“कीचड़ में खिलता कमल”

“कीचड़ में खिलता कमल”

Chapter 1: शुरुआत

“कभी-कभी जिंदगी इतनी मुश्किल हो जाती है…

कि इंसान हार मान लेने के बारे में सोचने लगता है…”

लेकिन…

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,

जो हर दर्द, हर तकलीफ सहकर भी टूटते नहीं—

बल्कि और मजबूत बन जाते हैं।

ये कहानी है ऐसे ही एक लड़के की…

सिकाजू की।

एक ऐसा लड़का…

जो कीचड़ में पैदा हुआ,

लेकिन सपना कमल की तरह खिलने का देखता था। 🌸

बिहार के एक छोटे से गाँव में जन्मा सिकाजू

एक बहुत ही मासूम, निडर और खुशमिजाज बच्चा था।

न उसे किसी बात की चिंता थी,

न किसी का डर…

वो अपनी ही दुनिया में रहता था—

हंसता, खेलता, और छोटी-छोटी खुशियों में जीता था। 😊

वो अपनी माँ का सबसे प्यारा था।

उसकी माँ उसे बहुत प्यार करती थी…

इतना कि उसे हमेशा अपने पास, अपने दिल के करीब रखती थी।

वो एक मजबूत और सहनशील औरत थी,

जो अपने बच्चों के लिए हर दर्द चुपचाप सह जाती थी।

लेकिन…

हर कहानी इतनी खूबसूरत नहीं होती।

सिकाजू के पिता एक शराबी इंसान थे।

उन्हें अपने परिवार से कोई मतलब नहीं था…

हर दिन वो शराब के नशे में घर आते,

घर में हंगामा करते, चिल्लाते…

और कभी-कभी तो हाथ भी उठा देते।

घर का माहौल हर दिन और भी डरावना होता जा रहा था।

सिकाजू सब कुछ समझता था…

वो अपनी माँ की आँखों में छिपा दर्द देखता था,

उसकी चुप्पी को महसूस करता था…

लेकिन वो इतना छोटा था कि कुछ कर भी नहीं सकता था।

उसका दिल हर बार टूट जाता था,

जब वो अपनी माँ को इस हालत में देखता। 💔

उसका बड़ा भाई भी इस माहौल से बच नहीं पाया…

जिम्मेदारी लेने के बजाय,

वो गलत संगत में पड़ गया…

और धीरे-धीरे अपने पिता की तरह बनता चला गया—

शराब, लापरवाही और बुरी आदतों में खोया हुआ।

ये सब देखकर सिकाजू के दिल में एक गहरा दर्द बस गया था…

कई बार उसने सोचा…

क्या उसकी जिंदगी हमेशा ऐसी ही रहेगी?

लेकिन…

वो चुप रहा।

हर दर्द को अंदर ही अंदर सहता रहा…

बिना किसी से कुछ कहे।

शायद उसे भी नहीं पता था…

कि ये चुप्पी ही एक दिन उसके अंदर तूफान बन जाएगी। 🌪️

और उसी दिन से…

उसकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लेना शुरू कर दिया था।

वो कई बार रात में चुपचाप बैठकर सोचता था…

कि आखिर उसकी जिंदगी इतनी मुश्किल क्यों है।

क्या उसने कोई गलती की है…

या फिर किस्मत ही उसके साथ खेल खेल रही है?

उसकी आँखों में सपने तो बहुत थे,

लेकिन हर बार हालात उन सपनों को तोड़ देते थे।

फिर भी…

उसने अपने अंदर एक छोटी सी उम्मीद जिंदा रखी थी।

शायद एक दिन सब कुछ बदल जाएगा…

शायद एक दिन उसकी माँ की आँखों में भी सच्ची खुशी होगी।

और इसी उम्मीद के साथ

वो हर दिन अपने दर्द को छुपाकर मुस्कुराने की कोशिश करता रहा…

❓ अब सवाल ये है…

क्या सिकाजू हमेशा ऐसे ही चुप रहकर सब सहता रहेगा…

या फिर एक दिन वो अपनी जिंदगी बदलने के लिए खड़ा होगा? 😔 “आइए जानते हैं…”

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