VILLIAN DARK DESIRE
शहर की रात में एक अजीब-सी ख़ामोशी थी—ऐसी जिसे छूकर देखा जाए तो उसमें भी आग की गर्मी महसूस हो। पुराने गोदाम की छत पर खड़ा रायान खान, शहर का सबसे ख़तरनाक गैंगस्टर, सिगरेट की धीमी लपटों के साथ नीचे फैलती अँधेरी सड़कों को देख रहा था। उसकी आँखों में शोर नहीं, बल्कि एक खतरनाक सन्नाटा बसता था—जो किसी को भी अपने अंदर खींच लेने की ताकत रखता था।
उसी रात, पहली बार ज़ारा उससे टकराई।
बारिश में भीगी, लंबी साँसें लेती हुई, डर और हिम्मत दोनों को बराबरी से संभाले हुए।
“तुम रास्ता भटक गई हो या मुसीबत ढूँढ रही हो?”
रायान की भारी, धीमी आवाज़ में एक अजीब-सी गर्माहट थी—जिससे ज़ारा का दिल अनजाने में तेज़ धड़कने लगा।
ज़ारा ने होंठ दबाए, उसकी साँसें काँप रही थीं।
“मुझे… तुमसे मदद चाहिए।”
रायान ने सिगरेट फेंकी और उसके पास आया।
वह जितना क़रीब आता, हवा उतनी ही गर्म होने लगती।
ज़ारा को ऐसा लगा जैसे उसका पूरा शरीर किसी अदृश्य खिंचाव में बंध रहा हो—डर और आकर्षण के अजीब मिश्रण में।
“तुम्हें पता है न, लोग मुझसे मदद नहीं लेते… मेरे पास सौदे होते हैं।”
उसकी उँगलियों के नज़दीक आते ही ज़ारा की साँस अटक गई।
रायान की आँखों में एक गहरी लपट थी—जैसे वह उसकी हर छोटी हरकत को पढ़ सकता हो।
“कौन-सी मुसीबत में हो?”
“काफ़ी बड़ी… और शायद मेरे पास कहीं और जाने की जगह नहीं थी।”
रायान ने हल्का-सा मुस्कुराया—वह मुस्कान ख़तरनाक भी थी, कशिश से भरी भी।
“तो तुम मेरी दुनिया में कदम रख चुकी हो, ज़ारा।
यहाँ से वापस बाहर निकलना… आसान नहीं होता।”
हवा में उनके बीच एक तीखी, सुलगती हुई नज़दीकी भरने लगी।
ज़ारा ने महसूस किया कि उसके गीले बालों से टपकता पानी रायान की उँगलियों को छू गया—और उसी पल उसकी रीढ़ में एक अजीब-सी गर्म लहर दौड़ गई।
“तुम डरती नहीं?” रायान ने पूछा, उसकी आवाज़ एक धीमी फुसफुसाहट में बदलती हुई।
ज़ारा ने उसकी आँखों में सीधा देखा।
“शायद… नहीं। या फिर… तुमसे ज़्यादा किसी और से डरने की ज़रूरत नहीं है।”
रायान ने उँगली से उसके गाल के पास की बरसाती बूंद हटाई—स्पर्श इतना हल्का, जैसे हवा ने छुआ हो, फिर भी इतना तीव्र कि ज़ारा की साँस ग़ायब हो गई।
“दिलचस्प लड़की हो तुम…”
उसका स्वर और गहरा हो गया।
“और खतरनाक भी।”
रात और भी स्याह होती गई।
रायान ने अपना हाथ उसकी कमर के पास रोका—छुआ नहीं, बस इतना करीब कि ज़ारा को गर्म साँस जैसा अहसास होने लगा।
“अब तुम मेरी दुनिया में हो, ज़ारा,” उसने हल्की, धीमी आवाज़ में कहा।
“और यहाँ… इच्छा एक ख़तरा बन जाती है।”
ज़ारा ने पलटकर उसकी तरफ देखा—
डर कम था, खिंचाव ज़्यादा।
और उसी पल, कहानी की पहली चिंगारी भड़क उठी—
एक ऐसी चिंगारी, जिसकी आग दोनों को निगलने वाली थी।
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