THE THREE STAR MYSTERY

रम्या अपने कमरे में बैठी उस घड़ी को लगातार देख रही थी।

न जाने क्यों, उस घड़ी को देखते ही उसके दिमाग में एक पुरानी घटना बार-बार घूम रही थी।

“मैंने ये घड़ी पहले कहाँ देखी है?”

उसने घड़ी को हाथ में उठाया और उसे ध्यान से देखने लगी।

तभी अचानक उसे याद आया।

कुछ दिन पहले वह घर के बाहर जा रही थी। उसी वक्त पड़ोस का वही आदमी अचानक उससे टकरा गया था।

टकराते ही उसकी जेब से एक घड़ी नीचे गिर गई थी।

रम्या ने बिना देर किए घड़ी उठाई और उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा था,

“ये आपकी घड़ी गिर गई है।”

उस आदमी ने रम्या के हाथ से घड़ी ली थी।

उसने कुछ नहीं कहा था।

न धन्यवाद… न कोई सवाल।

बस घड़ी अपनी जेब में रखी और चुपचाप वहाँ से चला गया था।

उस समय रम्या को उसका व्यवहार थोड़ा अजीब लगा था, लेकिन उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

अब वही घड़ी उसके सामने थी।

रम्या की नजर घड़ी पर टिक गई।

“ये वही घड़ी है…”

उसका शक अचानक और गहरा हो गया।

रम्या कुछ देर सोचती रही।

फिर उसके दिमाग में उस आदमी की दूसरी हरकतें भी आने लगीं।

वह अक्सर रात के समय घर से बाहर जाता था।

किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था।

और जब भी कोई उसके बारे में सवाल करता, वह बात बदल देता था।

रम्या ने घड़ी को मेज पर रखा।

“मुझे उसके घर में जाकर देखना होगा।”

उसे पता था कि यह खतरनाक हो सकता है।

लेकिन अब सिर्फ शक के भरोसे बैठना उसे मंजूर नहीं था।

उस रात रम्या खिड़की के पास बैठकर बाहर देखने लगी।

करीब ग्यारह बजे उसके पड़ोसी के घर का दरवाजा खुला।

वही आदमी बाहर निकला।

उसने पहले सड़क की तरफ देखा।

फिर कुछ पल रुककर चारों तरफ नजर दौड़ाई।

इसके बाद वह तेज कदमों से आगे बढ़ गया।

रम्या ने कुछ देर इंतजार किया।

जब उसे यकीन हो गया कि वह काफी दूर जा चुका है, तो वह चुपचाप अपने घर से बाहर निकली।

उसके कदम उस आदमी के घर की तरफ बढ़ रहे थे।

हर कदम के साथ उसका दिल तेज धड़क रहा था।

“अगर अंदर कुछ नहीं मिला तो?”

लेकिन अगले ही पल उसने खुद को समझाया।

“और अगर मिला… तो शायद आज सच सामने आ जाएगा।”

वह धीरे से घर के अंदर चली गई।

अंदर अंधेरा था।

रम्या ने अपने फोन की हल्की रोशनी जलाई और कमरे को ध्यान से देखने लगी।

शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सामान्य लग रहा था।

एक सोफा…

कुछ किताबें…

एक टेबल…

कुछ फाइलें…

लेकिन तभी उसकी नजर सामने की दीवार पर पड़ी।

रम्या के कदम वहीं रुक गए।

दीवार पर कई लड़कियों की तस्वीरें लगी थीं।

उसने एक तस्वीर को ध्यान से देखा।

फिर दूसरी को।

उसकी साँसें रुक-सी गईं।

“ये…”

वह उन लड़कियों को पहचानती थी।

ये वही लड़कियाँ थीं जिनका नाम उसी केस में सामने आया था।

रम्या ने एक के बाद एक तस्वीर देखी।

हर तस्वीर उसी रहस्य की तरफ इशारा कर रही थी, जिसे वह पिछले कई दिनों से समझने की कोशिश कर रही थी।

उसका शक अब लगभग यकीन में बदल चुका था।

“तो तुम सच में इस केस से जुड़े हो…”

रम्या ने धीरे से कहा।

उसने तुरंत अपने फोन से कुछ तस्वीरें ले लीं।

तभी उसकी नजर कमरे के एक कोने पर गई।

वहाँ फर्श के पास कागज का एक जला हुआ टुकड़ा पड़ा था।

रम्या नीचे झुकी।

उसने वह टुकड़ा उठाया।

तस्वीर का ज्यादातर हिस्सा जल चुका था।

लेकिन उसमें कुछ ऐसा था, जिसे देखकर रम्या की उत्सुकता और बढ़ गई।

तभी—

दरवाजा खुलने की आवाज आई।

रम्या का दिल जोर से धड़क उठा।

कोई वापस आ गया था।

उसने तुरंत तस्वीर का टुकड़ा अपनी जेब में डाल लिया।

बाहर से कदमों की आवाज सुनाई देने लगी।

ठक… ठक… ठक…

कदम लगातार करीब आ रहे थे।

रम्या ने चारों तरफ देखा।

अब उसके पास सिर्फ एक रास्ता था।

खिड़की।

वह तेजी से खिड़की तक पहुँची।

खिड़की खोली और बाहर कूद गई।

नीचे उतरते ही वह अपने घर की तरफ दौड़ पड़ी।

पीछे मुड़कर देखने की उसकी हिम्मत नहीं हुई।

घर पहुँचकर उसने तुरंत दरवाजा बंद किया और सीधे अपने कमरे में चली गई।

उसने दरवाजे की कुंडी लगाई।

कुछ पल तक वह वहीं खड़ी रहकर अपनी तेज साँसों को सामान्य करने की कोशिश करती रही।

फिर उसने जेब से वह जला हुआ तस्वीर का टुकड़ा निकाला।

“अब देखते हैं… आखिर तुमने क्या छिपाने की कोशिश की थी।”

रम्या ने कमरे की लाइट जलाई।

तस्वीर को मेज पर रखा और ध्यान से देखने लगी।

तस्वीर लगभग पूरी तरह जल चुकी थी।

न कोई चेहरा साफ था…

न कोई जगह।

लेकिन तस्वीर के नीचे एक गाड़ी दिखाई दे रही थी।

रम्या की नजर तुरंत गाड़ी पर टिक गई।

उसने तस्वीर को करीब करके देखा।

गाड़ी की नंबर प्लेट भी दिखाई दे रही थी।

लेकिन नंबर लगभग मिट चुका था।

फिर भी नंबर प्लेट पर बनी एक खास marking साफ दिखाई दे रही थी।

तीन सितारे।

रम्या कुछ सेकंड तक उन तीनों सितारों को देखती रही।

“ये क्या है?”

उसने तस्वीर को लैपटॉप पर स्कैन किया और उसे बड़ा करके देखने लगी।

तीनों सितारे अब और साफ दिखाई दे रहे थे।

रम्या ने नोटबुक खोली।

उसने लिखना शुरू किया—

पड़ोसी आदमी — संदिग्ध।

घड़ी — उसी आदमी की।

लड़कियों की तस्वीरें — उसके घर में।

जली हुई तस्वीर — उसके घर में।

गाड़ी — तस्वीर में मौजूद।

नंबर प्लेट — तीन सितारों की marking।

रम्या कुछ देर अपनी लिखी हुई बातें देखती रही।

अब उसके सामने एक नया सवाल था।

“आखिर इस गाड़ी का इन लड़कियों से क्या रिश्ता है?”

उसने तस्वीर को फिर से देखा।

“और ये तीन सितारे…”

उसने तीनों सितारों को zoom किया।

“इनका मतलब क्या है?”

रम्या ने तस्वीर को अपने लैपटॉप में सेव किया।

फिर उसने एक नया फोल्डर बनाया।

उसका नाम रखा—

THREE STARS

उसने जली हुई तस्वीर, लड़कियों की तस्वीरें और घड़ी की तस्वीर उस फोल्डर में रख दी।

अब उसके पास कई सुराग थे।

लेकिन सभी सुराग एक ही आदमी की तरफ इशारा कर रहे थे।

रम्या कुर्सी पर पीछे झुक गई।

उसके चेहरे पर डर नहीं था।

अब वहाँ सिर्फ एक जिद थी।

“मैं पता लगाकर रहूँगी कि ये तीन सितारे किस चीज का निशान हैं…”

तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।

रम्या ने फोन उठाया।

मैसेज में सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

“कुछ तस्वीरें जला देने से उनका सच खत्म नहीं होता… लेकिन सच खोजने वालों का अंत जरूर हो सकता है।”

रम्या की आँखें स्क्रीन पर टिक गईं।

कुछ पल के लिए कमरे में बिल्कुल खामोशी छा गई।

फिर उसने धीरे से फोन नीचे रखा।

उसकी नजर फिर उसी जली हुई तस्वीर पर गई।

“तो तुम्हें पता है कि मैं तुम्हारे पीछे हूँ…”

उसने तस्वीर को हाथ में उठाया।

“लेकिन अब मुझे भी पता है कि मुझे कहाँ देखना है।”

रम्या ने लैपटॉप बंद किया।

उस रात उसे पहली बार एहसास हुआ कि वह सिर्फ एक केस की सच्चाई खोजने की कोशिश नहीं कर रही थी।

वह किसी ऐसे राज़ के करीब पहुँच चुकी थी, जिसे छिपाने के लिए कोई इंसान तस्वीरें तक जला रहा था।

और उस जली हुई तस्वीर में दिखाई देने वाली तीन सितारों वाली गाड़ी…

शायद उस पूरे रहस्य की सबसे बड़ी चाबी थी।“तीन सितारे… और एक अनजान राज़।

रम्या अभी अनजान थी कि अगला सुराग उसे कहाँ ले जाने वाला था…”

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Jayshree Khude

Jayshree Khude

🥰❤️

2026-08-16

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