हवेली के अंधेरे राज़

हवेली के अंधेरे राज़

डायरी में मेरी मौत पहले से लिखी थी…

रात के लगभग ग्यारह बजे थे।

पूरा गाँव गहरी खामोशी में डूबा हुआ था।

लेकिन उस खामोशी के बीच अचानक—

आराध्या की आँखें खुल गईं।

किसी ने उसके कान के बहुत पास धीमी आवाज़ में फुसफुसाया था…

“आराध्या…”

वह झटके से उठ बैठी।

कमरे में अंधेरा था, सिर्फ खिड़की से आती हल्की चाँदनी फर्श पर पड़ी थी।

“ये… आवाज़ किसने दी?” उसने घबराकर चारों ओर देखा।

कोई नहीं था।

फिर भी उसे महसूस हो रहा था… जैसे कोई अभी भी वहीं खड़ा है।

धीरे-धीरे वह बिस्तर से उठी और खिड़की की तरफ बढ़ी।

जैसे ही उसने पर्दा हटाया—

उसकी साँस अटक गई।

गाँव के बाहर पहाड़ी पर बनी पुरानी हवेली…

आज पहली बार जागी हुई लग रही थी।

उसकी एक खिड़की में हल्की पीली रोशनी जल रही थी।

आराध्या का दिल तेज़ी से धड़कने लगा।

“इतनी रात को… वहाँ कौन होगा?”

कुछ सेकंड बाद ही—

वो रोशनी अचानक बुझ गई।

जैसे वहाँ कभी कुछ था ही नहीं।

और उसी पल…

पीछे कमरे में कुछ गिरने की आवाज़ आई।

ठक!

आराध्या पलटी।

कमरा खाली था।

लेकिन अब हवा में ठंडक बढ़ चुकी थी।

अगली सुबह आराध्या ने यह बात अपने दोस्त रोहन को बताई।

रोहन पहले हँसा—

“तुम सपने देख रही थी शायद।”

लेकिन जैसे-जैसे आराध्या ने हवेली वाली बात बताई, उसकी आवाज़ गंभीर होती गई।

“अगर सच में वहाँ रोशनी थी… तो हमें देखना चाहिए।”

कुछ देर की चुप्पी के बाद रोहन ने हामी भर दी।

शाम होते ही दोनों हवेली की ओर निकल पड़े।

जैसे-जैसे वे पहाड़ी पर चढ़ते गए…

हवा और भारी होती गई।

और फिर—

वो सामने थी।

पुरानी हवेली।

टूटी हुई दीवारें…

जंग लगा हुआ विशाल दरवाज़ा…

और चारों तरफ ऐसा सन्नाटा… जैसे समय रुक गया हो।

आराध्या ने दरवाज़े की तरफ देखा।

“चलो अंदर…”

रोहन ने रोकने की कोशिश की, लेकिन तब तक आराध्या आगे बढ़ चुकी थी।

उसने जैसे ही दरवाज़े को धक्का दिया—

कrrrrr…

लोहे का दरवाज़ा दर्द भरी आवाज़ के साथ खुला।

और उसी पल…

ठंडी हवा का तेज़ झोंका दोनों के चेहरे से टकराया।

दोनों अंदर कदम रखते हैं।

अंदर धूल, मकड़ी के जाले और अजीब सी गंध फैली हुई थी।

हर कदम पर फर्श चरमराता था।

अचानक—

आराध्या रुक गई।

उसकी नज़र फर्श पर पड़ी एक चीज़ पर गई।

एक पुरानी चमड़े की डायरी…

जो जैसे जानबूझकर वहाँ रखी गई हो।

रोहन ने फुसफुसाया—

“इसे मत उठाओ…”

लेकिन आराध्या ने बिना सोचे उसे उठा लिया।

डायरी का कवर ठंडा था… जैसे किसी ने अभी-अभी उसे छुआ हो।

उसने धीरे से पहला पन्ना खोला।

और उसी पल—

हवा रुक गई।

डायरी के अंदर एक नक्शा बना था।

हवेली का नक्शा।

और उसके बीचों-बीच लाल निशान के साथ लिखा था—

“यहाँ सच्चाई दफन है…”

आराध्या की उंगलियाँ कांपने लगीं।

तभी—

ठक… ठक… ठक…

किसी के चलने की आवाज़ आई।

दोनों जम गए।

आवाज़… हवेली के अंदर से आ रही थी।

लेकिन हवेली में तो वे दोनों के अलावा कोई नहीं था।

डायरी अपने आप हल्की-हल्की कांपने लगी।

पन्ने खुद-ब-खुद पलटने लगे।

फड़… फड़… फड़…

“ये… क्या हो रहा है…” रोहन पीछे हट गया।

और फिर—

पन्ने एक जगह रुक गए।

आराध्या ने नीचे देखा।

और उसकी सांस रुक गई।

उस पन्ने पर उसकी तस्वीर बनी हुई थी।

पुरानी… धुंधली…

लेकिन साफ पहचानने लायक।

“ये… मेरी फोटो यहाँ कैसे?”

तभी नीचे लिखा हुआ शब्द उसकी आँखों में चुभ गया—

“मृत्यु की तिथि: 13 जून, 2026”

डायरी उसके हाथ से गिर गई।

धड़ाम!

और उसी पल—

ऊपर की मंज़िल से तेज़ दौड़ने की आवाज़ आने लगी।

धम… धम… धम…

कोई सीधा उनकी तरफ आ रहा था।

रोहन ने ऊपर देखा।

और उसका चेहरा सफेद पड़ गया।

सीढ़ियों के अंधेरे में एक परछाईं खड़ी थी।

लाल आँखें…

सीधे आराध्या को घूर रही थीं।

और फिर एक आवाज़ गूंजी—

“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था…”

अचानक…

मुख्य दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।

धड़ाम!!!

पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

और उसी अंधेरे में—

एक आखिरी पन्ना अपने आप खुला।

जिस पर खून जैसे अक्षरों में लिखा था—

“अगला शिकार — आराध्या”

और उसी पल…

एक चीख हवेली में गूंज उठी।

“आआआआह्ह्ह…”

(क्रमशः…)

❓ क्या आराध्या बच पाएगी? या हवेली उसका अगला शिकार तय कर चुकी है?

Episodes
1 डायरी में मेरी मौत पहले से लिखी थी…
2 हवेली की पहली रात
3 बंद कमरे की फुसफुसाहट
4 दीवार के पीछे छिपा सच
5 आधी रात की परछाईं
6 डायरी का गायब पन्ना
7 भूली हुई तस्वीर
8 अतीत की दस्तक
9 रहस्यमयी परछाईं
10 छिपा हुआ रास्ता
11 भूली हुई आवाज़ें
12 तस्वीर का सच
13 अंधेरे का रखवाला
14 जला हुआ नक्शा"
15 आग वाली रात
16 तहखाने का दरवाज़ा"
17 गुमशुदा रिकॉर्ड
18 अधूरी फ़ाइल
19 आख़िरी गवाह
20 सीलबंद सच
21 यादों का कक्ष
22 बचपन की गूँज
23 अधूरी पहचान
24 भूली हुई कसमें
25 वह हमें जानता था
26 पुरानी वसीयत
27 बदला हुआ इतिहास
28 धुंधली तस्वीर
29 राख से पहले
30 रहस्यमयी आदमी की पहचान
31 साज़िश की रात
32 जलती हुई रात
33 राख में दबा सच
34 परछाइयों का पीछा
35 अनदेखा दुश्मन
36 ए.के. का पहला सुराग
37 शिकारी का जाल
38 अंतिम टकराव
Episodes

Updated 38 Episodes

1
डायरी में मेरी मौत पहले से लिखी थी…
2
हवेली की पहली रात
3
बंद कमरे की फुसफुसाहट
4
दीवार के पीछे छिपा सच
5
आधी रात की परछाईं
6
डायरी का गायब पन्ना
7
भूली हुई तस्वीर
8
अतीत की दस्तक
9
रहस्यमयी परछाईं
10
छिपा हुआ रास्ता
11
भूली हुई आवाज़ें
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अंधेरे का रखवाला
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15
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राख से पहले
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रहस्यमयी आदमी की पहचान
31
साज़िश की रात
32
जलती हुई रात
33
राख में दबा सच
34
परछाइयों का पीछा
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अनदेखा दुश्मन
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