रायान ने ज़ारा को अपनी बाँहों में थाम रखा था, लेकिन उसके दिल में उस पकड़ से भी ज़्यादा कसाव था—
एक अजीब-सा डर… और उससे भी गहरी चाहत।
उसका दिल पहली बार किसी और के लिए इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था।
ज़ारा उसकी छाती से लगी थी, उसकी गर्म साँसें रायान के दिल को किसी नर्म आग की तरह पिघला रही थीं।
“रायान…”
उसकी धीमी आवाज़ में एक कंपकंपी थी।
“हाँ?”
रायान ने उसके बालों को छूते हुए पूछा।
“क्या तुम्हें… सच में लगता है कि मैं तुम्हारी दुनिया के लिए सही नहीं हूँ?”
रायान ने उसकी ठोड़ी को ऊँगली से ऊपर उठाया, उसके चेहरे को अपने नज़दीक लाया।
उसकी आँखें इतनी करीब थीं कि ज़ारा की पलकों की थरथराहट साफ़ दिख रही थी।
“ज़ारा…”
उसका स्वर भारी था—
“तुम मेरी दुनिया के लिए बहुत ज़्यादा सही हो।
और शायद इसी वजह से मैं डरता हूँ।”
ज़ारा की साँसें गहरी हो गईं।
“डरते हो… या चाहत तुम्हें पागल कर रही है?”
रायान ठहर गया।
उसकी आँखों में पहली बार किसी ने ऐसे शब्द डाले थे।
“तुम…”
उसकी आवाज़ बिखरती हुई सी लगी,
“मेरी चाहत बन चुकी हो।
ये चाहत जितनी खूबसूरत है… उतनी ही ख़तरनाक भी।”
ज़ारा ने हौले से अपनी उँगलियाँ उसकी हथेली में डाला।
“तो मुझे उस ख़तरे का हिस्सा बना लो।”
उनके बीच का फ़ासला अब लगभग ख़त्म हो चुका था।
साँसें एक-दूसरे में घुल रही थीं।
तभी दरवाज़े पर तेज़ दस्तक हुई।
रायान अचानक सतर्क हो गया।
उसके हाथ स्वाभाविक रूप से ज़ारा के सामने आकर उसे ढकने लगे—
जैसे वह उसकी दुनिया का सबसे अनमोल हिस्सा बन चुकी हो।
“बॉस!”
बाहर से आवाज़ आई,
“हमें ज़रूरी बात करनी है!”
रायान की आँखों में क्रूर चमक लौटी,
लेकिन ज़ारा के लिए उसकी आवाज़ अब भी नरम रही।
“यहीं रहना,” उसने कहा,
“मैं तुम्हें एक पल के लिए भी अकेला नहीं छोड़ना चाहता… लेकिन ये ज़रूरी है।”
ज़ारा ने उसकी जैकेट को पकड़कर रोक लिया।
“कृपया… जल्दी लौट आना।”
रायान पलटकर उसकी ओर आया,
उसके कंधों पर हाथ रखते हुए बोला—
“मेरे पास आने वाली हर हवा, हर धड़कन, हर नज़र… तुमसे जुड़ चुकी है।
मैं लौटकर आऊँगा।
हमेशा।”
वह बाहर चला गया,
पर उसके जाते ही ज़ारा का दिल बेचैनी से भर गया।
कुछ तो था हवा में—जो अजीब, असहज और दर्दभरा था।
कुछ मिनट बाद जब रायान वापस आया,
उसका चेहरा चिंता, गुस्से और बेचैनी से भरा था।
“क्या हुआ?”
ज़ारा ने पूछा।
रायान ने उसका हाथ पकड़ा,
उसे अपने करीब खींच लिया।
उसकी पकड़ में बेचैनी थी… और डर भी।
“ज़ारा… किसी ने तुम्हारे बारे में पता लगा लिया है।”
ज़ारा का दिल धक से रुक गया।
“मतलब?”
रायान ने उसके माथे से गिरती लट को हटाया—
उसके स्पर्श में ग़ुस्सा भी था, जुनून भी, और प्यार भी।
“मतलब… अब तुम मेरी दुनिया का हिस्सा ही नहीं,
मेरी कमजोरी भी बन चुकी हो।”
ज़ारा के होठों पर कांपती हुई मुस्कान आई।
“कमजोरी नहीं… शायद तुम्हारी ताक़त।”
रायान ने उसे सीने से लगा लिया—
अपनी सारी ताक़त और चाहत के साथ।
“तुम मेरी हो, ज़ारा,”
उसने उसकी साँसों के पास फुसफुसाया।
“और अब… मैं किसी को भी तुम तक पहुँचने नहीं दूँगा।
चाहे इसके लिए मुझे दुनिया क्यों न जलानी पड़े।”
उसी पल—
अंधेरे में उनकी कहानी और गहरी, और खतरनाक, और रोमांटिक हो गई।
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