“तुम…?”
सिकाजू की आवाज कांप रही थी…
उसके सामने खड़ा शख्स धीरे-धीरे अंधेरे से बाहर आया…
वो उसका चाचा था।
“इतनी रात में यहाँ क्या कर रहे हो… सिकाजू?”
चाचा ने गंभीर आवाज में पूछा।
सिकाजू कुछ पल चुप रहा…
उसका दिल अभी भी तेज़ धड़क रहा था।
“मैं… बस ऐसे ही…”
उसने नजरें चुराते हुए कहा।
चाचा ने उसकी आँखों में देखा—
जैसे वो सब समझ गए हों।
“सच बोलो…”
उन्होंने सख्त आवाज में कहा,
“तुम किस रास्ते पर चल पड़े हो?”
सिकाजू के पास कोई जवाब नहीं था…
उसकी आँखें झुक गईं।
कुछ पल की खामोशी के बाद—
उसकी आँखों से आंसू बहने लगे।
“मैं… गलत रास्ते पर चला गया था चाचा…”
उसने टूटती आवाज में कहा,
“लेकिन अब… मैं सब छोड़ना चाहता हूँ…”
चाचा थोड़ी देर तक उसे देखते रहे…
फिर उन्होंने धीरे से कहा—
“अभी भी वक्त है… संभल जाओ।”
उस रात…
सिकाजू की जिंदगी बदल गई।
अगली सुबह…
सिकाजू की आँखों में एक अलग ही चमक थी।
अब उसके लिए जिंदगी सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं रही थी…
बल्कि—
अपने घर की टूटी खुशियों को जोड़ने का सपना बन चुकी थी।
उसे अपनी माँ की वो आँखें याद आईं—
जो हर दिन रोती थीं…
“मैं सब ठीक कर दूँगा माँ…”
उसने मन ही मन कहा।
अब उसने खुद से एक वादा किया—
“मैं उस अंधेरे रास्ते पर कभी वापस नहीं जाऊँगा…”
कुछ दिनों बाद…
सिकाजू ने एक बड़ा फैसला लिया।
“मुझे कुछ बड़ा करना है…”
उसने खुद से कहा।
“लेकिन इस बार… सही तरीके से।”
वो अपने गाँव को छोड़कर
अपने चाचा के पास रहने चला गया।
चाचा का घर…
गाँव से थोड़ा दूर था…
और वहाँ का माहौल थोड़ा शांत था।
पहली बार…
सिकाजू को लगा जैसे उसे थोड़ी शांति मिली हो।
एक दिन…
“चाचा…”
सिकाजू ने हिम्मत जुटाकर कहा,
“क्या आप मुझे बाहर भेज सकते हैं…? विदेश…”
चाचा ने उसकी तरफ देखा।
“विदेश?”
उन्होंने पूछा,
“तुम वहाँ जाकर क्या करोगे?”
सिकाजू की आँखों में चमक थी—
“मैं कुछ बनना चाहता हूँ…”
उसने दृढ़ आवाज में कहा,
“मैं अपनी माँ के सारे सपने पूरे करना चाहता हूँ…”
चाचा चुप हो गए…
उन्हें पता था—
ये रास्ता आसान नहीं है।
असलियत ये थी कि…
सिकाजू सिर्फ 10वीं पास था।
ना आगे पढ़ाई करने के लिए पैसे थे…
ना वक्त…
उसकी जिंदगी ने उसे मजबूर कर दिया था—
कि वो पढ़ाई बीच में ही छोड़ दे।
अब उसके पास सिर्फ एक ही रास्ता था—
मेहनत… और संघर्ष…
गाँव में…
कोई उसका साथ नहीं देता था।
“इससे दूर रहो…”
लोग कहते।
“ये लड़का ठीक नहीं है…”
हर कोई उसे नीची नजर से देखता…
लेकिन—
उसका चाचा अलग था।
उसने उसकी माँ का दर्द करीब से देखा था।
उसे पता था—
ये लड़का अंदर से बुरा नहीं है…
बस हालात ने इसे गलत बना दिया था।
एक दिन…
चाचा ने उसे बुलाया।
“सिकाजू…”
उन्होंने कहा,
“मैं कुछ दिनों में तुम्हारा पासपोर्ट और वीजा बनवा दूँगा।”
सिकाजू की आँखें चमक उठीं।
“सच में चाचा…?”
उसने खुशी से पूछा।
“हाँ…”
चाचा मुस्कुराए,
“लेकिन तब तक… तुम्हें यहाँ मेहनत करनी होगी।”
सिकाजू ने बिना सोचे कहा—
“मैं तैयार हूँ!”
उस दिन के बाद…
उसकी जिंदगी में फिर से एक नई उम्मीद जाग उठी।
वो फिर से सपने देखने लगा…
“मैं विदेश जाऊँगा…”
“मैं कुछ बड़ा बनूँगा…”
दिन बीतने लगे…
फिर हफ्ते…
और धीरे-धीरे महीने…
इंतजार लंबा होता जा रहा था…
लेकिन इस बार—
सिकाजू ने ठान लिया था कि वो खाली नहीं बैठेगा।
“मुझे काम करना होगा…”
उसने खुद से कहा।
और फिर—
उसने एक छोटा सा काम शुरू किया—
पिज़्ज़ा डिलीवरी 🍕
दिन हो या रात…
बारिश हो या तेज धूप…
वो बिना रुके काम करता रहा।
“भैया जल्दी पहुँचाना है…”
दुकानदार कहता।
“हाँ, अभी ले जा रहा हूँ!”
सिकाजू जवाब देता।
कभी वो भीगता हुआ जाता…
कभी पसीने में भीगा हुआ…
लेकिन वो रुका नहीं।
धीरे-धीरे…
उसने कुछ पैसे बचाने शुरू किए।
“जब मैं विदेश जाऊँगा…
तो ये काम आएंगे…”
उसने मन ही मन सोचा।
अब उसकी आँखों में फिर से उम्मीद थी…
लेकिन—
जिंदगी इतनी आसान कहाँ होती है…
एक दिन…
उसका फोन बजा।
“हेलो?”
सिकाजू ने उठाया।
दूसरी तरफ उसके चाचा थे।
“सिकाजू… तुरंत घर आओ।”
उनकी आवाज थोड़ी गंभीर थी।
सिकाजू का दिल धड़क उठा।
“क्या हुआ चाचा…?”
उसने घबराकर पूछा।
“बस… आ जाओ… फिर बात करते हैं…”
कॉल कट हो गया।
सिकाजू कुछ पल वहीं खड़ा रह गया…
उसके दिमाग में हजारों सवाल घूमने लगे—
“क्या मेरा वीजा आ गया…?”
“या कोई परेशानी हो गई…?”
“या फिर… कुछ और…?”
उसकी सांसें तेज हो गईं…
उसे महसूस हो रहा था—
इस बार…
जिंदगी उसे एक ऐसे मोड़ पर ले जा रही है…
जहाँ से वापस आना आसान नहीं होगा…
🔥
आखिर चाचा ने उसे इतनी जल्दी क्यों बुलाया…?
क्या सच में उसका विदेश जाने का सपना पूरा होने वाला था…
या फिर कोई ऐसा सच सामने आने वाला था…
जो उसकी पूरी जिंदगी बदल देगा…?
👉 आगे क्या होगा, जानने के लिए पढ़ते रहिए सिकाजू की कहानी…
आपको क्या लगता है—चाचा क्या बताने वाले हैं? कमेंट करके ज़रूर बताइए। 😶🔥
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