“मैं देर वहीं करती हूँ जहाँ रहना नहीं चाहती।”

अगली सुबह शहर की हलचल अभी जाग ही रही थी, लेकिन मेहरा इंडस्ट्रीज के भीतर हलचल कुछ और ही थी। रिद्धय के निजी असिस्टेंट की मॉर्निंग रिपोर्ट में एक नई फ़ाइल शामिल थी—A.S. Enterprises, जिसकी मालिक थी… अवलिया सिंह।

रिद्धय ने फ़ाइल पलटी, फिर ठहर गया।

“कल ही मिली और आज पूरी कंपनी मेरे सामने खड़ी है? यह लड़की है कौन…?”

उसकी आवाज़ में हल्की बेचैनी थी।

वहीं दूसरी ओर, अवलिया एक शांत मुस्कान के साथ अपनी ऑफिस चेयर पर बैठी थी। उसके सामने थी रिद्धय की कंपनी की इंटरनल वीकनेस रिपोर्ट—वो सारे राज़, कमजोरियाँ, पुराने स्कैंडल जो दुनिया नहीं जानती थी… लेकिन अवलिया जानती थी।

क्योंकि वो अनाया थी।

उसी ने कभी रिद्धय को दिल से ज्यादा अपनी मेहनत दी थी।

उसी ने वो हर रहस्य खोजे थे जो अब वो उसके खिलाफ इस्तेमाल करने वाली थी।

पहला कदम: विश्वास का जाल

दोपहर में अवलिया ने रिद्धय को मेसेज भेजा—

“लंच पर चर्चा करें? एक प्रस्ताव है जो सिर्फ आप समझ सकते हैं।”

रिद्धय मुस्कुराया, पर उसके अंदर एक अजीब-सा खिंचाव था।

“यह लड़की मुझे खींच क्यों रही है?”

वो खुद नहीं समझ पा रहा था।

रेस्टोरेंट पहुँचते ही उसने देखा—अवलिया खिड़की के पास बैठी थी, धूप में उसके बाल चमक रहे थे, चेहरा शांत था… पर रिद्धय को नहीं पता था कि उस शांत चेहरे के पीछे हजार तूफ़ान बंधे हैं।

“आप हमेशा इतनी ही समय पर होती हैं?” रिद्धय ने पूछा।

अवलिया ने मुस्कुराकर कहा,

“मैं देर वहीं करती हूँ जहाँ रहना नहीं चाहती।”

“और यहाँ?” उसने तुरंत पूछा।

“यहाँ मैं समय से पहले भी आ सकती हूँ।”

उसके शब्दों में एक रहस्य था।

रिद्धय को महसूस हुआ खतरा

लंच के बीच-अचानक अवलिया बोली—

“आप पर इस साल पाँच बड़े केस चल रहे हैं। शेयर मार्केट में आपकी इमेज डsturbed है। अगर किसी ने आपके खिलाफ कदम उठाया तो… नुकसान बड़ा होगा।”

रिद्धय चौंक गया।

“आपको ये सब कैसे पता?”

अवलिया ने बर्फीली शांति के साथ कहा,

“जिसके पास दिमाग हो… वह जानने का रास्ता खुद बना लेता है।”

उसकी आँखें कुछ पलों के लिए रिद्धय की आँखों में गहराई से डूबी रहीं—जैसे उसे पढ़ रही हों, परख रही हों… और अंदर तक झाँक रही हों।

रिद्धय को पहली बार एक हल्की सिहरन महसूस हुई।

क्योंकि वो ऐसी नज़र सिर्फ एक बार देख चुका था—

अनाया की आँखों में।

अवलिया का छुपा हमला

लंच खत्म होते ही अवलिया ने उसे एक गिफ्ट बैग थमाया।

“ये आपके लिए है… मेरे नए प्रोजेक्ट की पहली झलक।”

रिद्धय ने बैग खोला।

अंदर एक छोटा-सा क्रिस्टल ग्लोब था, जिसमें एक बर्फीला गुलाब बंद था।

गुलाब देखकर उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

अनाया…

उसे वही बर्फीले गुलाब पसंद थे।

“क्या हुआ?” अवलिया ने मासूमियत से पूछा।

“कुछ… नहीं।”

रिद्धय की आवाज़ काँप गई।

उसे लगा जैसे कहीं कोई पुरानी परछाई फिर जग गई हो।

रात का तूफ़ान

शाम को मेहरा इंडस्ट्रीज में एक खबर फैल गई—

एक अज्ञात निवेशक ने रिद्धय के एक बड़े प्रोजेक्ट के शेयर भारी कीमत पर खरीद लिए थे… और उस निवेशक का नाम था—

अवलिया सिंह।

रिद्धय की आँखें हैरानी और डर से फैल गईं।

“वो सिर्फ एक मुलाक़ात नहीं थी… वो हमला था।”

उधर अपनी बालकनी में खड़ी अवलिया शहर की रोशनियों को देख रही थी।

हवा उसके बालों को छूती जा रही थी, पर उसकी आँखों में सिर्फ एक आग थी।

“पहला वार हो गया, रिद्धय,” उसने धीमे से कहा,

“अब तुम्हें हर साँस के साथ महसूस होगा…

कि कोई है जो तुम्हारी बर्बादी की तरफ कदम बढ़ा रहा है।”

और रात का अंधेरा उसके बदले को और गहरा कर रहा था।

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