बाहर से हल्की सी आहट सुनाई दी…
राम्या का हाथ माउस पर रुक गया
उसने धीरे से अपनी साँस रोकी…
और ध्यान से सुना…
टक… टक…
जैसे कोई बाहर धीरे-धीरे चल रहा हो।
“शायद… मेरा वहम है…”
राम्या ने खुद को समझाने की कोशिश की।
पर उसका दिल मानने को तैयार नहीं था।
उसने धीरे से कुर्सी पीछे खिसकाई…
और दरवाज़े के पास जाकर कान लगाया।
बाहर सन्नाटा था।
“कोई नहीं है…”
वह वापस मुड़ी ही थी कि अचानक—
लैपटॉप की स्क्रीन अपने आप चमक उठी।
राम्या तुरंत पलटी।
स्क्रीन पर कुछ सेकंड के लिए वही नाम फिर से दिखा
Private_001
और फिर गायब।
इस बार उसके नीचे कुछ नंबर flash हुए—
19.1136°N, 72.8697°E
राम्या की आँखें सिकुड़ गईं।
“ये… coordinates हैं?”
उसने तुरंत अपने फोन में location डाली।
Map पर एक जगह खुली—
शहर के बाहर एक पुराना industrial area।
“इसका मतलब… ये case वहीं से जुड़ा है…location मे एक pattern बन रहा था
सभी locations एक circle बना रहे थे।
और उस circle का center…
उनका अपना इलाका था।
अगली सुबह…
राम्या ने किसी को कुछ नहीं बताया।
निलेश पहले से ही तनाव में था।
“आज फिर एक लड़की गायब हो गई…”
उसने नाश्ते की टेबल पर कहा।
घर में सन्नाटा छा गया।
माँ ने घबराकर पूछा—
“कुछ पता चला?”
निलेश ने सिर हिला दिया—
“कुछ भी नहीं…”
राम्या चुपचाप सब सुन रही थी।
दोपहर में…
राम्या ने अपना बैग उठाया।
“माँ, मैं लाइब्रेरी जा रही हूँ…”
माँ ने बिना शक किए हाँ कर दी।
पर राम्या लाइब्रेरी नहीं गई।
वो सीधे उस location पर पहुँची।
पुराना industrial area…
टूटी-फूटी बिल्डिंग्स…
सन्नाटा… और एक अजीब सी गंध।
राम्या का दिल तेज़ धड़क रहा था।
“मुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था…”
पर अब वो रुक नहीं सकती थी।
वह धीरे-धीरे अंदर बढ़ी…
एक पुराना गोदाम था…
जिसका दरवाज़ा आधा खुला था।
राम्या ने अंदर झाँका—
अंधेरा…
और कुछ अजीब सी आवाज़ें।
जैसे कोई… धीरे-धीरे बात कर रहा हो।
अचानक…
अंदर से एक चीज़ गिरने की आवाज़ आई—
धड़ाम!
राम्या डर गई।
उसने तुरंत पीछे हटना चाहा…
पर तभी—
उसके पैर के नीचे कुछ आ गया।
उसने नीचे देखा—
एक टूटा हुआ मोबाइल फोन।
स्क्रीन cracked थी…
पर उसमें अभी भी हल्की रोशनी थी।
राम्या ने फोन उठाया…
उसमें एक video paused था।
उसने play किया—
वीडियो में वही industrial area था...
एक अंधेरा कमरा था…
और उसमें एक लड़की बंधी हुई थी।
“ये… ये तो missing cases में से एक है…”
वीडियो अचानक बंद हो गया।
राम्या का दिल बैठ गया।
तभी…
पीछे से किसी के कदमों की आवाज़ आई।
राम्या जम गई।
उसने धीरे से मुड़कर देखा—
कोई आदमी अंदर आ रहा था।
राम्या तुरंत पास के एक लोहे के ड्रम के पीछे छिप गई।
उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
वो आदमी अंदर आया…
उसके हाथ में एक बैग था।
उसने बैग जमीन पर रखा…
और इधर-उधर देखने लगा।
राम्या ध्यान से देख रही थी…
पर अंधेरे में चेहरा साफ नहीं दिख रहा था।
तभी…
उस आदमी का फोन बजा।
उसने कॉल उठाई—
“हाँ… काम हो गया है…
“पुलिस को कुछ पता नहीं चला…”
“अगला स्टेप कब?”
फोन के दूसरी तरफ से आवाज़ आई।
आदमी ने धीरे से कहा—
“जब तक सिग्नल न मिले… कुछ मत करो…”
राम्या के हाथ काँप रहे थे।
“ये… एक गँग है…”
अचानक…
उस आदमी ने चारों तरफ देखा…
जैसे उसे किसी के होने का एहसास हो गया हो।
राम्या ने अपनी साँस रोक ली।
कुछ सेकंड…
जो उसे घंटों जैसे लगे…
फिर वो आदमी बैग उठाकर बाहर चला गया।
राम्या ने राहत की साँस ली।
वह धीरे से बाहर निकली…
और दौड़ते हुए वहाँ से निकल गई।
शाम को…
घर में सब सामान्य था।
चाचा मिथुन भी आए हुए थे।
उन्होंने राम्या से"चिंता का कारण पूछा
उसने हल्की सी मुस्कुराहट देकर कहा चाचा सब ठीक है
रात को…
राम्या अपने कमरे में बैठी थी।
उसने वो मोबाइल फिर से खोला…
और वीडिओ को ध्यान से देखा।
और तभी…
उसने कुछ notice किया—
वीडियो के कोने में एक reflection था …
जिसमें एक आदमी खड़ा था…
राम्या ने zoom किया…
पर चेहरा साफ नहीं दिख रहा था…
बस…
एक चीज़ साफ दिख रही थी—
उस आदमी की कलाई पर एक खास तरह की घड़ी।
राम्या ने धीरे से फुसफुसाया—
“ये घड़ी… मैंने कहीं देखी है…”
कहाँ देखी होगी.....???
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Comments
Namrata Phadke
cool 👍😎
2026-08-15
0
Jayshree Khude
❤️❤️
2026-08-14
1