गलियारे में ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि आराध्या और रोहन की साँसों की आवाज़ भी साफ सुनाई दे रही थी। हवेली की पुरानी दीवारों पर जमी धूल और मकड़ी के जाले इस जगह को और भी डरावना बना रहे थे। दोनों सावधानी से आगे बढ़ रहे थे। कुछ ही क्षण पहले उन्होंने जिस रहस्यमयी साये को देखा था, वह जैसे हवा में गायब हो गया था, लेकिन उसकी मौजूदगी अब भी महसूस हो रही थी।
आराध्या का दिल लगातार तेज़ी से धड़क रहा था। उसके कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे थे, मगर मन बार-बार उसे वापस लौट जाने के लिए कह रहा था। उसे ऐसा लग रहा था कि कोई उनकी हर हरकत पर नज़र रख रहा है।
"रोहन... तुम्हें भी ऐसा महसूस हो रहा है कि कोई हमारा पीछा कर रहा है?" उसने धीमी आवाज़ में पूछा।
रोहन ने टॉर्च की रोशनी पीछे घुमाई। कुछ पल तक उसने अंधेरे को ध्यान से देखा, फिर बोला, "हाँ... और मुझे नहीं लगता कि यह सिर्फ हमारा वहम है। यहाँ कोई है।"
उसकी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि गलियारे के आखिर से अचानक किसी भारी चीज़ के गिरने की आवाज़ गूँज उठी।
धड़ाम!
आवाज़ इतनी तेज़ थी कि दोनों बुरी तरह चौंक गए। उनका दिल मानो एक पल के लिए रुक गया। वे तुरंत उस दिशा में दौड़े जहाँ से आवाज़ आई थी।
लेकिन वहाँ पहुँचकर वे हैरान रह गए।
सामने सिर्फ एक पुरानी, धूल से ढकी दीवार खड़ी थी। आसपास कोई नहीं था।
"आवाज़ यहीं से आई थी..." रोहन बुदबुदाया।
उसी समय उसकी नज़र दीवार पर बने एक अजीब निशान पर पड़ी। वह बाकी दीवार से अलग दिखाई दे रहा था। जैसे किसी ने जानबूझकर उसे वहाँ उकेरा हो।
"आराध्या, ज़रा इधर देखो।"
आराध्या उसके पास आई और दोनों ने उस निशान को गौर से देखा। वह किसी पुराने चिन्ह जैसा लग रहा था। उसका आकार भी अजीब था और उसके चारों ओर दीवार का हिस्सा थोड़ा अलग दिखाई दे रहा था।
जिज्ञासा में आराध्या ने हाथ बढ़ाकर उस चिन्ह को छू लिया।
अचानक...
ठक!
दीवार के भीतर से किसी चीज़ के हिलने की आवाज़ आई।
दोनों एकदम पीछे हट गए।
फिर उनके सामने ऐसा हुआ जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
दीवार का एक हिस्सा धीरे-धीरे पीछे खिसकने लगा। पत्थरों के रगड़ने की आवाज़ पूरे गलियारे में गूँजने लगी।
कुछ ही क्षणों में वहाँ एक गुप्त रास्ता खुल गया।
उस रास्ते से बर्फ जैसी ठंडी हवा बाहर आ रही थी। हवा के साथ एक अजीब सी गंध भी थी, जैसे वर्षों से बंद किसी जगह का दरवाज़ा पहली बार खुला हो।
कुछ पल तक दोनों चुपचाप उस अंधेरे रास्ते को देखते रहे।
"हमें अंदर जाना चाहिए?" आराध्या ने हिचकिचाते हुए पूछा।
रोहन ने गहरी साँस ली।
"इतनी दूर आ चुके हैं। अब वापस लौटने का कोई मतलब नहीं।"
दोनों ने अपनी टॉर्चें संभालीं और उस गुप्त रास्ते के अंदर कदम रख दिया।
रास्ता बेहद संकरा था। दोनों को सावधानी से चलना पड़ रहा था। दीवारों पर नमी जमी हुई थी और जगह-जगह पानी की बूंदें टपक रही थीं। हर बूंद की आवाज़ उस सन्नाटे में कई गुना ज़्यादा सुनाई दे रही थी।
जैसे-जैसे वे आगे बढ़ रहे थे, वैसे-वैसे माहौल और भी रहस्यमयी होता जा रहा था।
कुछ मिनट चलने के बाद रास्ता अचानक खत्म हो गया और वे एक छोटे कमरे में पहुँच गए।
कमरे को देखकर दोनों की आँखें फैल गईं।
चारों तरफ पुरानी अलमारियाँ रखी थीं। कई लकड़ी के बक्से धूल से ढके पड़े थे। दीवारों पर पुराने चित्र टंगे हुए थे जिनके रंग लगभग मिट चुके थे।
कमरे के बीचोंबीच एक बड़ी लकड़ी की मेज़ रखी थी।
मेज़ पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी।
लेकिन एक चीज़ ऐसी थी जिस पर धूल का नामोनिशान नहीं था।
एक पुरानी डायरी।
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने हाल ही में उसे छुआ हो।
आराध्या का दिल ज़ोर से धड़क उठा।
"यही वही डायरी हो सकती है जिसके बारे में गाँव वाले बातें करते थे," उसने फुसफुसाते हुए कहा।
वह धीरे-धीरे आगे बढ़ी और काँपते हाथों से डायरी उठा ली।
डायरी का कवर पुराना और घिसा हुआ था।
उसने उसे खोला।
पहले कुछ पन्ने फटे हुए थे।
फिर एक पन्ने पर लाल स्याही से लिखे शब्द दिखाई दिए—
"सच जानने की कीमत जान से चुकानी पड़ती है।"
यह पढ़ते ही दोनों के चेहरे का रंग उड़ गया।
कमरे का वातावरण अचानक और भारी महसूस होने लगा।
रोहन ने डायरी अपने हाथ में ली और अगला पन्ना पलटा।
उस पर हवेली का एक पुराना नक्शा बना हुआ था।
नक्शे में हवेली के कई हिस्से दिखाए गए थे, लेकिन बीच में लाल रंग से एक गोल निशान बना था।
उस निशान के नीचे लिखा था—
"यहीं छिपा है वह सच, जिसने सबकी ज़िंदगी बदल दी।"
दोनों उस नक्शे को ध्यान से देखने लगे।
तभी अचानक कमरे में एक अजीब सी चमक दिखाई दी।
उन्होंने चौंककर सिर उठाया।
दीवार पर हल्की रोशनी फैल रही थी।
धीरे-धीरे उस रोशनी ने शब्दों का आकार लेना शुरू कर दिया।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई अदृश्य हाथ दीवार पर कुछ लिख रहा हो।
कुछ ही सेकंड में शब्द साफ दिखाई देने लगे—
"वापस चले जाओ..."
आराध्या का गला सूख गया।
उसके हाथ काँपने लगे।
"रोहन... यह हो क्या रहा है?" उसने घबराई हुई आवाज़ में पूछा।
लेकिन इससे पहले कि रोहन कुछ जवाब दे पाता—
धड़ाम!
कमरे का दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
दोनों बुरी तरह घबरा गए।
रोहन तुरंत दरवाज़े की तरफ भागा और उसे खोलने की कोशिश करने लगा।
उसने पूरी ताकत लगा दी।
लेकिन दरवाज़ा टस से मस नहीं हुआ।
उसी समय कमरे के एक कोने से किसी के रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी।
पहले बहुत धीमी...
फिर थोड़ी तेज़...
और फिर इतनी तेज़ कि पूरे कमरे में गूँजने लगी।
उस दर्दभरी आवाज़ को सुनकर दोनों के रोंगटे खड़े हो गए।
"कौन है वहाँ?" रोहन ज़ोर से चिल्लाया।
लेकिन जवाब में सिर्फ रोने की आवाज़ सुनाई दी।
अचानक आराध्या की नज़र दीवार पर पड़ी।
वहाँ एक लंबी दरार थी।
और उस दरार के पीछे से हल्की चमक निकल रही थी।
वह धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ी।
उसका दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि उसे लग रहा था मानो उसकी धड़कनें पूरे कमरे में सुनाई दे रही हों।
उसने हिम्मत करके दीवार को धक्का दिया।
अगले ही पल—
धड़ाम!
दीवार का एक हिस्सा टूटकर नीचे गिर पड़ा।
धूल का घना बादल पूरे कमरे में फैल गया।
कुछ सेकंड तक कुछ दिखाई नहीं दिया।
जब धूल धीरे-धीरे छँटने लगी, तो सामने का दृश्य देखकर दोनों के होश उड़ गए।
दीवार के पीछे एक और गुप्त कमरा था।
कमरे के बीचोंबीच एक पुरानी लकड़ी की कुर्सी रखी थी।
और उस कुर्सी पर कोई बैठा हुआ था।
अंधेरा होने की वजह से उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दे रहा था।
रोहन ने काँपते हाथों से टॉर्च उठाई और उसकी ओर रोशनी डाली।
जैसे ही रोशनी उस आकृति पर पड़ी, दोनों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
वह एक इंसान का कंकाल था।
उसकी खाली आँखों के गड्ढे सीधे उनकी तरफ देख रहे थे।
उसकी उँगलियों में एक मुड़ा हुआ कागज़ फँसा हुआ था।
डर के बावजूद आराध्या आगे बढ़ी और धीरे से वह कागज़ निकाल लिया।
उसने काँपते हाथों से उसे खोला।
उस पर सिर्फ एक पंक्ति लिखी थी—
"श्राप अभी खत्म नहीं हुआ है..."
इतना पढ़ना था कि अचानक पूरे कमरे में तेज़ हवा चलने लगी।
डायरी के पन्ने अपने आप पलटने लगे।
लकड़ी के बक्से हिलने लगे।
और उसी समय गलियारे से किसी के कदमों की आवाज़ सुनाई दी।
ठक...
ठक...
ठक...
आवाज़ धीरे-धीरे उनकी ओर बढ़ रही थी।
हर कदम के साथ उनका डर बढ़ता जा रहा था।
रोहन ने टॉर्च दरवाज़े की ओर घुमाई।
अंधेरे में कोई खड़ा था।
लंबा कद...
सफेद कपड़े...
और चमकती हुई आँखें...
वह साया धीरे-धीरे उनकी तरफ बढ़ने लगा।
आराध्या का शरीर डर से सुन्न पड़ गया।
रोहन भी अनायास एक कदम पीछे हट गया।
फिर उस साये ने धीरे-धीरे अपनी गर्दन टेढ़ी की।
उसके होंठों पर एक अजीब और भयानक मुस्कान उभर आई।
ऐसी मुस्कान, जिसे देखकर दोनों की चीख निकल गई।
उन्हें बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि उनकी यह खोज हवेली के सबसे खतरनाक रहस्य का दरवाज़ा खोल चुकी थी।
और जिस साये का वे इतने समय से पीछा कर रहे थे...
वह साया शुरू से ही उन पर नज़र रखे हुए था। 🔥
🔥 क्रमशः...
❓ आखिर वह रहस्यमयी साया कौन है जो हर पल आराध्या और रोहन पर नज़र रखे हुए है?
❓ कंकाल के हाथ में मिला संदेश किसने लिखा था, और "श्राप" का असली रहस्य क्या है?
❓ हवेली के नक्शे में बने लाल निशान के पीछे कौन-सा खौफनाक सच छिपा है?
❓ क्या आराध्या और रोहन इस भयानक जाल से बच पाएँगे, या वे भी हवेली के अगले शिकार बनने वाले हैं?
💬 आपके अनुसार उस गुप्त कमरे में मिला कंकाल किसका हो सकता है? अपनी राय कमेंट में ज़रूर बताइए!
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