पहली चाल – मुस्कान में छिपा तूफ़ान

रिद्धय का ऑफिस काँच से बना हुआ था—ऊँचा, चमकदार और उसकी तरह ही दिखावटी। अवलिया उसके सामने कुर्सी पर बैठी थी, चेहरे पर सुखद मुस्कान, जबकि दिल में तूफ़ान मचल रहा था।

“तो मिस अवलिया सिंह… आप मुझसे मिलना चाहती थीं?”

रिद्धय ने अपनी सामान्य शालीन आवाज़ में पूछा।

अवलिया ने पैर क्रॉस करते हुए धीमे स्वर में कहा,

“जी। और मेरा यक़ीन कीजिए… ये मुलाक़ात आपकी ज़िंदगी बदल देगी।”

रिद्धय हल्का-सा हँसा।

“मेरी ज़िंदगी बदलने की ताक़त बहुत कम लोगों में है।”

अवलिया की आँखें चमक उठीं।

“तो मैं शायद उन्हीं कम लोगों में से हूँ।”

उनके बीच कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। इस सन्नाटे में सिर्फ दो चीज़ें बोल रही थीं—अवलिया का बदला… और रिद्धय का अहंकार।

अवलिया की योजना शुरू

वो जानती थी कि रिद्धय महत्वाकांक्षी है। उसे हर चीज़ पर कंट्रोल चाहिए—लोगों पर भी, रिश्तों पर भी। और उसे सबसे ज़्यादा आकर्षित करती है कोई ऐसी चीज़… जो उसे चुनौती दे।

और अवलिया वही चुनौती बनने आई थी।

“मैं एक नई बिज़नेस वेंचर में पार्टनरशिप की बात करने आई हूँ,” उसने कहा।

“और मैं चाहती हूँ कि ये साझेदारी सिर्फ आपके साथ हो।”

रिद्धय ने भौहें उठाईं।

“आप मुझे क्यों चुन रही हैं?”

अवलिया ने एक धीमी मुस्कान के साथ कहा,

“क्योंकि भीड़ में सबसे अलग जो चमकता है… वही चुना जाता है।”

रिद्धय उसकी बातों से प्रभावित होता दिखा। उसकी आँखों में वही उत्साह था जो कभी उसने अनाया को देखकर महसूस किया था। अवलिया के दिल में दर्द और गुस्सा एक साथ उठे, पर उसने चेहरा शांत रखा।

रिद्धय में उठता शक

कुछ देर बाद उसने कहा,

“मैं आपका प्रोफ़ाइल देखूँगा। पर बताइए… आप भारत में नई हैं, है ना?”

अवलिया का दिल एक पल रुका—यह सवाल अनाया के अतीत से टकराता था।

“हाँ,” उसने मुस्कान थामते हुए कहा, “यहाँ आए दो महीना हुआ है। लेकिन मैं तेज़ी से सीखती हूँ… और तेज़ी से कमाती भी हूँ।”

रिद्धय ने सिर हिलाया, पर उसकी नज़रों में हल्का-सा संदेह उभरा।

“आपकी आँखें बहुत जानी-पहचानी लगती हैं,” उसने कहा, “कहीं… पहले मिले हैं हम?”

अवलिया ने अपनी पलकों को झपकाया और कहा,

“नहीं। पर यक़ीन मानिए… अब हम बहुत बार मिलेंगे।”

अतीत फिर जाग उठा

मीटिंग खत्म हुई। जैसे ही अवलिया उठी, रिद्धय ने दरवाज़ा खोलते हुए कहा,

“आप दिलचस्प हैं, मिस अवलिया। मुझे लगता है हम साथ अच्छा काम करेंगे।”

अवलिया मुड़ी और उसकी आँखों में सीधे देखते हुए बोली,

“आपको अंदाज़ा भी नहीं… मैं आपके साथ क्या-क्या करने वाली हूँ।”

उसने यह बात ऐसे कही कि रिद्धय एक पल के लिए ठिठक गया। पर अवलिया आगे बढ़ चुकी थी—शांत, नियंत्रित और घातक।

लिफ्ट में पहुँचते ही उसने गहरी सांस ली।

उसकी उंगलियाँ हल्के से काँप रही थीं—यह डर नहीं, अतीत का दर्द था।

जब-जब रिद्धय उसके सामने आता, उसकी मौत की यादें उसे भीतर तक चीर देती थीं।

पर अब वह टूटती नहीं थी—

अब वह तोड़ने आई थी।

आग लगने की शुरुआत

कार में बैठते ही उसने अपने असिस्टेंट को कॉल किया।

“सभी फाइलें तैयार कर दो। कल से हम मेहरा इंडस्ट्रीज पर पहला वार करेंगे। और हाँ—उसे बस इतना महसूस होना चाहिए कि कोई अनजाना तूफ़ान उसकी तरफ बढ़ रहा है।”

फोन कटते ही उसने खिड़की से बाहर देखा।

शहर वही था, लोग वही थे—

पर अब इस शहर में एक लड़की लौट चुकी थी,

जो प्यार से नहीं…

अपने बदले की मुस्कान से पहचानी जाएगी।

और रिद्धय?

उसे अभी अंदाज़ा भी नहीं कि उसका विनाश… उसके दरवाज़े तक आ चुका है।

Be continued ✍️ ✍️

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