Chapter 2: संघर्ष की शुरुआत

“कोई भी नहीं जानता था… कि ये छोटा सा बच्चा एक दिन इतना टूटा हुआ, लेकिन उतना ही मजबूत और मेहनती इंसान बन जाएगा…”

जिस उम्र में उसे किताबों में खो जाना चाहिए था,

उस उम्र में वो घर की जिम्मेदारियों के बोझ तले दब चुका था।

उसके पिता और भाई की वजह से उसकी जिंदगी कभी स्थिर नहीं रही।

घर में रोज झगड़े, चीख-पुकार, टूटते बर्तन…

और कोने में खड़ा सिकाजू, चुपचाप सब कुछ सहता हुआ।

कई बार तो वो रात-रात भर सो नहीं पाता था…

सिर्फ यही सोचते हुए कि आखिर उसकी जिंदगी कब बदलेगी।

बेहतर जिंदगी की उम्मीद में वो अपना गाँव छोड़कर दूसरे राज्य चला गया…

दिल में एक छोटी सी उम्मीद लेकर कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन वहाँ भी कुछ नहीं बदला।

पिता और भाई की शराब की आदतें,

घर की गरीबी,

और हर दिन बढ़ती परेशानियाँ—

सब कुछ पहले जैसा ही रहा… बल्कि और भी बुरा हो गया।

सिकाजू पढ़ाई में बहुत तेज था।

शिक्षक भी उसकी तारीफ करते थे, कहते थे—

“अगर ये बच्चा सही माहौल में होता, तो बहुत आगे जाता…”

लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था।

घर की हालत इतनी खराब थी कि वो स्कूल भी नियमित नहीं जा पाता था…

कभी फीस की समस्या, तो कभी घर के काम…

और धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई अधूरी रह गई।

हर बार जब वो किताब खोलता,

कोई न कोई परेशानी उसे फिर से बंद करने पर मजबूर कर देती।

फिर एक दिन… सब कुछ फिर से बदल गया।

लॉकडाउन लगा,

और उसे मजबूर होकर वापस अपने गाँव लौटना पड़ा।

कुछ साल उसने वहीं बिताए…

और इसी दौरान उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उसने कभी उम्मीद भी नहीं की थी…

❤️ उसे प्यार हो गया।

वो लड़की उसकी जिंदगी की पहली खुशी थी…

उसके साथ बिताए छोटे-छोटे पल, उसकी मुस्कान, उसकी बातें—

सब कुछ सिकाजू के दिल में बस गया था।

पहली बार उसे लगा…

कि शायद जिंदगी इतनी बुरी भी नहीं है।

लेकिन… उसकी जिंदगी कभी आसान नहीं रही।

घर के झगड़े खत्म होने का नाम ही नहीं लेते थे,

और हर बार उसे गाँव छोड़कर जाना पड़ता…

और हर बार…

वो उस लड़की से दूर हो जाता, जिसे वो दिल से चाहता था।

दूरी बढ़ती गई…

और उसके दिल में दर्द भी।

समय बीतता गया…

और उसकी बोर्ड परीक्षा का समय आ गया।

पढ़ाई जारी रखने के लिए वो अपने मामा के घर चला गया।

लेकिन उसका दिल कहीं और ही अटका हुआ था…

वो अपने प्यार को बहुत याद करता था,

रातों को चुपके से रोता था…

लेकिन हालात ऐसे थे कि वो चाहकर भी वापस गाँव नहीं जा सकता था।

वो अकेला था…

पूरी तरह से अकेला।

गाँव के लोग भी उसे पसंद नहीं करते थे,

क्योंकि उसके पिता और भाई पहले ही उसकी छवि खराब कर चुके थे।

और आखिरकार…

गरीबी और मजबूरी के आगे उसे हार माननी पड़ी…

उसे अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

उस दिन उसने आईने में खुद को देखा…

और पहली बार उसे लगा कि अब उसे बदलना होगा।

अब उसने एक फैसला लिया…

🔥 वो काम करेगा…

वो अपनी जिंदगी बदलेगा…

चाहे इसके लिए उसे कितनी भी मेहनत क्यों न करनी पड़े।

लेकिन…

उसके संघर्ष अभी खत्म नहीं हुए थे…

क्योंकि…

👉 उसे काम भी नहीं मिल रहा था।

❓ अब सवाल ये है…

जब हर रास्ता बंद नजर आ रहा है…

तो क्या सिकाजू हार मान लेगा,

या फिर वो अपनी किस्मत खुद लिखने की हिम्मत करेगा? 😔🔥

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