कभी-कभी किस्मत इतनी बेरहम हो जाती है…
कि इंसान चाहे कितना भी संभलकर चले…
वो उसे गिराने का रास्ता ढूंढ ही लेती है…
उस रात भी कुछ ऐसा ही होने वाला था…
जिसका असर सिकाजू की पूरी जिंदगी पर पड़ने वाला था…
सिकाजू बार-बार कोशिश कर रहा था—
एक सही काम ढूंढने की…
एक ऐसी जिंदगी की, जहाँ उसे किसी के सामने झुकना न पड़े।
“मुझे कुछ तो करना ही होगा…”
वो खुद से बुदबुदाया,
“अब और इस हालत में नहीं जी सकता…”
लेकिन…
हर दरवाज़ा उसके लिए बंद था।
जहाँ भी वो काम मांगने जाता—
उसे ठुकरा दिया जाता।
“तू अभी छोटा है…”
“तेरे पास experience नहीं है…”
“हम तुझे काम नहीं दे सकते…”
हर बार वही जवाब…
सिकाजू की उम्मीद धीरे-धीरे टूटने लगी।
तभी…
उसकी जिंदगी में उसके कुछ दोस्त आए।
“अरे सिकाजू, इतना टेंशन क्यों लेता है?”
एक दोस्त हँसते हुए बोला।
“हम हैं ना… तुझे पैसा कमाने का आसान तरीका बताते हैं…”
सिकाजू थोड़ा हिचकिचाया,
“कैसा तरीका…?”
दूसरा दोस्त मुस्कुराया—
“बस थोड़ा risk है… लेकिन पैसा बहुत है 💸”
सिकाजू चुप हो गया…
उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात घूम रही थी—
पैसा…
घर की हालत…
माँ की मेहनत…
अपनी बेबसी…
सब कुछ उसके सामने आ गया।
“क्या करूँ…?”
उसने मन ही मन सोचा।
और फिर…
एक गलत फैसला…
उसकी जिंदगी बदलने वाला था।
धीरे-धीरे…
वो अपने दोस्तों के साथ जुड़ गया—
शराब तस्करी (Alcohol Smuggling) में।
रात होते ही…
सिकाजू घर से निकल जाता।
अंधेरी सड़कों से गुजरते हुए…
नेपाल से शराब लाता…
और गाँव में बेचता।
“जल्दी कर… कोई देख ना ले!”
दोस्त फुसफुसाते।
“डर मत… सब सेट है…”
दूसरा हँसते हुए कहता।
सिकाजू का दिल जोर-जोर से धड़कता…
लेकिन वो रुकता नहीं था।
हर रात…
वो खुद को इस अंधेरे में और गहराई तक धकेल रहा था।
कुछ ही दिनों में—
उसकी जेब पैसे से भरने लगी 💸
“इतना पैसा…?”
सिकाजू हैरान था।
“देखा… कहा था ना!”
दोस्त हँसे।
लेकिन…
इस पैसे के साथ—
एक और चीज़ धीरे-धीरे उसके अंदर घुस रही थी…
लालच…
अब उसे फर्क नहीं पड़ता था—
क्या सही है… क्या गलत…
बस पैसा चाहिए था।
लेकिन…
इस गलत रास्ते का असर उसके घर पर दिखने लगा।
उसके पिता और भाई—
अब और ज्यादा शराब पीने लगे।
“ये सब तेरी वजह से हो रहा है!”
माँ रोते हुए बोली।
“मैं क्या करूँ माँ…?”
सिकाजू चिल्लाया,
“घर चलाने के लिए ही तो कर रहा हूँ!”
लेकिन सच…
दोनों जानते थे…
घर का माहौल बिगड़ चुका था।
हर दिन झगड़ा…
हर दिन चीख-पुकार…
शांति जैसे घर छोड़कर जा चुकी थी।
गाँव में भी—
लोग बातें करने लगे।
“वो देखो… वही लड़का…”
“अब गलत काम करने लगा है…”
कुछ लोग उससे दूर रहने लगे…
तो कुछ लोग उसे फँसाने के मौके ढूंढने लगे।
धीरे-धीरे…
सिकाजू को सब समझ आने लगा।
एक दिन…
उसने अपने दोस्त को पैसे गिनते देखा।
“इतने पैसे…?”
सिकाजू चौंका।
“मुझे तो कम मिले…”
दोस्त थोड़ा घबरा गया,
“अरे… कुछ नहीं… बस खर्चा निकल गया…”
सिकाजू की आँखें सिकुड़ गईं।
“सच बोल…”
उसने सख्त आवाज में कहा।
और तभी—
उसे सच्चाई समझ आ गई।
जिसे वो अपना दोस्त समझता था…
वही उसे धोखा दे रहा था।
ज्यादा पैसा खुद रखता…
और सिकाजू को कम देता।
उसका दिल टूट गया।
“मैं किस पर भरोसा कर रहा था…?”
उसने खुद से कहा।
उस रात…
सिकाजू बहुत देर तक सो नहीं पाया।
उसके दिमाग में सिर्फ एक ही सवाल था—
क्या ये रास्ता सही है…?
और फिर…
उसे अपने बचपन की याद आई…
अपने पिता…
उनकी शराब…
घर की बर्बादी…
उसकी आँखों से आंसू निकल पड़े।
“नहीं…”
उसने धीरे से कहा,
“मैं ये सब दोबारा नहीं होने दूँगा…”
अगले दिन—
उसके दोस्तों ने फिर उसे बुलाया।
“चल आज थोड़ा मज़ा करते हैं…”
एक ने शराब की बोतल आगे बढ़ाई।
“पी ले… सब पीते हैं…”
सिकाजू पीछे हट गया।
“नहीं… मैं नहीं पीऊँगा…”
“क्यों?”
दोस्त हँसा,
“डरता है क्या?”
सिकाजू की आँखों में गुस्सा आ गया।
“ये ज़हर है…”
उसने सख्त आवाज में कहा,
“इसने मेरा घर बर्बाद किया है…”
“मैं इसे कभी हाथ नहीं लगाऊँगा!”
दोस्त हँसते रह गए…
लेकिन सिकाजू के अंदर कुछ बदल चुका था।
हाँ…
वो शराब बेचता था…
लेकिन खुद कभी नहीं पीता था।
क्योंकि वो जानता था—
ये रास्ता सिर्फ बर्बादी की ओर जाता है।
उस रात…
सिकाजू अपने घर की छत पर बैठा था।
ठंडी हवा चल रही थी…
आसमान शांत था…
लेकिन उसके अंदर तूफान चल रहा था।
“मैं क्या कर रहा हूँ अपनी जिंदगी के साथ…?”
उसने खुद से पूछा।
“क्या मैं भी अपने पापा जैसा बन जाऊँगा…?”
उसकी आँखें भर आईं।
तभी…
अचानक उसके दिमाग में एक ख्याल आया… 💭
एक ऐसा ख्याल—
जो सब कुछ बदल सकता था…
या फिर…
उसे और गहरे अंधेरे में धकेल सकता था…
🔥
आखिर वो ख्याल क्या था…?
क्या सिकाजू इस गलत रास्ते को छोड़ पाएगा…?
या फिर लालच उसे पूरी तरह निगल जाएगा…?
👉 आगे क्या होगा, जानने के लिए पढ़ते रहिए सिकाजू की कहानी…
आपको क्या लगता है—सिकाजू सही रास्ता चुनेगा या फिर और फँस जाएगा? कमेंट करके ज़रूर बताइए। 😶🔥
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