ज़ारा ने उसकी उँगलियों को अपने होठों के पास खींच लिया

रात गहरी थी, हवा ठंडी… लेकिन कमरे में खड़ी ज़ारा और उसके सामने आता रायान—

उनके बीच की गर्मी किसी तूफ़ान से कम नहीं थी।

रायान की आँखें लाल हो चुकी थीं—गुस्से से नहीं,

बल्कि डर और जुनून से भरी हुई।

जैसे ही वह कमरे में आया, ज़ारा उसकी तरफ दौड़ी।

“क्या हुआ? क्यों इतने परेशान हो?”

रायान ने बिना कुछ कहे उसे अपनी बाँहों में जकड़ लिया।

उसकी पकड़ इतनी तीव्र, इतनी गर्म थी कि ज़ारा को लगा जैसे वह उसकी धड़कनों में समा रही हो।

“ज़ारा…”

उसकी आवाज़ टूटने जैसी थी,

“तुम्हें खोने का ख्याल भी मेरे अंदर आग जला देता है।”

ज़ारा ने उसके सीने पर हाथ रखा।

दिल ऐसे धड़क रहा था जैसे सदियों से छुपी चाहत बाहर निकलने को तड़प रही हो।

“मैं कहीं नहीं जाऊँगी,”

उसने धीरे से कहा।

“जब तक तुम मुझे दूर नहीं धकेलते।”

रायान ने उसका चेहरा दोनों हाथों से थाम लिया—

उँगलियों की गर्मी ज़ारा के गालों को पिघला रही थी।

“मैं तुम्हें दूर क्यों धकेलूँगा?”

उसका स्वर गहरा था,

“तुम वो एक चीज़ हो… जो मेरे अंधेरे को रोशन कर देती है।”

ज़ारा की साँसें उसके शब्दों में खोने लगीं।

वह उसके और करीब आई,

इतना करीब कि दोनों के बीच सिर्फ़ गर्मी बची।

रायान ने उसके माथे को हल्के से छुआ—

फुसफुसाहट जैसी नरमी से।

फिर उसकी उँगलियाँ उसके बालों से उतरकर उसकी कमर तक आ गईं।

ज़ारा की रीढ़ तक सिहरन दौड़ गई।

“तुम्हें अंदाज़ा नहीं…”

रायान उसके कान के पास झुककर बोला,

“मैं तुम्हारी साँसों, तुम्हारी खुशबू, तुम्हारी नज़रों… हर पल में खोता जा रहा हूँ।”

ज़ारा ने उसकी शर्ट को कसकर पकड़ा,

“और मैं तुम्हारी इस दीवानगी में।”

कमरा सन्नाटे में डूब गया—

सन्नाटा, जिसमें सिर्फ़ दो दिलों की आवाज़ें थीं।

रायान ने उसे धीरे से दीवार के सहारे किया,

लेकिन स्पर्श में कोई ज़ोर नहीं था—

बस एक गहरी चाहत, एक अनियंत्रित खिंचाव।

उसने ज़ारा की आँखों में देखा।

उन आँखों में विश्वास था, नर्मी थी… और एक सुंदर आग भी।

“अगर दुनिया तुम्हें मेरी कमजोरी समझती है…”

रायान ने उसके गाल को अपनी उँगली से सहलाते हुए कहा,

“तो मैं दुनिया को गलत साबित कर दूँगा।”

ज़ारा ने उसकी उँगलियों को अपने होठों के पास खींच लिया—

नरमी से, जैसे उसका स्पर्श किसी दवा जैसा हो।

“मैं तुम्हारी कमजोरी नहीं,”

उसने फुसफुसाया,

“मैं तुम्हारी ताक़त बनना चाहती हूँ।”

रायान की साँसें भारी हो गईं।

उसका हाथ ज़ारा की कमर पर कस गया—

गर्मी इतनी तेज़ कि ज़ारा की साँसें गले में अटक गईं।

“तुम…”

रायान ने उसकी गर्दन के पास झुकते हुए कहा,

“मेरी सबसे खूबसूरत चाहत हो, ज़ारा।

और मैं इस चाहत को… किसी भी कीमत पर खोने नहीं दूँगा।”

ज़ारा ने उसे अपनी बाँहों में खींच लिया—

जुनून और नर्मी के मिलन जैसा आलिंगन।

उस पल, दुनिया बाहर कहीं खो गई।

बस रायान था, ज़ारा थी,

और उनके बीच सुलगती हुई वह गहरी, खतरनाक, रोमांटिक चाहत—

जो हर पल और गहराई में उतरती जा रही थी।

रायान ने उसकी आँखों में देखा और कहा—

“अब तुम सिर्फ़ मेरे अंधेरे का हिस्सा नहीं…

मेरी धड़कन बन चुकी हो।”

और ज़ारा मुस्कुरा उठी—

धीमी, गर्म, और रायान के दिल पर सीधे उतरती हुई।

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