बंद कमरे की फुसफुसाहट

तेज चमक के बाद आराध्या और रोहन जमीन पर आ गिरे.

कुछ क्षणों तक दोनों को समझ ही नहीं आया कि उनके साथ क्या हुआ था.

उनके कानों में अभी भी एक अजीब- सी गूंज सुनाई दे रही थी. ऐसा लग रहा था मानो वे किसी दूसरी दुनिया से होकर यहाँ पहुँचे हों. दोनों की साँसें तेज चल रही थीं और दिल बेकाबू होकर धडक रहा था.

जब आराध्या ने धीरे- धीरे आँखें खोलीं, तो उसने खुद को एक अजीब कमरे में पाया.

कमरा गोल आकार का था. चारों तरफ पुरानी पत्थर की दीवारें थीं, जिन पर नमी जमी हुई थी. कई जगहों पर पत्थरों के बीच दरारें दिखाई दे रही थीं. छत से लटकता एक टूटा हुआ झूमर हवा के बिना ही धीरे- धीरे हिल रहा था.

उसकी चरमराहट पूरे कमरे में गूंज रही थी.

रोहन ने काँपती आवाज में पूछा,

हम. हम कहाँ आ गए हैं?

आराध्या ने चारों तरफ नजर दौडाई.

यह कमरा हवेली के बाकी हिस्सों से बिल्कुल अलग था.

कमरे में एक भी खिडकी नहीं थी.

सिर्फ एक पुराना लकडी का दरवाजा था, जिस पर लोहे की भारी जंजीरें लगी हुई थीं.

जंजीरों पर जंग लगी हुई थी, मानो उन्हें वर्षों से किसी ने छुआ तक न हो.

अचानक कमरे में किसी के फुसफुसाने की आवाज गूँजी.

वापस जाओ.

दोनों चौंक पडे.

आवाज इतनी धीमी थी कि जैसे कोई उनके कान के बिल्कुल पास बोल रहा हो.

लेकिन वहाँ कोई नहीं था.

कमरे का हर कोना खाली था.

कौन है? आराध्या ने डरते हुए पूछा.

कोई जवाब नहीं मिला.

कुछ पल बाद फिर वही आवाज सुनाई दी.

वापस जाओ. अभी भी समय है.

इस बार आवाज पहले से ज्यादा स्पष्ट थी.

रोहन घबराकर आराध्या के पास आ गया.

मुझे यह जगह बिल्कुल ठीक नहीं लग रही।

उसकी आँखों में डर साफ दिखाई दे रहा था.

तभी आराध्या की नजर कमरे के बीचों- बीच रखी एक पत्थर की मेज पर पडी.

उस पर धूल से ढका एक छोटा लकडी का डिब्बा रखा था.

डिब्बा बेहद पुराना लग रहा था.

उसकी सतह पर अजीब निशान बने हुए थे जिन्हें समझ पाना मुश्किल था.

वह सावधानी से उसके पास पहुँची.

जैसे ही उसने डिब्बे को छुआ, कमरे का तापमान अचानक बहुत कम हो गया.

साँसों से धुंध निकलने लगी.

कमरे की हवा बर्फ जैसी ठंडी महसूस होने लगी.

रोहन घबराकर पीछे हट गया.

इसे मत खोलो!

लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी.

आराध्या ने डिब्बा खोल दिया.

अंदर एक पुरानी काले- सफेद तस्वीर थी.

तस्वीर में एक परिवार हवेली के सामने खडा था.

तस्वीर के किनारे पीले पड चुके थे और उस पर समय के निशान साफ दिखाई दे रहे थे.

लेकिन तस्वीर को ध्यान से देखते ही आराध्या का दिल रुकने जैसा हो गया.

उस तस्वीर में खडी एक लडकी बिल्कुल उसी जैसी दिख रही थी.

वही चेहरा.

वही आँखें.

वही मुस्कान.

ये. ये कैसे हो सकता है? वह बुदबुदाई.

उसके हाथ काँपने लगे.

तभी तस्वीर के पीछे कुछ लिखा दिखाई दिया.

काँपते हाथों से उसने तस्वीर पलटी.

उस पर लिखा था—

श्राप कभी खत्म नहीं होता. वह लौटकर आता है.

ये शब्द पढते ही उसकी रीढ में सिहरन दौड गई.

अचानक कमरे की दीवारों पर खरोंचने की आवाज आने लगी.

खर्र. खर्र.

खर्र. खर्र.

जैसे कोई पत्थर के पीछे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो.

आवाज धीरे- धीरे तेज होती जा रही थी.

रोहन डर के मारे चिल्ला उठा.

आराध्या! दीवार देखो!

दीवार पर अचानक लाल रंग के शब्द उभरने लगे.

ऐसा लग रहा था मानो किसी अदृश्य हाथ ने उन्हें अभी- अभी लिखा हो.

धीरे- धीरे पूरा वाक्य दिखाई देने लगा—

उसे जगा मत देना.

दोनों के चेहरों का रंग उड गया.

किसे? आराध्या फुसफुसाई.

लेकिन तभी.

धम!

कमरे का दरवाजा अपने आप खुल गया.

आवाज इतनी भयानक थी कि दोनों एक पल के लिए वहीं जड हो गए.

बाहर घना अंधेरा था.

और उस अंधेरे के बीच एक लंबा गलियारा दिखाई दे रहा था.

गलियारे की दीवारों पर लगे पुराने चित्र आधे अंधेरे में और भी डरावने लग रहे थे.

गलियारे के अंत में किसी ने लालटेन पकड रखी थी.

एक सफेद साया.

वह बिना हिले खडा था.

उसके चेहरे की जगह सिर्फ अंधेरा दिखाई दे रहा था.

कुछ सेकंड तक सब शांत रहा.

फिर अचानक वह साया मुडा.

और अंधेरे में गायब हो गया.

उसी क्षण डायरी अपने आप खुल गई.

उसके पन्ने तेजी से पलटने लगे.

फड. फड. फड.

और फिर एक पन्ने पर आकर रुक गए.

उसके नए पन्ने पर सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी—

अगर सच जानना है. तो उसका पीछा करो।

आराध्या और रोहन ने एक- दूसरे की तरफ देखा.

उनके सामने दो रास्ते थे.

वापस लौट जाना.

या उस रहस्यमयी साये का पीछा करना.

लेकिन उन्हें नहीं पता था कि गलियारे के आखिर में उनका इंतजार सिर्फ सच नहीं.

बल्कि मौत भी कर रही थी.

और सबसे डरावनी बात यह थी कि जिस साये का वे पीछा करने वाले थे. वह पहले से ही उनके पीछे खडा था.

क्रमशः.

आखिर तस्वीर में दिखने वाली आराध्या जैसी लडकी कौन थी?

दीवार पर लिखे" उसे जगा मत देना" का क्या मतलब था?

गलियारे के अंत में खडा वह रहस्यमयी साया कौन था?

क्या आराध्या और रोहन उसका पीछा करेंगे, या फिर कोई भयानक जाल उनका इंतजार कर रहा है?

और सबसे बडा सवाल—हवेली में ऐसा कौन छिपा है, जिसका नाम सुनकर लोग आज भी डर जाते हैं?

आपको क्या लगता है? वह साया दोस्त है या दुश्मन? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए.

कहानी पसंद आ रही हो तो इसे लाइक करें, शेयर करें और फॉलो करना न भूलें, ताकि" हवेली के अंधेरे राज" का अगला रहस्यमयी अध्याय आपसे छूट न जाए.

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