तुम खुद मेरी तरफ आकर्षित हो रही हो।

रात की बारिश थम चुकी थी, लेकिन हवा में नमी और अनकहा तनाव अब भी था।

ज़ारा रायान के साथ उसके पुराने महफ़ूज़ ठिकाने में पहुँची। चारों ओर अंधेरा, लकड़ी की महक, और गहरी खामोशी—जैसे हर दीवार उसकी कहानी छुपाए बैठी हो।

रायान ने दरवाज़ा बंद किया।

उसकी आँखें ज़ारा पर टिक गईं—धीमी, गहरी, सुलगती हुई।

“थोड़ी देर आराम कर लो,” उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में कहीं भी आराम जैसा कुछ नहीं था।

उसमें गर्मी थी, खिंचाव था… और एक अनछुआ तूफ़ान।

ज़ारा कमरे में कदम रखती गई।

उसके भीगे कपड़ों से उठती हल्की खुशबू हवा में फैल रही थी।

रायान खुद को रोक नहीं पाया—उसके कदम अनजाने में ज़ारा की ओर बढ़ गए।

“तुम डर नहीं रहीं?”

वह उसके करीब आकर रुका। इतना करीब कि ज़ारा को उसकी साँसें अपने चेहरे पर महसूस हुईं।

ज़ारा ने धीरे से कहा,

“तुम्हारे पास अजीब-सी… खिंचाव है। डर उससे छोटी चीज़ लगने लगी है।”

रायान की आँखों में एक हल्की, खतरे से भरी मुस्कान झलक उठी।

“खिंचाव?”

उसने फुसफुसाहट में दोहराया,

“या तुम खुद मेरी ओर खिंच रही हो?”

कमरे की गर्मी अचानक बढ़ने लगी।

रायान ने हाथ बढ़ाकर उसकी कलाई हल्के से थामी—स्पर्श इतना मुलायम, लेकिन असर इतना गहरा कि ज़ारा की साँसें एक पल को थम गईं।

“तुम ग़लत जगह आ गई हो, ज़ारा,” उसने धीमे सुर में कहा।

“मेरी दुनिया… दिल नहीं, बस ख़ामोशी और अंधेरे जानती है।”

ज़ारा ने उसकी कलाई पर अपनी उँगलियाँ रख दीं—हल्की, लेकिन नज़रें कहानियाँ बोलती हुईं।

“कभी-कभी… अंधेरे में भी दिल धड़क उठता है।”

उसकी बात पर रायान ठहर गया।

जैसे वह पहली बार किसी के शब्दों से छुआ हो।

दोनों के बीच का फ़ासला इतना कम था कि हवा की हर हलचल महसूस हो रही थी।

रायान ने उसके गीले बालों को पीछे हटाया, उंगलियाँ उसके गाल के पास ठहर गईं।

ज़ारा की आँखें बंद हो गईं—जैसे वह उसके छूने भर से किसी नर्म गर्मी में घिर गई हो।

“तुम्हें पता है,” रायान ने धीमे, रेशमी स्वर में कहा,

“मुझे किसी पर भरोसा करना नहीं आता।

और जो भी मेरी ज़िंदगी में आता है… उसे खोने का डर भी होता है।”

ज़ारा ने उसकी हथेली अपने चेहरे के और करीब खींच ली।

“तो आज… पहली बार मुझ पर भरोसा कर लो।”

उनके शब्दों के बीच एक सुलगती हुई खामोशी भर गई।

खामोशी जो दो दिलों की धड़कनों से भरी थी।

एक पल…

फिर दूसरा…

रायान ने उसका हाथ अपने दिल पर रख दिया।

ज़ारा ने उस तेज़, गर्म धड़कन को महसूस किया और उसकी आँखें नमी से चमक उठीं।

“तुम मुझे बदल रही हो, ज़ारा,” रायान ने कहा,

“और बदलाव… मुझे हमेशा डराता है।”

ज़ारा ने उसकी ओर झुककर फुसफुसाया,

“प्यार कभी डर नहीं देता… बस रास्ता दिखाता है।”

रायान की उंगलियाँ उसकी कमर तक आ पहुँचीं—

स्पर्श हल्का, लेकिन सुलगता हुआ।

ज़ारा उसकी नज़दीकी में खोती चली गई।

उस रात उन्होंने कुछ नहीं कहा—

फिर भी उनके बीच सब कह दिया गया।

अंधेरा अब सिर्फ़ अंधेरा नहीं था…

उसमें एक नयी, गर्म, गहरी इच्छा जन्म ले चुकी थी—

जो उन्हें और भी गहराई में खींचने वाली थी।

Download

Like this story? Download the app to keep your reading history.
Download

Bonus

New users downloading the APP can read 10 episodes for free

Receive
NovelToon
Step Into A Different WORLD!
Download NovelToon APP on App Store and Google Play