हवेली की पहली रात

आआआआआह्ह्ह्ह.

चीख अभी भी हवेली की दीवारों में गूंज रही थी.

उस भयावह आवाज की प्रतिध्वनि जैसे हर कोने से टकराकर वापस लौट रही थी. पुरानी दीवारें, टूटी हुई छत और जर्जर खिडकियाँ उस चीख को अपने भीतर समेटे हुए थीं. ऐसा लग रहा था मानो हवेली खुद उस दर्दनाक आवाज को बार- बार दोहरा रही हो.

लेकिन अगले ही पल.

सब कुछ अचानक शांत हो गया.

सन्नाटा इतना गहरा था कि अपनी ही सांसों की आवाज साफ सुनाई दे रही थी.

हवा भी जैसे रुक गई थी. टूटी खिडकियों से आती ठंडी हवा का झोंका भी थम चुका था. पूरे कमरे में एक अजीब- सी बेचैनी फैल गई थी.

आराध्या की आँखें खुलीं तो वह हवेली के उसी कमरे में थी.

जहाँ उसने डायरी उठाई थी.

डायरी अब भी जमीन पर पडी थी.

लेकिन अब उसका आखिरी पन्ना खुला हुआ था.

और उस पर लिखा“ अगला शिकार — आराध्या” धीरे- धीरे धुंधला हो रहा था. जैसे स्याही नहीं. कुछ और ही मिट रहा हो.

रोहन घबराकर बोला:

आराध्या. हमें यहाँ से निकलना चाहिए!

उसकी आवाज में साफ डर झलक रहा था. उसके चेहरे का रंग उड चुका था और हाथ काँप रहे थे.

आराध्या ने जल्दी से डायरी उठाई.

लेकिन जैसे ही उसने उसे छुआ.

दरवाजा अपने आप बंद हो गया.

धडाम!

आवाज इतनी तेज थी कि पूरा कमरा काँप उठा.

हवेली की धूल उडकर हवा में फैल गई.

अंधेरा और गहरा हो गया.

तभी ऊपर से फिर वही आवाज आई.

धम. धम. धम.

कोई धीरे- धीरे सीढियाँ उतर रहा था.

हर कदम के साथ आवाज और साफ होती जा रही थी. ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत पुरानी और भारी चीज उनकी तरफ बढ रही हो.

आराध्या ने कांपते हुए ऊपर देखा.

लेकिन इस बार वहाँ कोई साफ दिखाई नहीं दे रहा था.

सिर्फ एक परछाईं.

जो दीवार पर चल रही थी. लेकिन उसका शरीर कहीं नहीं था.

रोहन पीछे हट गया:

ये. ये क्या है?

उसकी आँखें डर से फैल गई थीं.

तभी डायरी अपने आप खुल गई.

उसके पन्ने तेजी से पलटने लगे.

फड. फड. फड.

और फिर अचानक रुक गए.

उस पन्ने पर अब नया संदेश लिखा था:

पहली रात शुरू हो चुकी है.

आराध्या ने जैसे ही ये पढा.

पूरा कमरा हिलने लगा.

खिडकियाँ अपने आप खुल- बंद होने लगीं.

पुरानी लकडियों की चरमराहट पूरे कमरे में गूंजने लगी.

और हवेली के हर कोने से फुसफुसाहट आने लगी:

वापस जाओ.

वरना तुम भी यहाँ रह जाओगी.

वे आवाजें इतनी धीमी थीं कि समझ नहीं आ रहा था कि वे सच थीं या सिर्फ भ्रम.

आराध्या की आँखों में डर और सवाल दोनों थे.

ये डायरी आखिर चाहती क्या है?

तभी रोहन ने इशारा किया.

दीवार पर एक नया दरवाजा दिखाई दिया था.

जो पहले वहाँ था ही नहीं.

पुरानी दीवार के बीचों- बीच अचानक उभरा वह दरवाजा बेहद रहस्यमयी लग रहा था.

उस पर लिखा था:

सच वहीं है. जहाँ जाना मना है।

अचानक परछाईं तेजी से उनकी तरफ बढी.

और रोहन चिल्लाया:

भागो!

दोनों उस नए दरवाजे की तरफ दौडे.

उनके कदमों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी.

जैसे ही आराध्या ने दरवाजे को छुआ.

एक तेज चमक हुई.

और दोनों अंदर खिंच गए.

दरवाजा अपने आप बंद हो गया.

और हवेली फिर से खामोश हो गई.

लेकिन इस बार.

किसी और के कदमों की आवाज अंदर से आ रही थी.

धीरे- धीरे.

और लगातार.

मानो कोई उनका इंतजार कर रहा हो.

क्रमशः.

क्या वह नया कमरा हवेली का सबसे बडा सच छुपाता है?

आखिर उन कदमों की आवाज किसकी थी?

और क्या आराध्या इस रहस्य से जिंदा बाहर निकल पाएगी?

आपको क्या लगता है, हवेली में कौन छिपा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए.

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