के लिए चुप हो गई।
उसने दोबारा कोशिश की।
फिर से वही रुकावट।
राम्या ने भौंहें सिकोड़ लीं।
“ऐसा कैसे हो सकता है?”
उसने तीसरी बार कोशिश की।
इस बार स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए एक अनजान फाइल का नाम दिखाई दिया—
Private_001
राम्या की आँखें सिकुड़ गईं।
अगले ही पल वह फाइल गायब हो गई।
“ये फाइल… किसी ने जानबूझकर छिपाई है।”
राम्या ने उसे दोबारा ढूँढने की कोशिश की।
लेकिन जैसे ही वह उस फाइल तक पहुँचने की कोशिश करती, पूरा सिस्टम लॉक हो जाता।
कमरे में अचानक एक अजीब-सी खामोशी छा गई।
राम्या की नजर स्क्रीन पर ही टिकी थी।
तभी…
बाहर से हल्की-सी आहट सुनाई दी।
राम्या का हाथ माउस पर रुक गया…
***Download NovelToon to enjoy a better reading experience!***
Comments
Namrata Phadke
👍😇
2026-08-15
1
Hitesh Khude
❤️❤️❤️❤️❤️❤️
2026-08-14
1
Jayshree Khude
❤️
2026-08-13
2